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यूपी: स्टेम सेल थेरेपी के लिए अलग से बनेगा नया विभाग, प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज होगा जीएसवीएम
Thu, 14 Apr 2022 02:18 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 14 Apr 2022 02:18 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज होगा, जिसमें अलग से स्टेम सेल थेरेपी का विभाग बनेगा। अभी यहां स्टेम सेल थेरेपी सर्जरी विभाग के समन्वय से दी जा रही है। विभाग बनने के बाद स्टेम सेल के क्षेत्र में शोध बढ़ेंगे। विभिन्न नए रोगों में स्टेम सेल थेरेपी दिए जाने का दायरा बढ़ेगा।
अभी चुनिंदा रोगों में यह थेरेपी दी जा रही है। कॉलेज प्रबंधन ने विभाग का खाका तैयार कर लिया है। विभिन्न मदों के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिए हैं। कॉलेज में स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित कमेटी का गठन हो चुका है। यही समिति थेरेपी से संबंधित प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेजती है।
सर्जरी विभाग में अभी कुछ पैदाइशी बीमारियों में स्टेम सेल थेरेपी दी जा रही है। इनमें बर्जर डिजीज और न्यूरो की बीमारियां हैं। इसके अलावा नसों के संकुचित होने से गैंगरीन के रोगियों को भी थेरेपी दी गई है। मुंबई के स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत हर महीने के तीसरे मंगलवार को सर्जरी विभाग की टीम के साथ थेरेपी दे रहे हैं।
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घुटने की गठिया में यह थेरेपी दिए जाने का नया प्रस्ताव तैयार किया गया। अभी तक इन रोगियों को पीआरपी थेरेपी दी जा रही थी, लेकिन उससे अधिक फायदा नहीं मिलता। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि खाका तैयार कर लिया गया है। कुछ प्रस्ताव भेजे गए हैं। स्टेम सेल बैंक बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इसमें बच्चों की नाड़ से मिलने वाली स्टेम सेल सुरक्षित रखी जाएंगी। इन कोशिकाओं का प्रयोग बेहतर नतीजे देता है।
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अभी चुनिंदा रोगों में यह थेरेपी दी जा रही है। कॉलेज प्रबंधन ने विभाग का खाका तैयार कर लिया है। विभिन्न मदों के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिए हैं। कॉलेज में स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित कमेटी का गठन हो चुका है। यही समिति थेरेपी से संबंधित प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेजती है।
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सर्जरी विभाग में अभी कुछ पैदाइशी बीमारियों में स्टेम सेल थेरेपी दी जा रही है। इनमें बर्जर डिजीज और न्यूरो की बीमारियां हैं। इसके अलावा नसों के संकुचित होने से गैंगरीन के रोगियों को भी थेरेपी दी गई है। मुंबई के स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत हर महीने के तीसरे मंगलवार को सर्जरी विभाग की टीम के साथ थेरेपी दे रहे हैं।
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घुटने की गठिया में यह थेरेपी दिए जाने का नया प्रस्ताव तैयार किया गया। अभी तक इन रोगियों को पीआरपी थेरेपी दी जा रही थी, लेकिन उससे अधिक फायदा नहीं मिलता। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि खाका तैयार कर लिया गया है। कुछ प्रस्ताव भेजे गए हैं। स्टेम सेल बैंक बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इसमें बच्चों की नाड़ से मिलने वाली स्टेम सेल सुरक्षित रखी जाएंगी। इन कोशिकाओं का प्रयोग बेहतर नतीजे देता है।