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Kanpur News: आईआईटी की तकनीक से अब टंकी का पानी नहीं होगा ओवरफ्लो

Sat, 05 Sep 2026 01:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:57 AM IST
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Thanks to IIT technology, tank water will no longer overflow.
कानपुर। घरों, संस्थानों और बड़ी आवासीय कॉलोनियों में पानी की बर्बादी रोकने और उसकी गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए आईआईटी कानपुर से जुड़े एक स्टार्टअप ने नई स्मार्ट तकनीक विकसित की है। फ्लोटा नाम का यह सिस्टम टंकी में पानी भरने से लेकर उसकी शुद्धता की जांच तक का काम अपने आप करता है। इस तकनीक के तीन पेटेंट मिल चुके हैं और इसका परीक्षण भी सफल रहा है।
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फ्लोटा के संस्थापक और निदेशक भुवन भाटिया ने बताया कि इस सिस्टम में टंकी के अंदर लगाए गए सेंसर हर समय पानी के स्तर को मापते रहते हैं। जैसे ही टंकी पूरी भर जाती है, सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पाइपलाइन का वाॅल्व बंद कर देता है। इससे पानी बाहर नहीं बहता और रोजाना होने वाली बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी रुक जाती है।
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अगर एक ही मोटर से कई टंकियों में पानी पहुंचाया जा रहा हो, तब भी यह तकनीक आसानी से काम करती है। जिस टंकी में पानी पहले भर जाएगा, उसका वॉल्व अपने आप बंद हो जाएगा जबकि बाकी टंकियों में पानी की सप्लाई जारी रहेगी। इससे पूरे सिस्टम को अलग-अलग नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती।साथ ही यह तकनीक पाइपलाइन में होने वाली खराबी का भी पता लगा सकती है।
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यदि मोटर चल रही हो और टंकी में पानी का स्तर न बढ़े, तो सिस्टम समझ जाता है कि कहीं पाइपलाइन में रिसाव या कोई दूसरी समस्या है। ऐसी स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल जाता है, जिससे समय रहते मरम्मत कर पानी का नुकसान रोका जा सकता है। फ्लोटा केवल पानी की मात्रा ही नहीं, उसकी गुणवत्ता पर भी नजर रखता है। यह पानी का पीएच स्तर, गंदापन, टीडीएस और तापमान जैसे जरूरी मानकों की लगातार जांच करता रहता है। यदि पानी में किसी प्रकार की गड़बड़ी या प्रदूषण मिलता है तो संबंधित व्यक्ति के मोबाइल या नियंत्रण केंद्र तक तुरंत सूचना पहुंच जाती है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम बिजली खपत है। इसे चलाने के लिए केवल तीन वॉट बिजली की जरूरत होती है। सोलर पैनल और बैटरी बैकअप की सुविधा होने से यह उन इलाकों में भी काम कर सकती है जहां नियमित बिजली उपलब्ध नहीं रहती। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग अपार्टमेंट, अस्पताल, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, सरकारी परिसरों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में आसानी से किया जा सकता है।
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