शादियों में व्यवहार लेना 'ब्याज की तरह नाजायज', इस बुरी रस्म को अब खत्म कर देना चाहिए
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बैठक की शुरुआत मुफ्ती अजीजुर्रहमान ने कुरान की तिलावत से की। इसमें कहा गया कि बेटियों की शादी के खर्च की नीयत से फिक्स डिपॉजिट (एफडी) करना शरीअत के अनुसार सही नहीं है। यह तरीका ब्याज का लेनदेन ही है, जबकि सरकारी योजना के मुताबिक बेटियों की शादी के खर्च के लिए एफडी कराना जायज है, क्योंकि वह सरकार की तरफ से एक सहायता राशि है। इसे स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है। कहा गया कि व्यवहारी लेनदेन ब्याज की तरह है। इस बुरी रस्म को समाज से खत्म करना चाहिए। इसके लिए लोगों को आगाह करने की जरूरत है। मौलाना खलील अहमद मजाहरी, मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी, मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासमी, मौलाना मोहम्मद इनामउल्ला कासमी, मुफ्ती असदुद्दीन क़ासमी, मुफ्ती मोहम्मद उस्मान कसमी, मुफ्ती इजहार मुकर्रम कासमी, आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने की।