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Kanpur News: मिट्टी की जांच सुस्त, लहलहा रही बहानों की फसल
Wed, 19 Aug 2026 11:14 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:14 PM IST
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कानपुर देहात। मिट्टी के नमूनों की जांच करने में कृषि विभाग लापरवाह बना हुआ है। पहले रसायन खत्म होने का हवाला देकर जांच शुरू करने में देरी की और अब मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच करने वाली एलटू मशीन खराब हो गई। अब सिर्फ एक मशीन से जांच हो रही। जिसके कारण मिट्टी नमूनों की जांच सुस्त है।
जनपद में करीब तीन लाख से अधिक किसान हैं। शासन से मिले लक्ष्य पर मिट्टी की सेहत की जांच कृषि विभाग निशुल्क कराता है। 10 ब्लॉकों वाले जिले में खरीफ सीजन से पहले मिट्टी की सेहत जांचने के लिए 4100 नमूने लिए गए जबकि तिलहन योजना में अलग से मिट्टी के 200 नमूने जांच को लिए गए। जून में मिट्टी नमूना लेने का काम पूरा हो गया था। हालांकि बारा स्थित कृषि विभाग की प्रयोगशाला में रसायनों का टोटा होने से इन मिट्टी नमूनों की जांच अटकी रही।
जुलाई मध्य में जब रसायन उपलब्ध हुए तब मिट्टी की सेहत की जांच शुरू हुई। अगस्त के पहले पखवाड़े तक केवल 1600 मिट्टी नमूनों की जांच हो सकी है। इसमें से केवल एक हजार नमूनों की जांच के बाद बनाए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को बांट दिए गए। जबकि अभी 600 मृदा कार्ड बनाने और वितरित करना शेष है। इधर मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों को जांचने वाली एलटू मशीन में खराबी आ गई। इससे करीब एक सप्ताह से शेष 2700 मिट्टी नमूनों की जांच अटकी है। जानकारों का कहना है कि कानपुर में एक दुकान है। यहां बेंगलुरु से इंजीनियर बुलवाकर प्रयोगशाला की मशीन ठीक कराई जाती है। इसलिए मशीन दुरुस्त होने में समय लगेगा।
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बयान.....
बारा स्थित कृषि विभाग की प्रयोगशाला में एलटू मशीन खराब होने की जानकारी मिली है। मशीन को ठीक कराने के लिए जरूरी कार्रवाई की गई है। एक मशीन ठीक है उससे जांचें हो रही हैं। खराब मशीन जल्द ठीक होने की उम्मीद है। अब तक हुई मिट्टी नमूनों की जांचों के आधार पर बनाए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित कर दिए गए हैं। - हरीशंकर भार्गव, उप निदेशक कृषि
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दो मशीनों पर निर्भर मिट्टी नमूनों की जांच
कृषि विभाग की प्रयोगशाला में मिट्टी नमूनों की जांच दो मशीनों पर निर्भर है। एलवन मशीन से मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, ऑर्गेनिक कार्बन आदि की जांच होती है। जबकि एलटू मशीन से सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, कॉपर आदि तत्वों की जांच की जाती है।
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अब तक हुई एक हजार नमूना जांचों में कम मिला जैविक कार्बन
मिट्टी सेहतमंद होगी तभी फसल उत्पादन सुधरेगा। इधर बहुत कुछ मिट्टी की सेहत जैविक कार्बन की मौजूदगी पर निर्भर करती है। दरअसल उर्वरक या फिर जैविक खाद खेत में डालने पर जैविक कार्बन ही पोषक तत्वों को अवशोषित कर पौधों की उपलब्ध कराता है। उप निदेशक कृषि हरीशंकर भार्गव ने बताया कि मिट्टी में जैविक कार्बन एक फीसदी होना चाहिए, लेकिन मिट्टी नमूनों की जांच में औसत 0.2 फीसदी ही है। किसानों को जागरूक किया गया है। हरी खाद में ढेंचा, मूंग, उड़द का प्रयोग करना चाहिए। इससे जैविक कार्बन स्तर बढ़ता है। नाइट्रोजन, आयरन, जिंक, बोरॉन व मैगनीज तत्व भी कम पाया गया है।
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जांच परिणाम पर एक नजर
नाइट्रोजन : 999 नमूनों में कम और एक नमूना में मध्यम
जैविक कार्बन : 1000 नमूनों में कम मिला
आयरन: 534 नमूनों में कम और 466 में पर्याप्त
सल्फर : 140 नमूनों में कम और 860 में पर्याप्त
बोरॉन : 981 नमूनों में कम और 19 नमूनों में पर्याप्त
