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सक्सेस स्टोरीः व्यापार में धोखा खाया फिर भी नहीं मानी हार, मार्बल कारोबार में बनाया बड़ा नाम 

Sat, 19 Jan 2019 03:42 PM IST
दुष्यंत शर्मा राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 19 Jan 2019 03:42 PM IST
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Success Story Defeated in business but still did not accept the defeat
मारबल कारोबारी टीकमचंद सेठिया
किराए के मकान में रहकर गल्ले और किराने का काम करने वाले टीकमचंद सेठिया का आज कानपुर के मार्बल कारोबारियों में बड़ा नाम है। कारोबार में धोखा खाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दोस्तों से उधार लेकर न केवल काम शुरू किया बल्कि खुद को स्थापित भी किया। लखनऊ तक कारोबार फैला चुके टीकमचंद का टर्नओवर इस समय करोड़ों में है। वे धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। 
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टीकमचंद अपने पिता कनमल सेठिया के साथ 1957 में चिरगांव झांसी से कानपुर आए थे। धनकुट्टी में किराए का मकान लेकर रहने लगे और वहीं पर गल्ला, तिलहन, किराना का काम शुरू किया। 18 साल बाद पूरी तरह से पिता की दुकान खुद संभाली। धीरे-धीरे काम बढ़ाया और सब कुछ ठीक चलने लगा। बाजार में उनका काफी रुपया फंस गया। इस पर उन्होंने वर्ष 1988 में काम बंद कर दिया। इसके बाद दिल्ली चले गए और दोस्तों से उधर रुपये लेकर वहीं पर मार्बल का काम शुरू किया। कुछ दिनों बाद पिता कनमल सेठिया ने उनसे कहा कि हम अपनी मातृभूमि उत्तर प्रदेश से दूर नहीं जाएंगे। इसलिए तुम यहीं आकर कारोबार शुरू करो। इसके बाद टीकमचंद सेठिया 1994 में कानपुर आ गए और किदवई नगर में मात्र तीन लाख की पूंजी से जैन मार्बल्स नाम से मार्बल्स और ग्रेनाइट का काम शुरू किया। तब यहां पर मात्र तीन दुकानें थीं। इसी साल बेटे के नाम से अमित मार्बल्स नाम से टाइल्स और सेनेटरी का काम शुरू किया। 1999-2000 में बेटों अजय और अमित ने फर्म का नाम बदलकर न्यू जैन मार्बल्स और अमित टाइल्स किया। इसके बाद इंडियन मार्बल्स के अलावा बाहर से भी मार्बल्स, टाइल्स और सेनेटरी मंगाकर यहां बेचना शुरू किया। वर्ष 2007-08 में लखनऊ में विजयखंड में एएस मार्बल्स नाम से शोरूम खोला। वर्तमान में टीकमचंद सेठिया का मार्बल्स कारोबार में बड़ा नाम है। 

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युवा उद्यमियों को संदेश
युवा अपने माता-पिता, गुरुजनों का सम्मान करें। कारण है कि आप उन्हीं के आशीर्वाद से पल्लवित, पुलकित और फलित होंगे। जीवन में सुकून के लिए मेहनत करें। इसके लिए सबसे जरूरी है कि लोगों से विनम्रता और नैतिकता से बात करें। जब आप ऐसा करेंगे तो सामने वाला भी आपको तवज्जो देगा।

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- टीकमचंद सेठिया, एमडी, न्यू जैन मार्बल्स और अमित टाइल्स

कई संगठनों के हैं पदाधिकारी
- कानपुर उद्योग व्यापार मंडल, लायंस क्लब ऑफ कानपुर गैंजेज और बाबा नामदेव सेवा समिति के अध्यक्ष हैं। मैनावती मार्ग में बाबा नामदेव का मंदिर भी बनवा रहे हैं। 
- कानपुर गल्ला आढ़तियां संघ के उपाध्यक्ष हैं।
- ट्रेन सलाहकार समिति के सदस्य हैं।

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