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कॉलेज बंद करने की फीस एक लाख रुपये घटाई
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 05 Feb 2015 03:27 AM IST
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लगातार इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज बंद करने के आवेदनों के मद्देनजर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और उसके कोर्स बंद करने की फीस एक लाख रुपये कम कर दी है। अब दो लाख रुपये फीस जमा करके इंस्टीट्यूट या कोर्स बंद कराया जा सकता है।
यह व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2015-16 से लागू की गई है। इससे पहले बंदी की फीस तीन लाख रुपये थी। जो फीस जमा कराई जाएगी, वह रिफंडेबल नहीं होगी। समयसीमा के अंदर राज्य सरकार और संबद्ध यूनिवर्सिटी से नान ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेकर एआईसीटीई से बंदी का आदेश जारी कराया जा सकता है।
यह काम समयसीमा के अंदर नहीं हुआ तो फीस लैप्स हो जाएगी। मालूम हो कि नए इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज खोलने का क्रेज कम हुआ है। कानपुर, उन्नाव और लखनऊ के 11 इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई से तौबा कर ली है।
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इन सबने इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करके निजी मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला किया है। इसकी एनओसी भी राज्य सरकार से प्राप्त कर ली है। अब इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक यूपीटीयू, एआईसीटीई से एनओसी लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से मान्यता लेने की कोशिश कर रहे हैं।
कानपुर के कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, एक्सिस ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन और नारायणा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने मेडिकल कॉलेज खोलने की एनओसी मांगी है।
सरस्वती इंजीनियरिंग कॉलेज उन्नाव ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बंद करके हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर खोल दिया है। लखनऊ की इंटीगरल यूनिवर्सिटी, प्रसाद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन और एमसी सक्सेना सहित छह इंजीनियरिंग कॉलेजों ने मेडिकल की पढ़ाई की अनुमति मांगी है।
हालांकि कुछ कॉलेजों को एआईसीटीई से एनओसी नहीं मिली है। एनओसी मिलने के बाद ही निजी मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
इंस्टीट्यूट, कोर्स क्लोजिंग की फीस इस बार कम कर दी है। मान्यता के आवेदन आ रहे हैं। तमाम इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं, जो कि निजी मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते हैं। इसके लिए क्लोजिंग की एनओसी भी मांगी गई है। राज्य सरकार और यूपीटीयू से क्लोजिंग की एनओसी मिलने के बाद ही एआईसीटीई एनओसी देती है।
-एके शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी एआईसीटीई कानपुर परिक्षेत्र
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यह व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2015-16 से लागू की गई है। इससे पहले बंदी की फीस तीन लाख रुपये थी। जो फीस जमा कराई जाएगी, वह रिफंडेबल नहीं होगी। समयसीमा के अंदर राज्य सरकार और संबद्ध यूनिवर्सिटी से नान ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेकर एआईसीटीई से बंदी का आदेश जारी कराया जा सकता है।
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यह काम समयसीमा के अंदर नहीं हुआ तो फीस लैप्स हो जाएगी। मालूम हो कि नए इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज खोलने का क्रेज कम हुआ है। कानपुर, उन्नाव और लखनऊ के 11 इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई से तौबा कर ली है।
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इन सबने इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करके निजी मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला किया है। इसकी एनओसी भी राज्य सरकार से प्राप्त कर ली है। अब इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक यूपीटीयू, एआईसीटीई से एनओसी लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से मान्यता लेने की कोशिश कर रहे हैं।
कानपुर के कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, एक्सिस ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन और नारायणा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने मेडिकल कॉलेज खोलने की एनओसी मांगी है।
सरस्वती इंजीनियरिंग कॉलेज उन्नाव ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बंद करके हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर खोल दिया है। लखनऊ की इंटीगरल यूनिवर्सिटी, प्रसाद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन और एमसी सक्सेना सहित छह इंजीनियरिंग कॉलेजों ने मेडिकल की पढ़ाई की अनुमति मांगी है।
हालांकि कुछ कॉलेजों को एआईसीटीई से एनओसी नहीं मिली है। एनओसी मिलने के बाद ही निजी मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
इंस्टीट्यूट, कोर्स क्लोजिंग की फीस इस बार कम कर दी है। मान्यता के आवेदन आ रहे हैं। तमाम इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं, जो कि निजी मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते हैं। इसके लिए क्लोजिंग की एनओसी भी मांगी गई है। राज्य सरकार और यूपीटीयू से क्लोजिंग की एनओसी मिलने के बाद ही एआईसीटीई एनओसी देती है।
-एके शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी एआईसीटीई कानपुर परिक्षेत्र