शनिवार को पड़ रहे प्रदोष व्रत में विधि-विधान से किया गया पूजन विशेष फलदायी है। इस दिन किए गए पूजन व व्रत से प्रसन्न होकर शनि देव भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। कुंडली में व्याप्त दोषों को दूर कर संतान सुख प्रदान करते हैं।
शनि प्रदोष व्रत कल: भक्तों पर कृपा बरसाएंगे शनि देव, दूर करेंगे कुंडली दोष
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एेसे करें पूजन
शनि प्रदोष व्रत का विधि-विधान से पूजन करना आवश्यक है। प्रात:काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर शिव जी का पूजन करें। पूरे दिन शनि मंत्र का जप करें। शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4:30 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही करें।
शाम को पुन: स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें। पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। ईशान कोण की दिशा में किसी एकान्त स्थल को पूजा करने के लिये प्रयोग करना विशेष शुभ रहता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग करें।
- उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर व शनि देव का पूजन करें।
- पूरे दिन शनि मंत्र का जाप करें।
- व्रत की पूर्व रात्रि में जागरण व कीर्तन करें।
- पूजन के बाद हवन व शनि आरती करें।
- ब्रह्माणों को भोजन कराएं।
- दान-पुण्य जरूर करें।
- अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए व्रत करें।