{"_id":"57508a744f1c1b802f109199","slug":"the-challenge-of-increased-expectations-of-the-people-and-the-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं और पुलिस की चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं और पुलिस की चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:05 AM IST
विज्ञापन
रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में आयोजित वर्कशाप में शिरकत करते समाजसेवी व उद्यमी।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर। प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनने जा रहे महिला-पुरुष रंगरूटों के ओरिएंटेशन के लिए आयोजित वर्कशाप में कहा गया कि अब लोगों की पुलिस से अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं और इससे पुलिस के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। इस स्थिति में पुलिस को बहुत धैर्य के साथ ऐसा व्यवहार पेश करना है जिससे पुलिस- पब्लिक के बीच का अंतर कम हो जाए। ऐसा व्यवहार करें कि आम आदमी पुलिस से डरे नहीं बल्कि पुलिस से जुड़े। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि पुलिस लाइन में 292 महिला और 196 पुरुष रंगरूट ट्रेनिंग ले रहे हैं जिन्हें जल्द ही वर्दी मिलने वाली है। कई महिला रंगरूट एमबीए, एमएससी, बीएड, बीटीसी हैं। बुद्िध्ाजीवियों
एसएसपी की ओर से गुरुवार को रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में ‘पुलिस के समक्ष चुनौतियां और जन अपेक्षाएं’ विषय पर वर्कशाप का आयोजन किया गया। वर्कशाप के माध्यम से नए रंगरूटों को प्रेरणा प्रदान करते हुए पुलिस और जनता के बीच के संबंधों को समझाना था। वर्कशाप में लेखकों, संपादकों, शिक्षाविदों, पुलिस अधिकारियों, व्यवसायियों, महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। आईजी जोन ज़की अहमद ने नए रंगरूटों को बधाई देते हुए कहा कि वर्दी के साथ जिम्मेदारियां मिलती हैं और जिम्मेदारियां अवसर लेकर आती हैं। नौकरी शुरू करते वक्त विचार अच्छे होते हैं लेकिन समय के साथ व्यक्तिगत स्वार्थ भी आ जाते हैं जो कई बार विभाग के लिए शर्म का कारण बनते हैं। डीआईजी रेंज नीलाब्जा चौधरी ने कहा सिंहम, दबंग बनने के लिए मैनेजमेंट जरूरी है। पुलिस आज भी 1861 के कानून से काम कर रही है और चुनौतियां रोज बढ़ रही हैं। डीआईजी ने कहा कि उच्च शिक्षित सिपाही मिलने का पुलिस को फायदा मिलेगा क्योंकि अब डंडे से पुलिसिंग नहीं होती। पीपीएन कालेज के लेक्चरर एस के गुप्ता ने कहा कि पुलिस और चुनौती दोनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं, चुनौतियां कभी नहीं खत्म होंगी। आईआईए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि भारत में 1173 लोगों पर एक पुलिसकर्मी है जबकि यूएनओ के मुताबिक 450 लोगों पर एक पुलिसकर्मी होना चाहिए। ऐसे हालात में पुलिसकर्मियों को भारी दबाव में काम करना पड़ता है। क्राइस्टचर्च कालेज के प्रिंसिपल डाॅ. एनए त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस से ऐसी अपेक्षा की जाती है जैसे शाकाहारी शेर यानी समाज में शांति बनी रहे और पुलिस बल प्रयोग भी न करे। ऐसे समय में पुलिसकर्मी को बल से ज्यादा दिमाग का उपयोग करना चाहिए। एसपी इंटेलीजेंस दिलीप श्रीवास्तव ने कहा कि जनता में धारणा है कि 100 नंबर डायल करने पर पुलिस आती है और 100 रुपये देने पर चली जाती है। नए रंगरुट इस अवधारणा को बदलें। ‘अमर उजाला’ के संपादक विजय त्रिपाठी , दैनिक जागरण के संपादक आनंद शर्मा , हिंदुस्तान के संपादक मनोज पमार, उद्योगपति बलराम नरूला, सामजिक कार्यकर्ता अनीता दुआ ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन शारिक अल्वी और धन्यवाद एसएसपी ने दिया।
विज्ञापन
एसएसपी की ओर से गुरुवार को रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में ‘पुलिस के समक्ष चुनौतियां और जन अपेक्षाएं’ विषय पर वर्कशाप का आयोजन किया गया। वर्कशाप के माध्यम से नए रंगरूटों को प्रेरणा प्रदान करते हुए पुलिस और जनता के बीच के संबंधों को समझाना था। वर्कशाप में लेखकों, संपादकों, शिक्षाविदों, पुलिस अधिकारियों, व्यवसायियों, महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। आईजी जोन ज़की अहमद ने नए रंगरूटों को बधाई देते हुए कहा कि वर्दी के साथ जिम्मेदारियां मिलती हैं और जिम्मेदारियां अवसर लेकर आती हैं। नौकरी शुरू करते वक्त विचार अच्छे होते हैं लेकिन समय के साथ व्यक्तिगत स्वार्थ भी आ जाते हैं जो कई बार विभाग के लिए शर्म का कारण बनते हैं। डीआईजी रेंज नीलाब्जा चौधरी ने कहा सिंहम, दबंग बनने के लिए मैनेजमेंट जरूरी है। पुलिस आज भी 1861 के कानून से काम कर रही है और चुनौतियां रोज बढ़ रही हैं। डीआईजी ने कहा कि उच्च शिक्षित सिपाही मिलने का पुलिस को फायदा मिलेगा क्योंकि अब डंडे से पुलिसिंग नहीं होती। पीपीएन कालेज के लेक्चरर एस के गुप्ता ने कहा कि पुलिस और चुनौती दोनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं, चुनौतियां कभी नहीं खत्म होंगी। आईआईए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने कहा कि भारत में 1173 लोगों पर एक पुलिसकर्मी है जबकि यूएनओ के मुताबिक 450 लोगों पर एक पुलिसकर्मी होना चाहिए। ऐसे हालात में पुलिसकर्मियों को भारी दबाव में काम करना पड़ता है। क्राइस्टचर्च कालेज के प्रिंसिपल डाॅ. एनए त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस से ऐसी अपेक्षा की जाती है जैसे शाकाहारी शेर यानी समाज में शांति बनी रहे और पुलिस बल प्रयोग भी न करे। ऐसे समय में पुलिसकर्मी को बल से ज्यादा दिमाग का उपयोग करना चाहिए। एसपी इंटेलीजेंस दिलीप श्रीवास्तव ने कहा कि जनता में धारणा है कि 100 नंबर डायल करने पर पुलिस आती है और 100 रुपये देने पर चली जाती है। नए रंगरुट इस अवधारणा को बदलें। ‘अमर उजाला’ के संपादक विजय त्रिपाठी , दैनिक जागरण के संपादक आनंद शर्मा , हिंदुस्तान के संपादक मनोज पमार, उद्योगपति बलराम नरूला, सामजिक कार्यकर्ता अनीता दुआ ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन शारिक अल्वी और धन्यवाद एसएसपी ने दिया।
विज्ञापन