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आजादी के बाद से चित्रकूट में आ चुके हैं छह प्रधानमंत्री, 29 फरवरी को पहुंचेंगे पीएम मोदी

Thu, 27 Feb 2020 01:48 PM IST
शिखा पांडेय सुधीर अग्रवाल/अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट
सुधीर अग्रवाल/अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 27 Feb 2020 01:48 PM IST
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Six Prime Ministers have arrived in Chitrakoot district since the independence of the country
आजादी के बाद से चित्रकूट में आ चुके हैं छह प्रधानमंत्री - फोटो : अमर उजाला
देश की आजादी के बाद से चित्रकूट जिले में छह प्रधानमंत्री आ चुके हैं। दो दिन बाद 29 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद भी चित्रकूट जिला पिछ़ड़ा ही रहा है। बेरोजगारी के कारण अधिकांश गांवों के युवक पलायन कर गए हैं। पेयजल, सिंचाई के साधन न होने से अधिकतर भूमि परती पड़ी हैं। पर्यटन स्थल विकास के लिए तरस रहे हैं। चित्रकूट धर्मनगरी में यूपी व एमपी सीमा के कारण श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ता है। 
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जिले में प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी, प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी, प्रधानमंत्री स्व.वीपी सिंह, प्रधानमंत्री स्व.चंद्रशेखर सिंह, प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, प्रधानमंत्री स्व. मोरारजी देसाई का आगमन चित्रकूट जिले में हो चुका है। जिसमें पाठा क्षेत्र सहित धर्मनगरी के विकास करने के लिए बडे़-बडे़ वादे किए गए थे। विकास को छोड़िए पेयजल के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं हो पाया।
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जिससे आज जब गर्मी का मौसम शुरू होता है तो जिले के कई गांवों में महिलाएं दो से तीन किमी पैदल चलकर पानी भरने के लिए जाती है। पानी के लिए झगड़े भी होते रहते हैं। जिले में एक भी कारखाना नहीं है। इसके साथ लकड़ी के खिलौने बनाने व पत्थर की मूर्ति बनाने का कारोबार भी लगभग ठप हो गया। जिससे रोजगार के साधन न होने से अधिकांश गांवों से युवक शहरों की ओर पलायन कर गए हैं।

जिसमें अधिकांश घरों में ताला लगा हैं। जिला शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछड़ा है। गांवों में इंटर कालेज न बनाने के कारण छात्राओं को पढ़ाई के लिए मजबूर होना पड़ता है। अच्छे शिक्षा के संस्थान न होने के कारण छात्र भी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। देश के प्रमुख तीर्थ स्थल इस जिले में होने के बाद भी विकास नहीं हुआ।

जिससे पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क बिजली प पानी की समस्या से जूझना पड़ता हैं। स्वास्थ्य के मामले में भी पिछड़ा है। अस्पतालोें में आधुनिक सुविधाएं न होने के कारण अधिकांश मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। 

दो लाख लोग पलायन कर गए
लोकसभा सीट चित्रकूट बांदा को मिलाकर कुल 19 लाख 96 हजार 599 कुल वोटर हैं। जिसमें कई सरकारी व गैरसरकारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग 2 लाख लोग पलायन कर गए हैं। जिसमें महिलाएं भी शामिल है। यह सब अन्य प्रांतों में रहकर मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।  
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1438 परिषदीय विद्यालय, सुधार नहीं
जिले में कुल 1438 परिषदीय विद्यालय है। जिसमेें सुधार नहीं हो पा रहा है। कई विद्यालयों तक जाने के लिए सड़के नहीं है। तमाम विद्यालयों में बाउंड्रीवाल, शौचालय, टाइल्स विहीन हैं।

नीति आयोग के माध्यम से किया जा रहा विकास 
जिले को पिछड़ा क्षेत्र के रूप में चिंहित कराकर कार्य किया जा रहा है। नीति आयोग ने विकास के विभिन्न पैमाने पर आकांक्षा जनपद को प्रगति को आंका है। इसमें विकास के मापदंड में स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेश, कौशल विकास व बुनियादी ढांचे को शामिल किया गया है। जिसके लिए आकांक्षी जिले के लिए पिरामल फाउंडेशन व यूनीसेफ जैसी संस्थाएं भी काम कर रही है। प्रत्येक विभाग के अलग अलग नोडल अधिकारी समय समय पर मॉनीटरिंग करते हैं। जिससे देश के 115 अति पिछडे़ जिलों में शामिल चित्रकूट अब विकास के  पथ दौड रहा है।
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