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शुक्ल तालाब सुंदरीकरण के लिए नहीं मिल रहे कारीगर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:18 AM IST
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अकबरपुर स्थित शुक्ल तालाब के सुंदरीकरण की रफ्तार अब सुस्त पड़ती जा रही
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है। नगर पंचायत अकबरपुर की ओर से शुक्ल तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत सीमेंट
से कराए जाने को लेकर पुरातत्व विभाग को पूर्व में कई प्रस्ताव भेजे जा
चुके हैं। लेकिन, पुरातत्व विभाग सीढ़ी मरम्मत का काम चुर्खी-चूना से कराए
जाने व जिले में सीढ़ी मरम्मत के लिए कारीगर न होने की बात कहकर मौन है।
वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत की पहल पर जल निगम ने बिना अनुमति के तालाब को लबालब कर दिया। ऐसे में शुक्ल तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत व सुंदरीकरण को लेकर ऊहापोह की स्थिति बन गई है।
बताते चलें कि अकबरपुर स्थित मुगलकालीन ऐतिहासिक विरासत का नमूना शुक्ल तालाब का सुंदरीकरण कार्य पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी मासूम अली सरवर के निर्देश के बाद जोर-शोर से शुरू किया गया था, जिसमें नगर पंचायत ने तेजी दिखाते हुए तालाब की ऊबड़-खाबड़ जमीन को समतलकर चाराें ओर 6 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल का निर्माणकर उसमें लोहे की ग्रिल लगा दी गई थी।
वहीं तालाब के गंदे पानी को निकलवाकर उसकी सफाई कराई गई। नगर पंचायत द्वारा तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत सीमेंट से कराए जाने के लिए पुरातत्व विभाग को स्टीमेट भेजा गया था। लेकिन, पुरातत्व विभाग ने सीढ़ियों का निर्माण चुर्खी-चूना से कराए जाने के निर्देश दिए थे।
नगर पंचायत द्वारा सीढ़ी मरम्मत चुर्खी-चूना से कराए जाने के लिए कोई स्टीमेट न होने की बात कहकर सीढ़ी मरम्मत सीमेंट से कराने के लिए कई बार रिमाइंडर भेजे गए। वहीं सीढ़ी मरम्मत के लिए नगर पंचायत ने स्थानीय स्तर पर इसका समाधान निकालने का प्रयास किया। जिसके लिए नगर पंचायत के अधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग से चुर्खी-चूना से सीढ़ियों की मरम्मत के लिए बात कही। लेकिन, समस्या का कोई हल नहीं निकल सका। वहीं पूर्व में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने शुक्ल तालाब का दौराकर सीढ़ियोें की मरम्मत के लिए कारीगर न होेने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
नगर पंचायत ने सीढ़ी मरम्मत का कोई हल न निकलता देख सचिव पुरातत्व विभाग से मरम्मत के लिए तरीका निकालने का पत्र भी भेजा गया। लेकिन, पुरातत्व विभाग से कोई जवाब न मिलने से तालाब का सुंदरीकरण कार्य अधर में लटका हुआ है।
दूसरी ओर नगर पंचायत की पहल पर जलनिगम ने पिछले सप्ताह पुरातत्व विभाग से बिना कोई अनुमति लिए पुरातत्व विभाग के अधीन ऐतिहासिक शुक्ल तालाब में पानी भराना शुरू कर दिया। तालाब में लबालब पानी भरने से सीढ़ियां पानी में डूब गई। ऐसे में शुक्ल तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत व सुंदरीकरण कार्य अधर में लटकता दिखाई दे रहा है।
वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत की पहल पर जल निगम ने बिना अनुमति के तालाब को लबालब कर दिया। ऐसे में शुक्ल तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत व सुंदरीकरण को लेकर ऊहापोह की स्थिति बन गई है।
बताते चलें कि अकबरपुर स्थित मुगलकालीन ऐतिहासिक विरासत का नमूना शुक्ल तालाब का सुंदरीकरण कार्य पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी मासूम अली सरवर के निर्देश के बाद जोर-शोर से शुरू किया गया था, जिसमें नगर पंचायत ने तेजी दिखाते हुए तालाब की ऊबड़-खाबड़ जमीन को समतलकर चाराें ओर 6 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल का निर्माणकर उसमें लोहे की ग्रिल लगा दी गई थी।
वहीं तालाब के गंदे पानी को निकलवाकर उसकी सफाई कराई गई। नगर पंचायत द्वारा तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत सीमेंट से कराए जाने के लिए पुरातत्व विभाग को स्टीमेट भेजा गया था। लेकिन, पुरातत्व विभाग ने सीढ़ियों का निर्माण चुर्खी-चूना से कराए जाने के निर्देश दिए थे।
नगर पंचायत द्वारा सीढ़ी मरम्मत चुर्खी-चूना से कराए जाने के लिए कोई स्टीमेट न होने की बात कहकर सीढ़ी मरम्मत सीमेंट से कराने के लिए कई बार रिमाइंडर भेजे गए। वहीं सीढ़ी मरम्मत के लिए नगर पंचायत ने स्थानीय स्तर पर इसका समाधान निकालने का प्रयास किया। जिसके लिए नगर पंचायत के अधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग से चुर्खी-चूना से सीढ़ियों की मरम्मत के लिए बात कही। लेकिन, समस्या का कोई हल नहीं निकल सका। वहीं पूर्व में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने शुक्ल तालाब का दौराकर सीढ़ियोें की मरम्मत के लिए कारीगर न होेने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
नगर पंचायत ने सीढ़ी मरम्मत का कोई हल न निकलता देख सचिव पुरातत्व विभाग से मरम्मत के लिए तरीका निकालने का पत्र भी भेजा गया। लेकिन, पुरातत्व विभाग से कोई जवाब न मिलने से तालाब का सुंदरीकरण कार्य अधर में लटका हुआ है।
दूसरी ओर नगर पंचायत की पहल पर जलनिगम ने पिछले सप्ताह पुरातत्व विभाग से बिना कोई अनुमति लिए पुरातत्व विभाग के अधीन ऐतिहासिक शुक्ल तालाब में पानी भराना शुरू कर दिया। तालाब में लबालब पानी भरने से सीढ़ियां पानी में डूब गई। ऐसे में शुक्ल तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत व सुंदरीकरण कार्य अधर में लटकता दिखाई दे रहा है।