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नहर में डूबकर चार साल के बच्चे की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 22 Jan 2015 03:10 AM IST
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जेके मंदिर के पास बसे नहरिया मोहल्ले में बुधवार को मासूम कृष्णा (4) की नहर में डूबकर मौत हो गई। वह खेलते समय नहर में पानी से भरे कई फीट गहरे गड्ढे में गिर गया था।
इधर, नजीराबाद एसओ वीरेंद्र यादव ने बताया कि हादसे में बच्चे की मौत हुई है। किसी पर कोई आरोप या तहरीर नहीं दी गई है। कृष्णा हलवाई कैलाश का छोटा बेटा था।
बुधवार को कैलाश और उसकी पत्नी गीता देवी अपने काम पर चले गए। कृष्णा पड़ोसी के तीन साल के बेटे के साथ खेलते - खेलते कमरे से करीब 50 मीटर दूर चला गया।
मोहल्ले वालों ने बताया कि अक्सर लोग नहर में ताश के पत्ते फेंक देते हैं। कृष्णा को उसे बटोरने का शौक था। दो दिन पहले भी वह ताश बटोरते चक्कर में गिरकर चुटहिल हुआ था।
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कयास लगाया गया कि ताश बटोरने के चक्कर में ही पैर फिसलने से कृष्णा नहर के गंदे पानी में गिरकर डूब गया होगा। इधर, लल्ला चट्टे वाले का तीन साल का बेटा अपने परिजनों को हादसे के बारे में बता रहा था।
लेकिन कोई उसकी बात समझ नहीं पा रहा था। शाम को साढ़े पांच बजे मां गीता देवी घर आईं तो कृष्णा को न देख घबरा गईं। तलाश शुरू हुई। बेटे अंबुज ने लल्ला के बेटे के साथ कृष्णा के खेलने की बात कही।
लल्ला के बेटे को कुछ बताता देख लोग उसके पीछे चलने लगे। नहर में गहरी पाइप लाइन पड़ने के बाद से जगह-जगह गंदा पानी भरा है।
बच्चा एक जगह रुक गया। इशारा करने पर भाई पंकज ने डंडे से पानी को हिलाया तो कृष्णा की चप्पल देख वह चीख पड़ा।
मोहल्ले वालों की मदद से कृष्णा को बाहर निकाला गया। बच्चे को केएमसी अस्पताल ले गए। पर, उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया।
इसी नहर से सटे दूसरे मोहल्ले में करीब चार-पांच साल पहले दुलारे की बेटी की डूबकर मौत हुई थी।
मोहल्ले वालों ने बताया कि गहरी पेयजल पाइप लाइन डालते समय यह भरोसा दिया गया था कि नहर के ऊपर लोहे की जाल डाली जाएगी। इसके अलावा दोनों तरफ दीवार बनेगी। लेकिन यह काम पूरा नहीं किया गया।
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इधर, नजीराबाद एसओ वीरेंद्र यादव ने बताया कि हादसे में बच्चे की मौत हुई है। किसी पर कोई आरोप या तहरीर नहीं दी गई है। कृष्णा हलवाई कैलाश का छोटा बेटा था।
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बुधवार को कैलाश और उसकी पत्नी गीता देवी अपने काम पर चले गए। कृष्णा पड़ोसी के तीन साल के बेटे के साथ खेलते - खेलते कमरे से करीब 50 मीटर दूर चला गया।
मोहल्ले वालों ने बताया कि अक्सर लोग नहर में ताश के पत्ते फेंक देते हैं। कृष्णा को उसे बटोरने का शौक था। दो दिन पहले भी वह ताश बटोरते चक्कर में गिरकर चुटहिल हुआ था।
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कयास लगाया गया कि ताश बटोरने के चक्कर में ही पैर फिसलने से कृष्णा नहर के गंदे पानी में गिरकर डूब गया होगा। इधर, लल्ला चट्टे वाले का तीन साल का बेटा अपने परिजनों को हादसे के बारे में बता रहा था।
लेकिन कोई उसकी बात समझ नहीं पा रहा था। शाम को साढ़े पांच बजे मां गीता देवी घर आईं तो कृष्णा को न देख घबरा गईं। तलाश शुरू हुई। बेटे अंबुज ने लल्ला के बेटे के साथ कृष्णा के खेलने की बात कही।
लल्ला के बेटे को कुछ बताता देख लोग उसके पीछे चलने लगे। नहर में गहरी पाइप लाइन पड़ने के बाद से जगह-जगह गंदा पानी भरा है।
बच्चा एक जगह रुक गया। इशारा करने पर भाई पंकज ने डंडे से पानी को हिलाया तो कृष्णा की चप्पल देख वह चीख पड़ा।
मोहल्ले वालों की मदद से कृष्णा को बाहर निकाला गया। बच्चे को केएमसी अस्पताल ले गए। पर, उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया।
इसी नहर से सटे दूसरे मोहल्ले में करीब चार-पांच साल पहले दुलारे की बेटी की डूबकर मौत हुई थी।
मोहल्ले वालों ने बताया कि गहरी पेयजल पाइप लाइन डालते समय यह भरोसा दिया गया था कि नहर के ऊपर लोहे की जाल डाली जाएगी। इसके अलावा दोनों तरफ दीवार बनेगी। लेकिन यह काम पूरा नहीं किया गया।