इस शहर में बढ़ा आवारा 'कुत्तों का खौफ', एक और बच्चा हुआ शिकार
जाजमऊ के मोतीनगर निवासी प्राइवेट कर्मी शकील का बेटा नौशाद (8) गुरुवार देर शाम नमाज पढ़कर मक्का मस्जिद से घर लौट रहा था। केडीए ग्रीनहाउस बिल्डिंग के पास एक आवारा कुत्ते ने नौशाद को पीछे से आकर दबोच लिया और उसके हाथ-पैर समेत चेहरे पर बुरी तरह काट लिया। नौशाद की चीख सुनकर आस-पास के लोगों ने पत्थर मारकर कुत्ते को भगाया। परिजन मौके पर पहुंचे और हंगामा करने लगे। परिजनों का कहना था कि क्षेत्र में सैकड़ों आवारा कुत्ते घूमते हैं लेकिन उन्हें कैटल कैचिंग दस्ता नहीं पकड़ता। कुत्ते आए दिन किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया।
कानपुर सहित आस-पास के सभी इलाकों आवारा कुत्तों की आबादी बढती जा रही है । कुत्ते बड़े-बड़े झुंड बनाकर सड़कों पर आवारा घूमते रहे तो वे लोगों पर उसी तरह झुंड में हमला करने लगे हैं। सीतापुर, कानपुर समेत कई स्थानों पर कुत्तों के इंसानों पर हमला करके उन्हें खा लेने की घटना सामने आ रही है। पर देश के इकलौते देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान ने अध्ययन किया है।
जानवरों को अधिक दूर जंगलों में जाकर न छोड़ें। इससे कुत्ते कम समय में और अधिक आक्रामक हो जाएंगे। विज्ञानियों का कहना है कि सबसे पहले आवारा कुत्तों की आबादी रोकने के लिए प्रयास किए जाएं। नसबंदी करके उन्हें पालतू जानवर की तरह रखा जाए। अगर उन्हें सड़कों पर छोड़ा गया और उनका झुंड बड़ा होता गया तो कुत्तों की मानसिकता में बदलाव आने लगेगा।
विज्ञानियों ने उठाए ये कदम....
नगर निगम की लापरवाही से शहर में आवारा कुत्ते बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे कुत्तों के बंध्याकरण (नसबंदी) की योजना भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। कुत्तों के काटने की वजह से एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कंपनी ने 367 रुपये की दर से कुत्तों का बंध्याकरण शुरू किया, पर यह संस्था साल भर में मात्र 362 कुत्तों का ही बंध्याकरण कर पाई। तभी से यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है, जबकि आवारा कुत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शहर में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं।