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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   The elders who witnessed the first morning of independence shared the picture of the special day with Amar Uja

अमृत महोत्सव: अपनी आंखों से देखा है आजादी का दिन, चांदी की सिल्लियों से बना था गेट, एक साल चला था जश्न

Mon, 15 Aug 2022 08:56 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 15 Aug 2022 08:56 AM IST
सार

एक दिन पहले से ही मनाया जाने लगा था आजादी का जश्न। तिरंगे से पटा था शहर और आजादी का जश्न एक साल चलता रहा था। आजादी की पहली सुबह के गवाह शहर के बुजुर्गों ने अमर उजाला से साझा की उस खास दिन की तस्वीर।

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The elders who witnessed the first morning of independence shared the picture of the special day with Amar Uja
रवि शंकर मेहरोत्रा, कृष्णा सिंह और गायत्री अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हम सभी आजादी के 76वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। युवाओं ने आजाद भारत में जन्म लेकर सांस ली है। हमारे बीच कुछ ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जिन्होंने गुलाम भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद होते देखा है। हम उनकी जुबानी आपको गुलामी से आजाद हुए भारत की आंखों देखी तस्वीर बताने जा रहे हैं। आजादी के दिन कैसा जश्न और कैसा माहौल था...15 अगस्त 1947 को आजाद हुए भारत की वो सुबह...

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हाथों में तिरंगा लेकर नाच रहे थे बच्चे
केशवपुरम की रहने वाली गायत्री अवस्थी ने बताया कि 15 अगस्त 1947 में वह दस साल की थीं। कमला टॉवर में रहती थीं। 14 अगस्त 1947 से ही आजादी का जश्न शुरू हो गया था। बच्चे तिरंगा हाथों में लिए नाच रहे थे। पूरा शहर तिरंगे से पटा था।
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भारत माता की जय के नारों से गलियां, सड़कें गूंज रही थीं। 15 अगस्त की सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ पूरा शहर सड़क पर था। प्रभात फेरी के रूप में हम सब नयागंज पहुंचे, जहां चांदी की सिल्लियों का बड़ा गेट बनाकर स्वतंत्रता का स्वागत किया जा रहा था। देर शाम तक घूमते रहे। स्वतंत्रता सेनानियों का चौतरफा अभिनंदन किया जा रहा था।

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एक साल चलता रहा था आजादी का जश्न
गोविंद नगर की रहने वालीं 82 वर्षीय कृष्णा सिंह ने बताया कि गांव में भारत माता की जय के नारे लग रहे थे। तभी खुशिया दादा ने आकर खबर दी कि हमारा देख आजाद हो गया है। हम तो बच्चे थे, लेकिन पिता जी खुशी से झूम उठे और हाथ में तिरंगा झंडा लेकर बाहर निकल गए।

जाते जाते अम्मा से बोले पुआ बनाओ, आज खुशी का दिन है। इसके बाद अम्मा हम तीनों भाई बहन को लेकर कुटिया पर पहुंचीं, जहां सबने मिलकर झंडा फहराया। आजादी का वो जश्न लगभग एक साल तक चलता रहा था। लोगों की खुशियां देखते ही बनती थीं।

जब सड़कों पर गोरे नजर आना बंद हो गए
नवशील धाम के रहने वाले 100 साल के रवि शंकर मेहरोत्रा (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) ने बताया कि प्रताप प्रेस में क्रांतिकारियों संग बिताए दिन जहन में बसे हैं। उनके लिए घर से कपड़ों में खाना छिपाकर ले जाते थे। 14 अगस्त से ही आजादी मिलने की सूचना मिल गई थी।

पहली सुबह थी, जब सड़कों पर गोरे नजर आना बंद हो गए थे। शायद ही कोई चौराहा बचा हो जहां तिरंगा न फहरा हो और मिठाई न बंटी हो। हम सभी स्वतंत्रता सेनानी मेस्टन रोड पर थे। घरों में मीठा पकवान बन रहा था और चारों तरफ खुशी का माहौल था।

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