मैगनीज : 401 नमूनों में कम और 599 में पर्याप्त
फास्फोरस : 221 नमूनों में कम और 799 में स्तर मध्यम मिला
पोटैशियम : 46 नमूनों में कम। 945 में मध्यम और नौ नमूनों में अधिक
जिंक : 471 नमूनों में कम मिला और 529 में पर्याप्त
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जनपद में करीब तीन लाख से अधिक किसान हैं। शासन से मिले लक्ष्य पर मिट्टी की सेहत की जांच कृषि विभाग निशुल्क कराता है। 10 ब्लॉकों वाले जिले में खरीफ सीजन से पहले मिट्टी की सेहत जांचने के लिए 4100 नमूने लिए गए जबकि तिलहन योजना में अलग से मिट्टी के 200 नमूने जांच को लिए गए। जून में मिट्टी नमूना लेने का काम पूरा हो गया था। हालांकि बारा स्थित कृषि विभाग की प्रयोगशाला में रसायनों का टोटा होने से इन मिट्टी नमूनों की जांच अटकी रही।
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जुलाई मध्य में जब रसायन उपलब्ध हुए तब मिट्टी की सेहत की जांच शुरू हुई। अगस्त के पहले पखवाड़े तक केवल 1600 मिट्टी नमूनों की जांच हो सकी है। इसमें से केवल एक हजार नमूनों की जांच के बाद बनाए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को बांट दिए गए। जबकि अभी 600 मृदा कार्ड बनाने और वितरित करना शेष है। इधर मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों को जांचने वाली एलटू मशीन में खराबी आ गई। इससे करीब एक सप्ताह से शेष 2700 मिट्टी नमूनों की जांच अटकी है। जानकारों का कहना है कि कानपुर में एक दुकान है। यहां बेंगलुरु से इंजीनियर बुलवाकर प्रयोगशाला की मशीन ठीक कराई जाती है। इसलिए मशीन दुरुस्त होने में समय लगेगा।
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बारा स्थित कृषि विभाग की प्रयोगशाला में एलटू मशीन खराब होने की जानकारी मिली है। मशीन को ठीक कराने के लिए जरूरी कार्रवाई की गई है। एक मशीन ठीक है उससे जांचें हो रही हैं। खराब मशीन जल्द ठीक होने की उम्मीद है। अब तक हुई मिट्टी नमूनों की जांचों के आधार पर बनाए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित कर दिए गए हैं। - हरीशंकर भार्गव, उप निदेशक कृषि
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दो मशीनों पर निर्भर मिट्टी नमूनों की जांच
कृषि विभाग की प्रयोगशाला में मिट्टी नमूनों की जांच दो मशीनों पर निर्भर है। एलवन मशीन से मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, ऑर्गेनिक कार्बन आदि की जांच होती है। जबकि एलटू मशीन से सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, कॉपर आदि तत्वों की जांच की जाती है।
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अब तक हुई एक हजार नमूना जांचों में कम मिला जैविक कार्बन
मिट्टी सेहतमंद होगी तभी फसल उत्पादन सुधरेगा। इधर बहुत कुछ मिट्टी की सेहत जैविक कार्बन की मौजूदगी पर निर्भर करती है। दरअसल उर्वरक या फिर जैविक खाद खेत में डालने पर जैविक कार्बन ही पोषक तत्वों को अवशोषित कर पौधों की उपलब्ध कराता है। उप निदेशक कृषि हरीशंकर भार्गव ने बताया कि मिट्टी में जैविक कार्बन एक फीसदी होना चाहिए, लेकिन मिट्टी नमूनों की जांच में औसत 0.2 फीसदी ही है। किसानों को जागरूक किया गया है। हरी खाद में ढेंचा, मूंग, उड़द का प्रयोग करना चाहिए। इससे जैविक कार्बन स्तर बढ़ता है। नाइट्रोजन, आयरन, जिंक, बोरॉन व मैगनीज तत्व भी कम पाया गया है।
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जांच परिणाम पर एक नजर
नाइट्रोजन : 999 नमूनों में कम और एक नमूना में मध्यम
जैविक कार्बन : 1000 नमूनों में कम मिला
आयरन: 534 नमूनों में कम और 466 में पर्याप्त
सल्फर : 140 नमूनों में कम और 860 में पर्याप्त
बोरॉन : 981 नमूनों में कम और 19 नमूनों में पर्याप्त
मैगनीज : 401 नमूनों में कम और 599 में पर्याप्त
फास्फोरस : 221 नमूनों में कम और 799 में स्तर मध्यम मिला
पोटैशियम : 46 नमूनों में कम। 945 में मध्यम और नौ नमूनों में अधिक
जिंक : 471 नमूनों में कम मिला और 529 में पर्याप्त