फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   sentenced to death in case of misdeeds and murder in hardoi up

हरदोई में बिटिया के गुनहगार को सजा-ए-मौत, रामचरित मानस की चौपाई पढ़कर न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, फिर तोड़ दी कलम

Tue, 23 Feb 2021 12:48 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 23 Feb 2021 12:48 PM IST
विज्ञापन
sentenced to death in case of misdeeds and murder in hardoi up
सांकेतिक तस्वीर
हरदोई जिले में मासूम बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या का फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत ने रामचरित मानस की चौपाई पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में कहा गया है कि... अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।
विज्ञापन


इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई। न्यायाधीश ने इस अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि छोटे भाई की स्त्री, बहन, पुत्र की स्त्री और कन्या ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसका वध करने में कोई पाप नहीं होता।
विज्ञापन


इसके बाद न्यायाधीश ने गुड्डू उर्फ गब्बू को मौत की सजा सुना दी। सजा सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम तोड़ दिया और अपने कार्यालय कक्ष में चले गए। फैसला सुनाते समय उन्होंने कहा कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध न सिर्फ बर्बर, क्रूर व अमानवीय है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपितु यह अपराध मानवता की हत्या के बराबर है। उन्होंने कहा कि एक अबोध बालिका जो असहाय और बचावविहीन अवस्था में थी, उसके साथ दुष्कर्म किया और साक्ष्यों को मिटाने के लिए हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया। यह क्रूरता की पराकाष्ठा है। उसने जो कृत्य किया है, ऐसा कृत्य जंगली जानवर और हिंसक जानवर भी अपने या दूसरे जानवरों के बच्चों के साथ नहीं करते।

भारतीय समाज में कन्या को पूज्यनीय माना जाता है। अव्यस्क कन्याओं को विशेषतय: 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का रूप मानते हुए उनकी पूजा की जाती है और उनके पांव भी धोये जाते हैं। जिस देश में कन्याओं के प्रति इतने उच्च सामाजिक मानक हों, वहां पर डेढ़ साल की अबोध बालिका के साथ इस तरह का कुकृत्य निश्चित रूप से कठोरतम दंड से दंडित किए जाने योग्य है।-चंद्र विजय श्रीनेत, अपर जिला सत्र न्यायाधीश (पाक्सो)

इसलिए तोड़ दी जाती कलम 
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता रामदेव शुक्ला का कहना है कि अदालती परंपरा चली आ रही है और इसीलिए वह कलम तोड़ दी जाती है, जिससे फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद न्यायाधीश हस्ताक्षर करते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रतीक के रूप में कार्य किया जाता है कि इस कलम के माध्यम से किसी के जीवन के समाप्ति का फैसला हो रहा है तो इस कलम से कोई अन्य कार्य न किया जाए।

10 साल पहले हुई थी तीन को फांसी की सजा 
सोमवार को आए फैसले से पहले भी जिले में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। फांसी की सजा का पिछला मामला 11 फरवरी 2011 को सामने आया था। तब अतरौली थाना क्षेत्र के टांड़खेड़ा में पांच लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश हरीश त्रिपाठी ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। तत्कालीन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी एजाज अहमद ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की थी।

पूरी शिद्दत से की गई पैरवी
जिला शासकीय अधिवक्ता रामचंद्र राजपूत ने बताया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत आरोपी को सजा दिलाने के लिए पूरी शिद्दत से पैरवी की गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने मजबूती के साथ आरोपी को सजा दिलाने के लिए पक्ष रखा। यह फैसला नजीर बनेगा। बहू-बेटियों पर गलत निगाह रखने वालों को चेतावनी भी देगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed