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अस्थमा की दवा के साइड इफेक्ट रोकने में सफलता, खोज में आईआईटी के वैज्ञानिक भी शामिल
Fri, 19 Jun 2020 03:18 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 19 Jun 2020 03:18 PM IST
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अस्थमा
अस्थमा या सांस संबंधी बीमारियों में दवा के साइड इफेक्ट रोकने में वैज्ञानिकों के एक समूह को सफलता मिली है। इसमें आईआईटी के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इन वैज्ञानिकों ने इन बीमारियों में दी जाने वाली फॉरमोटेरोल और इसके रिसेप्टर प्रोटीन की संरचना का पतालगाया है।
इस समूह ने क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी नाम की तकनीक का उपयोग करयह सफलता हासिल की है। शोध पत्रिका नेचर में इसका शोधपत्र भी प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वैज्ञानिकों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के वैज्ञानिक प्रो. अरुण कुमार शुक्ल और उनकी प्रयोगशाला की सदस्य शुभि पांडेय, हेमलता अग्निहोत्री और मधु चतुर्वेदी भी शामिल हैं।
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इस समूह ने क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी नाम की तकनीक का उपयोग करयह सफलता हासिल की है। शोध पत्रिका नेचर में इसका शोधपत्र भी प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वैज्ञानिकों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के वैज्ञानिक प्रो. अरुण कुमार शुक्ल और उनकी प्रयोगशाला की सदस्य शुभि पांडेय, हेमलता अग्निहोत्री और मधु चतुर्वेदी भी शामिल हैं।
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प्रो. शुक्ला ने कहा कि कईबार बीमारियों में दी जाने वालीं दवाइयों के साइड इफेक्ट होते हैं। ऐसे में इस शोध के माध्यम से श्वास संबंधी बीमारी से पीड़ितों को राहत पहुंचाने की कोशिश हुई है। इस तकनीक से दवा को मॉडिफाई करने में सफलता मिली है।
वैज्ञानिकों के इस समूह में कैंब्रिज के वैज्ञानिक भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस टीम ने भविष्य में ऐसी ही अन्य संरचनाओं के अध्ययन की ओर कदम बढ़ाए हैं, जिनसे दूसरी बीमारियों की दवाओं को भी और बेहतर बनाया जा सकेगा।
इस शोध में वेलकम ट्रस्ट-डीबीटी इंडिया अलायंस, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, कॉउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च द्वारा दिए गए अनुदानों की अहम भूमिका रही।
वैज्ञानिकों के इस समूह में कैंब्रिज के वैज्ञानिक भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस टीम ने भविष्य में ऐसी ही अन्य संरचनाओं के अध्ययन की ओर कदम बढ़ाए हैं, जिनसे दूसरी बीमारियों की दवाओं को भी और बेहतर बनाया जा सकेगा।
इस शोध में वेलकम ट्रस्ट-डीबीटी इंडिया अलायंस, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड, कॉउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च द्वारा दिए गए अनुदानों की अहम भूमिका रही।