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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   the stand of Brahmins will decide Kanpur Mayor, there are more than six lakh Brahmin voters

कानपुर मेयर घमासान: कुर्सी पर कौन?, ब्राह्मणों का रुख तय करेगा महापौर, छह लाख मतदाताओं के हाथ में चाभी

Wed, 03 May 2023 11:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 03 May 2023 11:35 AM IST
सार

UP Nikay Chunav 2023: कानपुर नगर निगम क्षेत्र में छह लाख से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं, जिनके हाथों में मेयर की कुर्सी की चाभी है। बताया जा रहा है कि ब्राह्मण मत ही चुनाव में निर्णायक होंगे। इसके चलते ब्राह्मण ही पार्टियों के महापौर पद के प्रत्याशी हैं।

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the stand of Brahmins will decide Kanpur Mayor, there are more than six lakh Brahmin voters
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में महापौर की कुर्सी पर कौन बैठेगा। इसे लेकर कोतूहल तो सभी में है, लेकिन चाभी ब्राह्मणों के हाथों में है। दरअसल, इस चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 22.17 लाख है। अकेले ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या छह लाख से अधिक है।

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ऐसे में कहा जा रहा है कि ब्राह्मण मतदाता जिसके पक्ष में वोट करेगा. जीत लगभग उसी की तय मानी जाएगी। नगर निगम बनने के बाद से अभी तक चुने गए पांच महापौर में से चार ब्राह्मण बिरादरी से रहे हैं। ऐसे में शुरू से ही नगर निगम चुनाव में ब्रह्मण मतदाताओं का दबदबा रहा है।
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इस बार प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, सपा और कांग्रेस की ओर से चुनाव मैदान में उतारे गए महापौर प्रत्याशी ब्राह्मण बिरादरी से हैं। भाजपा ने प्रमिला पांडेय को लगातार दूसरी बार प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह समाजवादी पार्टी ने इस बार वंदना बाजपेई पर दांव लगाया है।

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सपा को मान रही है मुख्य प्रतिद्वंद्वी
पिछली बार पार्टी ने पिछड़ी जाति के अवस्थी के रूप में लगातार दूसरी बार ब्राह्मण पर भरोसा जताया है। इस बार के चुनाव में जो परिस्थितियां दिख रही हैं। उसमें भाजपा, समाजवादी पार्टी को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानकर चल रही है।

पार्टी के हिसाब से मत मिलने पर शंका
इसी वजह से ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों में खींचतान शुरू हो गई है। इस बार ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वो किसकी और ज्यादा हैं। यह भी दिख रहा है कि एक दूसरे के यहां रिश्तेदारियां होने से भी पार्टी के हिसाब से मत मिलने पर शंका है।

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