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Kanpur News: सात बायो डीजल पंप सील, दो के खिलाफ प्राथमिकी
Tue, 10 Feb 2026 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:11 AM IST
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कन्नौज। इत्र नगरी में बायो-डीजल के नाम पर मिलावटखोरी का एक खतरनाक नेटवर्क फल-फूल रहा था। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने इसपर कार्रवाई की है। बीते चार फरवरी को एसटीएफ ने एक संदिग्ध टैंकर और लोडर पकड़ा था। इसमें भारी मात्रा में एथेनॉल लदा था। इस मामले में डीएम के आदेश पर डीएसओ ने सोमवार को सात बायो डीजल पंप सील कर दिए हैं। साथ ही दो खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे बायो-डीजल पंपों पर न केवल मानक विहीन ईंधन बेचा जा रहा था। केमिकल सॉल्वेंट की मदद से एथेनॉल और नेफ्था को डीजल-पेट्रोल बताकर खपाया जा रहा था। प्रशासन ने सात पंपों को सील कर दो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामले की शुरुआत तब हुई जब लखनऊ से आई एसटीएफ ने मानीमऊ क्षेत्र में घेराबंदी कर एक संदिग्ध टैंकर और लोडर को पकड़ा। जांच करने पर अधिकारी उस वक्त दंग रह गए जब पता चला कि इन वाहनों में भारी मात्रा में एथेनॉल लदा है। पूछताछ में पता चला कि यह एथेनॉल किसी वैध डिपो से नहीं, बल्कि तस्करी के जरिये राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाया गया था।
जांच में यह खुलासा हुआ है कि एक विशेष केमिकल सॉल्वेंट का उपयोग कर एथेनॉल और नेफ्था को इस तरह मिलाया जाता था कि वह दिखने और जलने में बिल्कुल बायो-डीजल या सामान्य डीजल जैसा प्रतीत हो। हैरानी की बात यह है कि जिले के कई इलाकों में खुले इन बायो-डीजल पंपों के पास जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) या लाइसेंस तक नहीं थे। बायो-डीजल बेचने के नाम पर इन केंद्रों पर धड़ल्ले से अवैध पेट्रोल और मिलावटी डीजल बेचा जा रहा था। एसटीएफ की जांच के अनुसार, इस मिलावटी ईंधन का कच्चा माल मुख्य रूप से राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से तस्करी कर कन्नौज लाया जा रहा था।
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पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की मांग पर डीएम सख्त
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजय द्विवेदी की मांग पर जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के कड़े रुख के बाद जिले में अवैध पंप संचालकों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया है। डीएम के निर्देश पर अब तक सात अवैध बायो-डीजल पंपों को पूरी तरह बंद करा दिया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी राजीव मिश्रा ने सौरिख क्षेत्र में मिलावटी ईंधन बेचने वाले दो मुख्य संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कई अन्य पंप संचालकों ने कार्रवाई के डर से रातों-रात मशीनों के नोजल खुद ही हटा लिए और पंप छोड़कर फरार हो गए।
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मास्टरमाइंड की तलाश तेज, कई जगह दबिश
एसटीएफ अब उस मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है जो राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तक फैले इस नेटवर्क का संचालन कर रहा था। सूत्रों की मानें तो इस खेल में कुछ बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं, जो रसद विभाग की आंखों में धूल झोंककर यह काला कारोबार कर रहे थे। सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एसटीएफ ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी विवेचना की जा रही है, जल्द ही मास्टर माइंड को पकड़ कर असली खेल उजागर किया जाएगा।
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वर्जन
जिले में अवैध रूप से संचालित किसी भी बायो-डीजल पंप को बख्शा नहीं जाएगा। मिलावटी ईंधन न केवल वाहनों के इंजन खराब कर रहा है, बल्कि इससे पर्यावरण और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। जांच जारी है और आरोपियाें पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। - आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे बायो-डीजल पंपों पर न केवल मानक विहीन ईंधन बेचा जा रहा था। केमिकल सॉल्वेंट की मदद से एथेनॉल और नेफ्था को डीजल-पेट्रोल बताकर खपाया जा रहा था। प्रशासन ने सात पंपों को सील कर दो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामले की शुरुआत तब हुई जब लखनऊ से आई एसटीएफ ने मानीमऊ क्षेत्र में घेराबंदी कर एक संदिग्ध टैंकर और लोडर को पकड़ा। जांच करने पर अधिकारी उस वक्त दंग रह गए जब पता चला कि इन वाहनों में भारी मात्रा में एथेनॉल लदा है। पूछताछ में पता चला कि यह एथेनॉल किसी वैध डिपो से नहीं, बल्कि तस्करी के जरिये राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाया गया था।
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जांच में यह खुलासा हुआ है कि एक विशेष केमिकल सॉल्वेंट का उपयोग कर एथेनॉल और नेफ्था को इस तरह मिलाया जाता था कि वह दिखने और जलने में बिल्कुल बायो-डीजल या सामान्य डीजल जैसा प्रतीत हो। हैरानी की बात यह है कि जिले के कई इलाकों में खुले इन बायो-डीजल पंपों के पास जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) या लाइसेंस तक नहीं थे। बायो-डीजल बेचने के नाम पर इन केंद्रों पर धड़ल्ले से अवैध पेट्रोल और मिलावटी डीजल बेचा जा रहा था। एसटीएफ की जांच के अनुसार, इस मिलावटी ईंधन का कच्चा माल मुख्य रूप से राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से तस्करी कर कन्नौज लाया जा रहा था।
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पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की मांग पर डीएम सख्त
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजय द्विवेदी की मांग पर जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के कड़े रुख के बाद जिले में अवैध पंप संचालकों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया है। डीएम के निर्देश पर अब तक सात अवैध बायो-डीजल पंपों को पूरी तरह बंद करा दिया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी राजीव मिश्रा ने सौरिख क्षेत्र में मिलावटी ईंधन बेचने वाले दो मुख्य संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई है। प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कई अन्य पंप संचालकों ने कार्रवाई के डर से रातों-रात मशीनों के नोजल खुद ही हटा लिए और पंप छोड़कर फरार हो गए।
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मास्टरमाइंड की तलाश तेज, कई जगह दबिश
एसटीएफ अब उस मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है जो राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तक फैले इस नेटवर्क का संचालन कर रहा था। सूत्रों की मानें तो इस खेल में कुछ बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं, जो रसद विभाग की आंखों में धूल झोंककर यह काला कारोबार कर रहे थे। सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एसटीएफ ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी विवेचना की जा रही है, जल्द ही मास्टर माइंड को पकड़ कर असली खेल उजागर किया जाएगा।
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वर्जन
जिले में अवैध रूप से संचालित किसी भी बायो-डीजल पंप को बख्शा नहीं जाएगा। मिलावटी ईंधन न केवल वाहनों के इंजन खराब कर रहा है, बल्कि इससे पर्यावरण और राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। जांच जारी है और आरोपियाें पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। - आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी