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सीएम योगी की पैरवी पर सउदी अरब से आ सका युवक का शव, 29 जनवरी को सऊदी के रियाद शहर गया था युवक
Thu, 01 Oct 2020 03:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 01 Oct 2020 03:29 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पैरवी पर चार माह बाद युवक का शव सउदी अरब से गांव आ सका। बेटे का शव देखते ही मां की चीत्कार सुन लोगों का कलेजा बैठ गया। 29 जनवरी को मां ने बेटा को तिलक लगाकर सउदी अरब भेजा था। लेकिन जाने के 35 दिन बाद बेटे के मरने की खबर मिली। चार माह के लंबे संघर्ष के बाद बेटे का शव गांव पहुंचा।
थरियांव थाना क्षेत्र के चक कोर्रा सादात गांव के रहने वाले सुखराम डाक विभाग में पोस्टमैन हैं। इन्होंने अपने बेटे संदीप को सउदी अरब में ड्राइविंग के लिए भेजा था। लेकिन संदीप ने पहुंचने पर बताया कि उससे बकरी चराने का काम लिया जा रहा है। वीडियो कॉल करके मालिक से प्रताड़ित किए जाने की बात बताई थी। चार अप्रैल को संदीप के एक अन्य साथी ने उसके मरने की सूचना दी थी।
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थरियांव थाना क्षेत्र के चक कोर्रा सादात गांव के रहने वाले सुखराम डाक विभाग में पोस्टमैन हैं। इन्होंने अपने बेटे संदीप को सउदी अरब में ड्राइविंग के लिए भेजा था। लेकिन संदीप ने पहुंचने पर बताया कि उससे बकरी चराने का काम लिया जा रहा है। वीडियो कॉल करके मालिक से प्रताड़ित किए जाने की बात बताई थी। चार अप्रैल को संदीप के एक अन्य साथी ने उसके मरने की सूचना दी थी।
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पिता सुखराम और भाई सर्वेश शव लाने के लिए डीएम संजीव सिंह, सदर विधायक विक्रम सिंह, सांसद निरंजन ज्योति से मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी से मिले। इसके बाद शव लाने के लिए एंबेसी से संपर्क किया गया। भाई सर्वेश ने बताया कि संदीप के मालिक ने पहले सहमति पत्र लिया है। सहमति पत्र में संदीप के आत्महत्या की बात स्वीकार कराई गई है। सहमति पत्र देने के बाद ही शव गांव वापस आ सका। परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं।
चार माह में लाखों रुपये हुए खर्च
रियाद शहर से शव प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। दिल्ली से एंबुलेंस से मंगलवार की सुबह शव गांव पहुंचा। गांव में प्रधान राजेंद्र मौर्य समेत हजारों की भीड़ मौजूद थी। पिता सुखराम ने बताया कि शव पाने की उम्मीद धुंधली हो गई थी।
वीज किसी और का काम किसी का
संदीप का वीजा सुल्तानपुर घोष में एक ब्रोकर ने एक लाख रुपये में बनवाया था। वीजा ड्राइवरी करने का बना था लेकिन उससे भेड़ चरवाते थे।
चार माह में लाखों रुपये हुए खर्च
रियाद शहर से शव प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। दिल्ली से एंबुलेंस से मंगलवार की सुबह शव गांव पहुंचा। गांव में प्रधान राजेंद्र मौर्य समेत हजारों की भीड़ मौजूद थी। पिता सुखराम ने बताया कि शव पाने की उम्मीद धुंधली हो गई थी।
वीज किसी और का काम किसी का
संदीप का वीजा सुल्तानपुर घोष में एक ब्रोकर ने एक लाख रुपये में बनवाया था। वीजा ड्राइवरी करने का बना था लेकिन उससे भेड़ चरवाते थे।