कानपुर। मिग 21 शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गया। 1965-1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1999 कारगिल युद्ध, बालाकोट स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में भारत का शौर्य बढ़ाने वाले जंगी जहाज को चंडीगढ़ में विदाई दी गई। समारोह में मिग-21 की मेंटेनेंस टीम में शामिल रहे शहर के पूर्व वारंट अफसर भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि मिग 21 लड़ाकू विमान सबसे कम समय में आसमान में उड़ान भरता था।
न्यू डिफेंस कॉलोनी कृष्णानगर निवासी वारंट अफसर (सेवानिवृत्त) अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि वह 24 साल तक मिग 21 से जुड़े रहे। राजस्थान, गुजरात, श्रीनगर समेत अलग-अलग बेस कैंप में मरम्मत का काम किया। मिग 21 अपने समय का सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान था। इसकी खासियत थी कि यह टेकऑफ और आसमान में उड़ने में सबसे कम समय लेता था। ध्वनि की तीव्रता से भी तेजी के साथ पलक झपकते ही विमान आसमान में होता था। मिसाइल, राकेट दागने में सक्षम यह एक इंटरसेप्टर लड़ाकू विमान था। शेड्यूलिंग के अनुसार इसकी मरम्मत की जाती थी। इसके लिए छह महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। आज इसकी विदाई का क्षण बेहद भावुक करने वाला है। सनिगवां निवासी वारंट अफसर (सेवानिवृत्त) संतोष कुमार ने बताया कि मिग 21 की विदाई समारोह में शामिल होकर खुद पर गर्व महसूस कर रहे हैं। मिग 21 ने हमेशा बेहतर प्रदर्शन किया है। दोनों वारंट ऑफिसर सेवानिवृत्त अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद से भी जुड़े हैं।