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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   The police did not even budge; the family kept searching for their daughter, and her body was found after four days.

Kanpur News: पुलिस हिली तक नहीं, परिजन ही तलाशते रहे बेटी, चार दिन बाद हाथ लगा शव

Sat, 03 Oct 2026 02:31 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:31 AM IST
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The police did not even budge; the family kept searching for their daughter, and her body was found after four days.
रुचि - फोटो : फाइल फोटो
कानपुर। एलएलबी सेकंड ईयर की छात्रा रुचि दबौली वेस्ट से चार दिन से लापता थी। परिजन पुलिस के पास गए लेकिन गोविंदनगर थाने की पुलिस सिर्फ गुमशुदगी दर्ज कर बैठी रही। परिजन खुद बेटी की तलाश करते रहे। उन्होंने ही बेटी के सीसीटीवी फुटेज भी खोजे। उसी आधार पर तलाश की तो शुक्रवार को बेटी की चप्पलें रेलवे ट्रैक पर मिलीं। परिजन उसे लेकर चौकी पहुंचे। इसके बाद भी दरोगा ने यह दलील देकर परिजन को चलता करने की कोशिश की कि ऐसी चप्पलें तो कई कंपनियां बनाती हैं। कहासुनी होने पर दरोगा रेलवे ट्रैक की तरफ छात्रा की तलाश करने निकले तो वहां झाड़ियों में छात्रा का कई दिन पुराना शव पड़ा मिला। शव देखते ही परिजन पुलिस पर लापरवाही और बेटी की हत्या का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। इस पर भारी फोर्स मौके पर पहुंचा। मामले में रुचि के एक मित्र को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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दबौली वेस्ट निवासी चाय विक्रेता विमल पाल की बेटी रुचि (23) बीती 28 सितंबर की शाम घर से कुछ दूरी पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के लिए निकली थी। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। भाई विनय ने बताया कि वह उसी रात दादानगर चौकी गया था लेकिन पुलिस ने 24 घंटे के बाद आने को कहकर टरका दिया। इसके बाद 30 सितंबर को रुचि की गुमशुदगी दर्ज की लेकिन उसे तलाशने का का कोई प्रयास नहीं किया। शुक्रवार सुबह विनय अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित रेलवे ट्रैक पर पहुंचा जहां पहले रुचि की चप्पलें और बाद में शव मिला। रुचि के फोन से आखिरी कॉल पुखरायां निवासी ओमवीर यादव को हुई थी। ओमवीर कभी रुचि के साथ कोचिंग पढ़ता था। फिलहाल वह लखनऊ में रेलवे में प्राइवेट नौकरी करता है। इसी आदार पर रुचि के घरवालों ने ओमवीर के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। हालांकि, पुलिस को युवक की लोकेशन पूरे घटनाक्रम के दौरान लखनऊ की ही मिली है। लेकिन, आखिरी कॉल के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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लाडो कहती थी... पापा ज्यादा नहीं बेचने दूंगी चाय
पिता विमल पाल ने बताया कि लाडो पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी काफी तेज थी। वह जूडो कराटे सीख रही थी और उसने एनसीसी भी की थी। स्कूल-कॉलेजों में बिटिया को कई मेडल भी मिले हैं। बच्चों को बड़ी मेहनत से पढ़ाया था। बिटिया कहती थी कि पापा अब ज्यादा दिन चाय नहीं बेचने देगी। वकालत की पढ़ाई पूरी होते ही वह अपने पैरों पर खड़़ी होकर घर का बोझ अपने कंधों पर ले लेगी। मां गुड्डी के मुताबिक अरमान थे कि बेटी की डोली देखेंगी, क्या पता था कि अर्थी देखनी पड़ेगी।
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सिर्फ आखिरी बार बात करने से बन गया आरोपी
रुचि की मौत के आरोप में पुलिस ने उससे आखिरी बार बात करने वाले ओमवीर को पकड़ लिया है। ओम के करीबियों का कहना है कि उसकी गलती सिर्फ इतनी है कि रुचि की आखिरी बार उससे बात हुई थी। इसी से वह पुलिस के लिए आरोपी बन गया। यदि वह आरोपी था तो 30 सितंबर को पूछताछ के बाद उसे क्यों छोड़ा। बता दें कि ठीक इसी तरह कुछ दिन पहले दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में भी बहू शालू को भी गलत आरोप में जेल भेज दिया था। बाद में उसे रिहा भी कराना पड़ा।


पैनल से पोस्टमार्टम आज, आरोपों की भी होगी जांच
रुचि का शव टुकड़ों के बजाय साबुत मिला है। उसकी कमर के पास चोट के निशान भी हैं। इससे इतना तय है कि वह ट्रेन से कटी तो नहीं है। मामला हत्या, आत्महत्या और हादसे का भी हो सकता है। डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक शनिवार को पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। रही बात चौकी इंचार्ज पर लगे लापरवाही के आरोप की तो उसकी भी जांच कराई जा रही है। हत्या की प्राथमिकी की भी विवेचना कर धाराओं में परिवर्तन किया जा सकता है।
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