{"_id":"5fa5496c8ebc3ec5f0431947","slug":"shamsuddin-reached-amritsar-after-being-released-from-pakistan-jail-said-that-god-should-not-show-anyone-on-such-a-day-which-i-saw","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अमृतसर पहुंचे शमसुद्दीन, बोले खुदा किसी को ऐसे दिन न दिखाए, जो मैंने देखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अमृतसर पहुंचे शमसुद्दीन, बोले खुदा किसी को ऐसे दिन न दिखाए, जो मैंने देखे
Fri, 06 Nov 2020 06:32 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 06 Nov 2020 06:32 PM IST
विज्ञापन
पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अमृतसर पहुंचे शमसुद्दीन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अमृतसर पहुंचे शमसुद्दीन परिवार से मिलने के लिए क्वॉरंटीन अवधि पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। वह इस समय छेरहटा के नारायणगढ़ स्थित अरबन कम्युनिटी हेल्थ सेेंटर में हैं। गुरुवार को उन्होंने अमर उजाला के संवाददाता से फोन पर बात कर अपना दर्द बयां किया।
शमसुद्दीन ने फोन पर बताया कि 30 साल पहले वह मोहल्ले के रहने वाले सैदुल्लाह साहब की बेटी और दामाद के साथ पाकिस्तान घूमने गए थे। इसके बाद वापस न लौट सके। पाकिस्तान की जेल में हुए अमानवीय अत्याचारों को याद उनका गला भर आता है। वे बोले कि खुदा किसी को भी ऐसे दिन न दिखाए, जो मैंने देखे हैं।
अंधेरे में की पूछताछ, महीनों ठीक से सो न सके
शमसुद्दीन ने बताया कि उन्हें जेल में तमाम यातनाएं दी गईं। पड़ोसी मुल्क में भारतीय मुसलमान की हालत बताते हुए कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमान को जितनी आजादी है, उतनी पाकिस्तान में नहीं है। भारतीय जासूस का तमगा लगने के बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। जहां उनसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की। इस दौरान वह महीनों तक रोशनी नहीं देख पाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
शमसुद्दीन ने फोन पर बताया कि 30 साल पहले वह मोहल्ले के रहने वाले सैदुल्लाह साहब की बेटी और दामाद के साथ पाकिस्तान घूमने गए थे। इसके बाद वापस न लौट सके। पाकिस्तान की जेल में हुए अमानवीय अत्याचारों को याद उनका गला भर आता है। वे बोले कि खुदा किसी को भी ऐसे दिन न दिखाए, जो मैंने देखे हैं।
विज्ञापन
अंधेरे में की पूछताछ, महीनों ठीक से सो न सके
शमसुद्दीन ने बताया कि उन्हें जेल में तमाम यातनाएं दी गईं। पड़ोसी मुल्क में भारतीय मुसलमान की हालत बताते हुए कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमान को जितनी आजादी है, उतनी पाकिस्तान में नहीं है। भारतीय जासूस का तमगा लगने के बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। जहां उनसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की। इस दौरान वह महीनों तक रोशनी नहीं देख पाए थे।
विज्ञापन
रात के अंधेरे में ही उन्हें कहीं ले जाया जाता था। अज्ञात स्थान पर अंधेरे में रखा जाता था। उन दिनों का दर्द याद कर शमसुद्दीन अभी भी सिहर उठते हैं। शरीर पर अमानवीयता के निशान पुराने जरूर हो गए लेकिन भय जिंदा है। महीनों नींद पूरी न होने की वजह से मानसिक संतुलन भी खराब हो गया था। घर वालों से बात कराने का लालच देकर उनसे भारतीय जासूस होने का कबूलनामा करने का दबाव बनाया जाता था। खाना भी ठीक से नहीं देते थे।
कारोबार देखने गए थे शमसुद्दीन
शमसुद्दीन की मानें तो उनका परिवार गरीब था। आर्थिक स्थितियों के चलते वह पाकिस्तान गए थे लेकिन हो कुछ और ही गया। उन्होंने बताया कि पकड़े जाने के बाद बहुत सफाई दी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अपने बेगुनाह होने का सुबूत भी वह न दे सके। अच्छी जिंदगी की तलाश में पाकिस्तान जाने की सजा उन्हें 28 साल भुगतनी पड़ी। भरे गले से वे बोले कि अगर जरा भी अंदाजा होता कि गैर मुल्क में ऐसा हो जाएगा तो वह पूरी जिंदगी अपने देश में गरीबी में ही बसर करते।
भारतीय मूल का जासूस बता हुआ उत्पीड़न
शमसुद्दीन ने बताया कि पाकिस्तान जाते ही उनके खराब दिन शुरू हो गए थे। वतन छूटने के साथ ही बीवी व बच्चों का साथ भी नहीं रहा। आगजनी में पासपोर्ट व अन्य कागजात जल गए। जैसे-तैसे उन्हें पाकिस्तानी नागरिकता मिली, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें भारतीय मूल का जासूस बताकर सलाखों के पीछे ढकेल दिया गया। शमसुद्दीन कहते हैं कि ऐसे मुल्क से कोई संबंध रखने से क्या फायदा? पाकिस्तान जाने से पहले वे जूता बनाने काम करते थे।
कारोबार देखने गए थे शमसुद्दीन
शमसुद्दीन की मानें तो उनका परिवार गरीब था। आर्थिक स्थितियों के चलते वह पाकिस्तान गए थे लेकिन हो कुछ और ही गया। उन्होंने बताया कि पकड़े जाने के बाद बहुत सफाई दी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अपने बेगुनाह होने का सुबूत भी वह न दे सके। अच्छी जिंदगी की तलाश में पाकिस्तान जाने की सजा उन्हें 28 साल भुगतनी पड़ी। भरे गले से वे बोले कि अगर जरा भी अंदाजा होता कि गैर मुल्क में ऐसा हो जाएगा तो वह पूरी जिंदगी अपने देश में गरीबी में ही बसर करते।
भारतीय मूल का जासूस बता हुआ उत्पीड़न
शमसुद्दीन ने बताया कि पाकिस्तान जाते ही उनके खराब दिन शुरू हो गए थे। वतन छूटने के साथ ही बीवी व बच्चों का साथ भी नहीं रहा। आगजनी में पासपोर्ट व अन्य कागजात जल गए। जैसे-तैसे उन्हें पाकिस्तानी नागरिकता मिली, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें भारतीय मूल का जासूस बताकर सलाखों के पीछे ढकेल दिया गया। शमसुद्दीन कहते हैं कि ऐसे मुल्क से कोई संबंध रखने से क्या फायदा? पाकिस्तान जाने से पहले वे जूता बनाने काम करते थे।