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कोरोना ठीक होने के छह महीने तक कमजोर रहते हैं फेफड़े, खत्म हो रहीं एंटीबॉडीज, दोबारा संक्रमण का खतरा
Mon, 21 Dec 2020 12:44 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 21 Dec 2020 12:44 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना से ठीक होने के बाद ठंडक के इस मौसम में लोगों में सांस की दिक्कत बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के छह महीने तक फेफड़ों में कमजोरी रह सकती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल घटने व हार्ट की दिक्कत बढ़ने का खतरा है।
साथ ही जांच में एक तथ्य यह भी उजागर हुआ है कि कोरोना एंटीबॉडीज डेढ़ महीने में ही खत्म हो जा रही हैं। इससे दोबारा संक्रमण हो सकता है। कोरोना से ठीक हुए लोगों की जांच में अलग-अलग एंटीबॉडीज मिल रही हैं। वैसे तो एंटीबॉडीज तीन महीने तक रहती हैं लेकिन कुछ मरीजों में डेढ़ महीने के अंदर ही घट जा रहीं।
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सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर के खून में महीने भर में ही एंटीबॉडीज खत्म हो गईं। जिससे दोबारा संक्रमण हो गया। डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार ने कहा कि एंटीबॉडीज के चक्कर में न रहें, दो गज दूरी, मास्क जरूरी का फार्मूला अपनाएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक होने के महीने-डेढ़ महीने बाद मरीज गंभीर स्थिति में आने लगे हैं। संक्रमण खत्म होने के बाद हार्ट व सांस लेने में दिक्कतें उभर रही हैं। सीनियर फिजिशियन डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि मरीजों को सीधे वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। कुछ को हार्ट अटैक पड़ गया है।
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साथ ही जांच में एक तथ्य यह भी उजागर हुआ है कि कोरोना एंटीबॉडीज डेढ़ महीने में ही खत्म हो जा रही हैं। इससे दोबारा संक्रमण हो सकता है। कोरोना से ठीक हुए लोगों की जांच में अलग-अलग एंटीबॉडीज मिल रही हैं। वैसे तो एंटीबॉडीज तीन महीने तक रहती हैं लेकिन कुछ मरीजों में डेढ़ महीने के अंदर ही घट जा रहीं।
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सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर के खून में महीने भर में ही एंटीबॉडीज खत्म हो गईं। जिससे दोबारा संक्रमण हो गया। डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार ने कहा कि एंटीबॉडीज के चक्कर में न रहें, दो गज दूरी, मास्क जरूरी का फार्मूला अपनाएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक होने के महीने-डेढ़ महीने बाद मरीज गंभीर स्थिति में आने लगे हैं। संक्रमण खत्म होने के बाद हार्ट व सांस लेने में दिक्कतें उभर रही हैं। सीनियर फिजिशियन डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि मरीजों को सीधे वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। कुछ को हार्ट अटैक पड़ गया है।