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एक साल में 12 हजार अमेरिकियों के सात करोड़ उड़ाए, मोटापा कम करें, बॉडी बनाएं जैसे विज्ञापन बने सहारा

Thu, 15 Jul 2021 12:24 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 15 Jul 2021 12:24 PM IST
सार

डीसीपी क्राइम के मुताबिक शातिरों ने वायरस के रूप में तमाम विज्ञापन तैयार किए थे। यही विज्ञापन अमेरिका के लोगों के कंप्यूटर में फ्लैश कराते थे।

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seven crore rupees taken by cyber criminal's from 12 thousand Americans In one year
चार आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कॉल सेंटर की आड़ में कानपुर में बैठकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले बेहद शातिर और हाईटेक हैं। इन लोगों ने एक साल में अमेरिका के 12 हजार लोगों से नौ लाख डॉलर (करीब सात करोड़) की ठगी की है। क्राइम ब्रांच ने काकादेव स्थित कॉल सेंटर से चार साइबर ठगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया है कि ये लोग अमेरिकी नागरिकों के सिस्टम पर मोटापा घटाने, बॉडी बनाने जैसे विज्ञापन फ्लैश कराते थे।
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जो भी इन विज्ञापनों के लिंक पर क्लिक करता था, उसके कंप्यूटर में वायरस चला जाता था। साथ ही एक मैसेज फ्लैश होता था, जिसमें इनके कॉल सेंटर का नंबर लिखा होता था। उसके बाद एंटीवायरस देने के नाम पर ये लोग ठगी करते थे। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि मूलरूप से नोएडा सेक्टर 25 निवासी मुनेंद्र शर्मा, फिरोजाबाद के संजीव कुमार, प्रतापगढ़ के जिकुरल्ला और बिहार के सूरज सुमन को गिरफ्तार किया गया है।
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मुनेंद्र फजलगंज व सूरज शारदा नगर काकादेव में रहता है। कॉल सेंटर का संचालक मुनेंद्र है। डीसीपी क्राइम के मुताबिक शातिरों ने वायरस के रूप में तमाम विज्ञापन तैयार किए थे। यही विज्ञापन अमेरिका के लोगों के कंप्यूटर में फ्लैश कराते थे। इसको क्लिक करने वाला इनके जाल में फंस जाता था। चारों आरोपियों को बुधवार को जेल भेज दिया गया है। 
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कॉल सेंटर में बैठीं लड़कियां करतीं थी बात
विज्ञापन के रूप में फ्लैश होने वाले वायरस को जो भी क्लिक करता था, उसका सिस्टम हैक हो जाता था। इसके बाद वह कॉल सेंटर के नंबर पर फोन करता था। यहां बैठीं एक्सपर्ट लड़कियां उनसे बात करती थीं। उनको बताया जाता था कि आपका डाटा रिकवर करवा देंगे। इसके लिए अलग-अलग प्लान हैं। तीन महीने, छह महीने तो कोई साल भर का है। इसका चार्ज 200 डॉलर से लेकर 600 डॉलर तक वसूला जाता था। जो लोग खातों में रुपये ट्रांसफर करते थे, उनके कंप्यूटर में एंटी वायरस डाल देते थे। इससे उनका कंप्यूटर का डाटा रिकवर हो जाता था।

दिल्ली की कंपनी ने शुरू किया ठगी का खेल
डीसीपी ने बताया कि कंपनी के दो कॉल सेंटर हैं। एक काकादेव में, दूसरा दिल्ली में। मुनेंद्र ने पुणे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पिछले साल वह लॉकडाउन के दौरान दिल्ली की कंपनी के संपर्क में आया। कंपनी के मालिक व अन्य लोगों ने उसे पूरा खेल बताया और कानपुर में कॉल सेंटर खोलने की योजना बनाई। इसके बाद यहां कॉल सेंटर शुरू किया। क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली वाले कॉल सेंटर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हर महीने करीब 300 लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। 

ये हुई बरामदगी 
आरोपियों के पास से 27 हार्ड डिस्क, अलग-अलग बैंकों के 16 एटीएम कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पांच मोबाइल, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक का डेबिट कार्ड, होटल ताज का मेंबरशिप कार्ड। 
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