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संसाधनों का टोटा: कानपुर एटीएस के जिम्मे है छह जिलों की निगरानी, स्टाफ सिर्फ 11 लोगों का, दफ्तर भी उधार का

Wed, 14 Jul 2021 11:29 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 14 Jul 2021 11:29 AM IST
सार

कानपुर एटीएस यूनिट के पास रेंज के छह जिलों की निगरानी की जिम्मेदारी है। यहां तैनात 11 का स्टाफ ही यही जिम्मेदारी संभाल रहा है। अलकायदा के आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ने एटीएस को और मजबूत करने को कहा है।

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Shortage of resources: Kanpur ATS is responsible for monitoring six districts
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर से आतंक का कनेक्शन पुराना है। बड़े संगठनों के आतंकी शहर से पकड़े जा चुके हैं। कई वारदातें भी हुईं। फिर भी एटीएस यूनिट को उतनी मजबूती नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। दफ्तर भी स्थायी नहीं है। बड़े अफसर कानपुर के बजाय लखनऊ मुख्यालय में ही बैठते हैं।
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जबकि कानपुर एटीएस यूनिट के पास रेंज के छह जिलों की निगरानी की जिम्मेदारी है। यहां तैनात 11 का स्टाफ ही यही जिम्मेदारी संभाल रहा है। अलकायदा के आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ने एटीएस को और मजबूत करने को कहा है।
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जिससे ऐसे आतंकवादियों पर कार्रवाई हो सके और आतंकी वारदातों पर शत प्रतिशत अंकुश लगाया जा सके। भविष्य में देखना होगा कि शासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है। दरअसल, एटीएस की कानपुर यूनिट में वर्तमान में 11 का स्टाफ है।
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एक डीएसपी, एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर व आठ सिपाही हैं। कानपुर यूनिट के डीएसपी लखनऊ मुख्यालय में ही बैठते हैं। वहीं एक अन्य इंस्पेक्टर हरिशंकर मिश्रा के ट्रांसफर होने के बाद दूसरे की तैनाती ही नहीं की गई। रेंज के छह जिले कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद, इटावा और कन्नौज को यही 11 लोग देख रहे हैं। 

 

अब तक नहीं मिल सका स्थायी दफ्तर 
ट्रैफिक लाइन में पहले दो कमरे का एटीएस का दफ्तर हुआ करता था। जो काफी जर्जर था। करीब तीन साल पहले ये दफ्तर घुड़सवार पुलिस परिसर के भीतर शिफ्ट किया गया। दफ्तर तो ठीक है लेकिन ये भी अस्थायी है। अफसरों ने बताया कि एटीएस के दफ्तर के लिए महाराजपुर थाना क्षेत्र में जमीन चिह्नित हो चुकी है। मगर दफ्तर कब बनेगा ये कुछ अभी तय नहीं हो सका। स्थायी दफ्तर न होने की वजह से प्राइवेसी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है
कानपुर एटीएस यूनिट का कार्यक्षेत्र पहले कानपुर और झांसी दोनों मंडल हुआ करते थे। कुछ समय पहले झांसी यूनिट बनाई गई तब कानपुर यूनिट का कार्यक्षेत्र कम हुआ। यहां हाईटेक संसाधनों की कमी है। कमांडो आदि की भी संख्या उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। अधिकतर कार्यों के लिए यूनिट को मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। अब जब शासन ने एटीएस को और मजबूत करने का फैसला किया है तो उम्मीद है कि जल्द तमाम सुविधाएं एटीएस की कानपुर यूनिट में बढ़ाई जाएंगी।
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