{"_id":"5fb17128e0f51c3c2b20cfb4","slug":"shamsuddin-return-from-pakistan","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर: पाकिस्तान से आए शमसुद्दीन, 28 साल बाद परिजनों से मिल फफक पड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर: पाकिस्तान से आए शमसुद्दीन, 28 साल बाद परिजनों से मिल फफक पड़े
Sun, 15 Nov 2020 11:54 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 15 Nov 2020 11:54 PM IST
विज्ञापन
पाकिस्तान से आए शमसुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार 28 वर्षों के बाद शमसुद्दीन अपने गृह निवास कानपुर के कंघीमुहाल आए। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शमसुद्दीन को परिजनों से मिलाया गया। शमसुद्दीन अपनी बहन शबीना, भांजी इंशा, भतीजे अफवान, छोटू, मुस्तफा, मायरा से मिले।
शमसुद्दीन 28 साल बाद अपने परिवारीजनों को देख फफककर रो पड़े। उनको इतने वर्षों के बाद देख परिवारीजन भी अपने आंसू रोक न सके। बहन ने शमसुद्दीन का माथा चूम हालचाल लिया। परिजनों से मिलने के बाद शमसुद्दीन को पुलिस अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई।
कानपुर में कंघीमोहाल के रहने वाले शमसुद्दीन वर्ष 1992 में 90 दिन का वीजा लगवाकर अपने एक परिचित के साथ पाकिस्तान चले गए थे और फिर वर्ष 1994 में पाकिस्तान की नागरिकता मिलने पर वहीं बस गए थे। कुछ सालों के बाद वर्ष 2012 में पाकिस्तान सरकार ने जासूसी का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और करांची की लाडी जेल में बंद कर दिया था।
विज्ञापन
आठ साल बाद रिहाई मिली तो उन्होंने अपने वतन की राह पकड़ी। पूरे 28 साल के बाद उनकी अपने वतन वापसी हुई और अमृतसर तक छोड़ा गया। कानपुर से उनके भाई मिलने के लिए अमृतसर गए और प्रशासन से जल्द घर भिजवाने की गुहार लगाई। सभी प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी हाेने के बाद कानपुर पुलिस की टीम उन्हें लाने अमृतसर गई थी। दीपावली के दूसरे दिन पुलिस टीम शम्सुद्दीन को लेकर शहर आ गई।
विज्ञापन
शमसुद्दीन 28 साल बाद अपने परिवारीजनों को देख फफककर रो पड़े। उनको इतने वर्षों के बाद देख परिवारीजन भी अपने आंसू रोक न सके। बहन ने शमसुद्दीन का माथा चूम हालचाल लिया। परिजनों से मिलने के बाद शमसुद्दीन को पुलिस अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई।
विज्ञापन
कानपुर में कंघीमोहाल के रहने वाले शमसुद्दीन वर्ष 1992 में 90 दिन का वीजा लगवाकर अपने एक परिचित के साथ पाकिस्तान चले गए थे और फिर वर्ष 1994 में पाकिस्तान की नागरिकता मिलने पर वहीं बस गए थे। कुछ सालों के बाद वर्ष 2012 में पाकिस्तान सरकार ने जासूसी का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और करांची की लाडी जेल में बंद कर दिया था।
विज्ञापन
आठ साल बाद रिहाई मिली तो उन्होंने अपने वतन की राह पकड़ी। पूरे 28 साल के बाद उनकी अपने वतन वापसी हुई और अमृतसर तक छोड़ा गया। कानपुर से उनके भाई मिलने के लिए अमृतसर गए और प्रशासन से जल्द घर भिजवाने की गुहार लगाई। सभी प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी हाेने के बाद कानपुर पुलिस की टीम उन्हें लाने अमृतसर गई थी। दीपावली के दूसरे दिन पुलिस टीम शम्सुद्दीन को लेकर शहर आ गई।