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जलभराव से 100 बीघा फसल खराब होने का संकट, बढ़ी किसानों की चिंता
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रजबहा पटरी कटने से जलमग्न फसल। संवाद
- फोटो : PUKHRAYAN
पुखरायां। अटवा रजबहा की पटरी कटने से 100 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। खेतों से पानी का निकास नहीं होने से अब किसानों को फसल सड़ने का खतरा सताने लगा है।
किसानों का आरोप है कि एक माह में कई जगह पटरी कटने से काफी फसल प्रभावित हुई है। शिकायत के बाद भी कोई भी अधिकारी गांव पहुंचकर समस्या का निदान नहीं कराता है। इससे खुद ही रजबहा की पटरी की मरम्मत करनी पड़ती है।
हैदरपुर गांव के पास सोमवार की रात अटवा रजबहा की पटरी कटने से क्षेत्र में करीब 100 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। मंगलवार की देर रात तक किसानों ने किसी तरह बोरियों में मिट्टी भरकर पटरी की मरम्मत की।
इसके बाद भी रजबहा के बराबर से पानी बह रहा है। इससे किसानों को फिर से पटरी कटने की आशंका है। वहीं खेतों से पानी नहीं निकलने से फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है।
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किसानों का कहना है कि जब विभागीय अधिकारियों से पानी के तेज बहाव से पटरी कटने की बात कही गई तो उन्होंने नहर का पानी बंद कराने की बात कही। इसके बाद भी रजबहा में तेजी से पानी आ रहा है।
किसान स्वयं चंदा करके समस्या का निदान करने को मजबूर है। इतना ही नहीं जब तक पानी बंद नहीं होता तब तक किसानों को लगातार रजबहा की निगरानी करनी पड़ रही है।
नहर का पानी बंद कराए जाने के बाद क्यों छोड़ा गया इसकी जानकारी कराई जा रही है। रजबहों की खुदाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अवर अभियंता ने बताया है कि नहर का पानी बंद करा दिया गया है। - जनार्दन सिंह, एसडीओ, इटावा प्रखंड
नहर का पानी पहले ही बंद कराया जा चुका है। अटवा रजबहा में पानी पहुंचने की जानकारी ली गई है। जहां पर पटरी कटी थी उसे बांध दिया गया है। जब तक पानी उतर नहीं जाता तब तक समस्या बनी हुई है। - सुमिरन कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग
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किसानों का आरोप है कि एक माह में कई जगह पटरी कटने से काफी फसल प्रभावित हुई है। शिकायत के बाद भी कोई भी अधिकारी गांव पहुंचकर समस्या का निदान नहीं कराता है। इससे खुद ही रजबहा की पटरी की मरम्मत करनी पड़ती है।
हैदरपुर गांव के पास सोमवार की रात अटवा रजबहा की पटरी कटने से क्षेत्र में करीब 100 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। मंगलवार की देर रात तक किसानों ने किसी तरह बोरियों में मिट्टी भरकर पटरी की मरम्मत की।
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इसके बाद भी रजबहा के बराबर से पानी बह रहा है। इससे किसानों को फिर से पटरी कटने की आशंका है। वहीं खेतों से पानी नहीं निकलने से फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है।
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किसानों का कहना है कि जब विभागीय अधिकारियों से पानी के तेज बहाव से पटरी कटने की बात कही गई तो उन्होंने नहर का पानी बंद कराने की बात कही। इसके बाद भी रजबहा में तेजी से पानी आ रहा है।
किसान स्वयं चंदा करके समस्या का निदान करने को मजबूर है। इतना ही नहीं जब तक पानी बंद नहीं होता तब तक किसानों को लगातार रजबहा की निगरानी करनी पड़ रही है।
नहर का पानी बंद कराए जाने के बाद क्यों छोड़ा गया इसकी जानकारी कराई जा रही है। रजबहों की खुदाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अवर अभियंता ने बताया है कि नहर का पानी बंद करा दिया गया है। - जनार्दन सिंह, एसडीओ, इटावा प्रखंड
नहर का पानी पहले ही बंद कराया जा चुका है। अटवा रजबहा में पानी पहुंचने की जानकारी ली गई है। जहां पर पटरी कटी थी उसे बांध दिया गया है। जब तक पानी उतर नहीं जाता तब तक समस्या बनी हुई है। - सुमिरन कुमार, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग