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SGST Raid: औद्योगिक घराने ने जमा कराए पांच करोड़ 90 लाख, 60 से ज्यादा अफसरों ने 15 प्रोजेक्टों पर मारा था छापा

Sun, 18 Aug 2024 01:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 18 Aug 2024 01:12 PM IST
सार

Kanpur News: कर चोरी की आशंका पर कानपुर, लखनऊ और नोएडा में 60 से ज्यादा अफसरों ने औद्योगिक घराने के 15 प्रोजेक्टों पर छापा मारा था। इस दौरान आईटीसी और रिवर्स आईटीसी के साथ ही प्रोजेक्टों में होने वाले भुगतान और कर में गड़बड़ी मिली।

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SGST Raid, Industrial house deposited Rs 5.9 crore, more than 60 officers raided 15 projects
आर्थिक अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में कर चोरी की आशंका में एसजीएसटी के 60 से ज्यादा अफसरों की टीमों ने शनिवार को शहर के एक बड़े औद्योगिक घराने के तीन शहरों के 15 प्रोजेक्टों और कार्यालयों पर छापा मारा था। दो दिन तक चली जांच पड़ताल के बाद औद्योगिक घराने ने पांच करोड़ 90 लाख रुपये एसजीएसटी में जमा कराए।

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आयुक्त राज्य कर के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त एसआईबी मुकेश चंद्र पांडेय और शैलेश कुमार के नेतृत्व में डाटा विश्लेषण मुख्यालय और कानपुर के अधिकारियों की ओर से जांच के बाद कानपुर, लखनऊ, नोएडा में कारोबारी के 15 प्रोजेक्ट की साइट पर छापा मारा गया।
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शहर के मोतीझील स्थित कार्यालय के साथ ही चकेरी, मंधना, आजादनगर स्थित प्रोजेक्ट पर कार्रवाई की गई थी। बताया गया कि एक अप्रैल 2019 से बदली गई कर व्यवस्था के क्रम में कंपनी के घोषित आंकड़ों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि कई प्रोजेक्ट में प्रथम अधिभोग प्रमाण पत्र यानी एफओसी अथवा समापन प्रमाण पत्र यानी सीसी जारी होने के बाद सप्लाई होने वाली इंवेंट्रीज पर जीएसटी की देयता नहीं होने के कारण कंपनी आईटीसी का लाभ नहीं ले सकती थी।

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एक प्रोजेक्ट में नहीं किया गया है पालन
इसके अलावा कंपनी के कई प्रोजेक्ट में एफओसी अथवा सीसी जारी होने के बाद सप्लाई होने वाली इंवेंट्रीज के निर्माण में उपयोग में आए माल पर नियमानुसार आईटीसी रिवर्सल नहीं किया गया है। जांच में पता चला कि नई कर व्यवस्था में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट पर नियमानुसार पांच प्रतिशत की करदेयता बिना आईटीसी के लाभ के साथ ली जा सकती है, लेकिन कंपनी ने एक प्रोजेक्ट में इसका पालन नहीं किया गया है।

पांच करोड़ 90 लाख का भुगतान कराया
अपर आयुक्त ग्रेड-1 शशांक शेखर मिश्रा ने बताया कि करचोरी का इनपुट मिला था। इसके बाद मुख्यालय व अन्य शहरों के जोनल अफसरों से कोऑर्डिनेट करके कार्रवाई की गई थी। जांच में मिली कमियों के आधार पर औद्योगिक घराने की दोनों कंपनियों से पांच करोड़ 90 लाख का भुगतान कराया गया। जांच टीमों में डिप्टी कमिश्नर विवेक उपाध्याय, संजीव शुक्ला, राजेश कुमार सिंह आदि रहे।

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