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Kanpur News: पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वालों को शहीद घोषित करे सरकार
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कानपुर। क्या कहूं और क्या न कहूं... समझ में नहीं आता है। बस यह समझ लीजिए कि मायके और ससुराल दोनों ही पक्ष के लोग हमारे साथ हर कदम पर मजबूती से खड़े हैं। हमने जो खोया है उसकी भरपाई इस जन्म में हो ही नहीं पाएगी। बस केंद्र सरकार से यही मांग है कि पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले सभी 26 लोगों को शहीद घोषित कर उनका एक स्मारक बनाया जाए ताकि सभी पीड़ित परिवारों को संबल मिल सके। यह बातें पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने मंगलवार को अमर उजाला से कही।
महाराजपुर थाना क्षेत्र के हाथीपुर के रघुवीर नगर के मूल निवासी और श्यामनगर में रहने वाले सीमेंट कारोबारी डॉ. संजय द्विवेदी और सीमा द्विवेदी के इकलौते बेटे शुभम और ऐशान्या की शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी। शुभम अपने पिता के कारोबार में हाथ बंटाते थे। शादी के बाद परिजन के साथ शुभम और ऐशान्या 18 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर घूमने गए थे। सभी को 23 अप्रैल 2025 को घर लौटना था। 22 अप्रैल 2025 को परिवार पहलगाम पहुंचा। शुभम और ऐशान्या हिल स्टेशन घूमने निकल गए। हिल स्टेशन पर ही 25 अन्य पर्यटकों के साथ शुभम की भी आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी।
ऐशान्या ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, ऐसा कह कर या लिख कर हम उनकी शहादत की तौहीन करते हैं। जब तक सरकार सभी 26 लोगों को शहीद घोषित नहीं करती, हमारी मांग जारी रहेगी। ऐशान्या ने कहा कि अब शुभम कभी लौटकर नहीं आएंगे, यह हकीकत है। हालांकि मन कहां मानता है और लगता है कि अभी शुभम सामने आकर खड़े हो जाएंगे। हमें जन्म देनी वाली मां-पिता के साथ ही हमारे सास-ससुर भी माता-पिता से कम नहीं हैं। इसलिए पूरा प्रयास यही रहता है कि हमारे सास-ससुर स्वस्थ और खुश रहें।
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महाराजपुर थाना क्षेत्र के हाथीपुर के रघुवीर नगर के मूल निवासी और श्यामनगर में रहने वाले सीमेंट कारोबारी डॉ. संजय द्विवेदी और सीमा द्विवेदी के इकलौते बेटे शुभम और ऐशान्या की शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी। शुभम अपने पिता के कारोबार में हाथ बंटाते थे। शादी के बाद परिजन के साथ शुभम और ऐशान्या 18 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर घूमने गए थे। सभी को 23 अप्रैल 2025 को घर लौटना था। 22 अप्रैल 2025 को परिवार पहलगाम पहुंचा। शुभम और ऐशान्या हिल स्टेशन घूमने निकल गए। हिल स्टेशन पर ही 25 अन्य पर्यटकों के साथ शुभम की भी आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी।
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ऐशान्या ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, ऐसा कह कर या लिख कर हम उनकी शहादत की तौहीन करते हैं। जब तक सरकार सभी 26 लोगों को शहीद घोषित नहीं करती, हमारी मांग जारी रहेगी। ऐशान्या ने कहा कि अब शुभम कभी लौटकर नहीं आएंगे, यह हकीकत है। हालांकि मन कहां मानता है और लगता है कि अभी शुभम सामने आकर खड़े हो जाएंगे। हमें जन्म देनी वाली मां-पिता के साथ ही हमारे सास-ससुर भी माता-पिता से कम नहीं हैं। इसलिए पूरा प्रयास यही रहता है कि हमारे सास-ससुर स्वस्थ और खुश रहें।
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