{"_id":"607aea1ee7864b493b788189","slug":"the-family-strayed-for-the-whole-night-on-friday-and-was-not-admitted-anywhere-died-in-the-morning","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना का कहर: पूरी रात बेड के लिए भटकते-भटकते संक्रमित ने दम तोड़ा, कहीं नहीं किया गया भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना का कहर: पूरी रात बेड के लिए भटकते-भटकते संक्रमित ने दम तोड़ा, कहीं नहीं किया गया भर्ती
Sat, 17 Apr 2021 07:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 17 Apr 2021 07:36 PM IST
सार
कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। हालत बदतर हैं। कोरोना की चपेट में आए लोग जान बचाने के लिए अस्पतालों में बेड के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
विज्ञापन
कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। हालत बदतर हैं। कोरोना की चपेट में आए लोग जान बचाने के लिए अस्पतालों में बेड के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ऐसे ही बर्रा के रोगी रवि श्रीवास्तव (56) को लेकर परिजन शुक्रवार सारी रात बेड के लिए भटकते रहे लेकिन कहीं भर्ती नहीं किया गया।
रात भर भागदौड़ के बाद परिजन उन्हें घर ले आए। सुबह उनकी मौत हो गई। बिना बेड के मर जा रहे कोरोना रोगियों की मौत सिस्टम पर सवालिया निशान लगा रही है। रवि श्रीवास्तव के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद एकीकृत कोरोना कमांड सेंटर से उन्हें नारायणा मेडिकल कालेज में भर्ती होने के लिए कहा गया था।
परिजन उन्हें लेकर नारायणा पहुंचे तो मना कर दिया गया कि बेड खाली नहीं है। बहुत देर परिजन खड़े रहे। इस दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। आक्सीजन सेच्युरेशन 65-70 के बीच आ गया। परिजन उन्हें लेकर कोविड स्टेटस वाले दूसरे अस्पतालों में भी गए लेकिन सबने कह दिया कि बेड खाली नहीं हैं।
विज्ञापन
रवि के 28 साल के बेटे की भी हालत बिगड़ गई। वह भी कोरोना संक्रमित है। उसे भी बेड नहीं मिला है। घरवालों ने कहीं से सिलिंडर लाकर उन्हें घर पर रखा है। किसी अस्पताल में बेड मिल जाए, इसके लिए कोशिशें कर रहे हैं। दो-तीन दिन पहले रवि के कोरोना संक्रमित साढ़ू सुनील (52) की भी हैलट के न्यूरो साइंसेज लेवल थ्री कोविड हॉस्पिटल में मौत हो गई थी।
विज्ञापन
रात भर भागदौड़ के बाद परिजन उन्हें घर ले आए। सुबह उनकी मौत हो गई। बिना बेड के मर जा रहे कोरोना रोगियों की मौत सिस्टम पर सवालिया निशान लगा रही है। रवि श्रीवास्तव के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद एकीकृत कोरोना कमांड सेंटर से उन्हें नारायणा मेडिकल कालेज में भर्ती होने के लिए कहा गया था।
विज्ञापन
परिजन उन्हें लेकर नारायणा पहुंचे तो मना कर दिया गया कि बेड खाली नहीं है। बहुत देर परिजन खड़े रहे। इस दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। आक्सीजन सेच्युरेशन 65-70 के बीच आ गया। परिजन उन्हें लेकर कोविड स्टेटस वाले दूसरे अस्पतालों में भी गए लेकिन सबने कह दिया कि बेड खाली नहीं हैं।
विज्ञापन
रवि के 28 साल के बेटे की भी हालत बिगड़ गई। वह भी कोरोना संक्रमित है। उसे भी बेड नहीं मिला है। घरवालों ने कहीं से सिलिंडर लाकर उन्हें घर पर रखा है। किसी अस्पताल में बेड मिल जाए, इसके लिए कोशिशें कर रहे हैं। दो-तीन दिन पहले रवि के कोरोना संक्रमित साढ़ू सुनील (52) की भी हैलट के न्यूरो साइंसेज लेवल थ्री कोविड हॉस्पिटल में मौत हो गई थी।