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Kanpur News: प्रदेश के चिकित्सा संस्थान हेपेटाइटिस पर मिलकर करेंगे शोध
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कानपुर। हेपेटाइटिस के बढ़ते फैलाव को देखते हुए प्रदेश के चार चिकित्सा संस्थान मिलकर शोध करेंगे। इसके तहत रोगों की जटिलता और इससे शरीर को होने वाली क्षति को बचाने के लिए दवाएं भी खोजी जाएंगी। खासतौर पर हेपेटाइटिस बी और सी के लिए रणनीति तैयार की गई है। संक्रमण की शुरुआत में पहचान करने के लिए नगरीय और ग्रामीण इलाकों में इंतजाम होंगे।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ, बीएचयू मेडिकल कॉलेज और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ साथ मिलकर काम करेंगे। इसके लिए इन चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों में कई बार वार्ता हो चुकी है और साझा रणनीति को हरी झंडी दे दी गई है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या बढ़ रही है। इसके लिए संयुक्त रूप से रणनीति बनाई गई है। संयुक्त अभियान में हेपेटाइटिस ए और ई को भी शामिल किया है।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस सी को पूरी तरह से खत्म करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ लाइलाज बीमारी हेपेटाइटिस बी के लिए दवाओं की खोज की जाएगी। इसके लिए अभी वैक्सीन तो बनी है लेकिन संक्रमण हो गया तो फिर ठीक नहीं होता। एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अमित गोयल, केजीएमयू के डॉ. अमित रूंगटा, बीएचयू के डॉ. विनोद कुमार इस संयुक्त अभियान में शामिल हैं। अभियान के तहत रोगियों के सैंपल की विशेष जांच होगी जिससे वायरस के स्ट्रेन आदि के संबंध में पता किया जाएगा। इसी से वायरस को खत्म करने के लिए दवाएं तैयार हो सकेंगी। हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण का फैलाव नगरीय क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ रहा है।
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ, बीएचयू मेडिकल कॉलेज और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ साथ मिलकर काम करेंगे। इसके लिए इन चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों में कई बार वार्ता हो चुकी है और साझा रणनीति को हरी झंडी दे दी गई है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या बढ़ रही है। इसके लिए संयुक्त रूप से रणनीति बनाई गई है। संयुक्त अभियान में हेपेटाइटिस ए और ई को भी शामिल किया है।
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उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस सी को पूरी तरह से खत्म करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ लाइलाज बीमारी हेपेटाइटिस बी के लिए दवाओं की खोज की जाएगी। इसके लिए अभी वैक्सीन तो बनी है लेकिन संक्रमण हो गया तो फिर ठीक नहीं होता। एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अमित गोयल, केजीएमयू के डॉ. अमित रूंगटा, बीएचयू के डॉ. विनोद कुमार इस संयुक्त अभियान में शामिल हैं। अभियान के तहत रोगियों के सैंपल की विशेष जांच होगी जिससे वायरस के स्ट्रेन आदि के संबंध में पता किया जाएगा। इसी से वायरस को खत्म करने के लिए दवाएं तैयार हो सकेंगी। हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण का फैलाव नगरीय क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ रहा है।
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