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यूपी: डेढ़ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड, पहले अकड़ा फिर सजा सुनकर कांपने लगा गब्बू
Tue, 23 Feb 2021 12:47 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 23 Feb 2021 12:47 PM IST
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हरदोई: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के हरदोई जिले में डेढ़ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने से पहले जज ने अभियुक्त गुड्डू उर्फ गब्बू से सवाल किया कि क्या उसे कुछ कहना है।
इस पर गब्बू ने पूरी अकड़ के साथ जवाब दिया कि जैसा सही समझें, वैसा करें। जैसा वकील लोग बताएं वैसा करें। इसके बाद उसे कटघरे में खड़ा कर दिया गया और जब जज ने सजा सुनाई तो गब्बू के हाथ-पैर कांपने लगे और वह कटघरे में ही बैठ गया।
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इस पर गब्बू ने पूरी अकड़ के साथ जवाब दिया कि जैसा सही समझें, वैसा करें। जैसा वकील लोग बताएं वैसा करें। इसके बाद उसे कटघरे में खड़ा कर दिया गया और जब जज ने सजा सुनाई तो गब्बू के हाथ-पैर कांपने लगे और वह कटघरे में ही बैठ गया।
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हरदोई: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड
- फोटो : अमर उजाला
गुमसुम बैठे गब्बू ने न तो किसी से कोई बात की और न ही न्यायालय के फैसले को लेकर कोई टिप्पणी। मौत की सजा सुनाए जाने का पता चलते ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी न्यायालय पहुंच गए। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे जिला कारागार वापस भेज दिया गया।
देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 17 मार्च 2014 को डेढ़ साल की बच्ची की गांव के ही गब्बू ने दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में गब्बू को फांसी की सजा सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत ने सुनाई है।
घटना के बाद से ही परिजनों ने गब्बू से तोड़ लिया था नाता
आरोपी के गांव के लोग बताते हैं कि घटना से गब्बू के परिजन खासे गुस्से में थे। आलम यह था कि गब्बू को जेल भेजने के बाद उसके दो भाइयों में से कोई भी जिला कारागार में गब्बू से मुलाकात करने नहीं गया। इतना ही नहीं परिजनों ने पैरवी कराने से भी इनकार कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि न्यायालय के निर्देश पर गब्बू को एक अधिवक्ता की व्यवस्था कराई गई। गब्बू तीन भाइयों में बड़ा है। गब्बू की शादी नहीं हुई है, जबकि उसके दोनों छोटे भाइयों का भरा पूरा परिवार है। सजा सुनाए जाने के दौरान भी गब्बू के परिवार का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं रहा।
देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 17 मार्च 2014 को डेढ़ साल की बच्ची की गांव के ही गब्बू ने दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में गब्बू को फांसी की सजा सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत ने सुनाई है।
घटना के बाद से ही परिजनों ने गब्बू से तोड़ लिया था नाता
आरोपी के गांव के लोग बताते हैं कि घटना से गब्बू के परिजन खासे गुस्से में थे। आलम यह था कि गब्बू को जेल भेजने के बाद उसके दो भाइयों में से कोई भी जिला कारागार में गब्बू से मुलाकात करने नहीं गया। इतना ही नहीं परिजनों ने पैरवी कराने से भी इनकार कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि न्यायालय के निर्देश पर गब्बू को एक अधिवक्ता की व्यवस्था कराई गई। गब्बू तीन भाइयों में बड़ा है। गब्बू की शादी नहीं हुई है, जबकि उसके दोनों छोटे भाइयों का भरा पूरा परिवार है। सजा सुनाए जाने के दौरान भी गब्बू के परिवार का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं रहा।
हरदोई: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड
- फोटो : अमर उजाला
होली मिलने आया था, जिंदगी का रंग उड़ा दिया
बच्ची के परिजनों के साथ गब्बू के ठीक-ठाक संबंध थे। रंग खेलने वाले दिन ही देर शाम गब्बू बच्ची के घर पर होली मिलने गया था। घर में बच्ची की दादी, मां थीं, जबकि पिता गांव में परिचितों के यहां होली मिलने गया था। बच्ची को दुलारते हुए गब्बू ने गोद में उठा लिया था और घर वाले उसके लिए नाश्ता लगा रहे थे। इसी दौरान वह बच्ची को लेकर घर से बाहर निकल गया। इसके बाद जो कुछ हुआ, उससे बच्ची के परिजनों को ऐसा दर्द मिला कि जिंदगी का रंग ही उजड़ गया।
पूरी शिद्दत से की गई पैरवी
जिला शासकीय अधिवक्ता रामचंद्र राजपूत ने बताया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत आरोपी को सजा दिलाने के लिए पूरी शिद्दत से पैरवी की गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने मजबूती के साथ आरोपी को सजा दिलाने के लिए पक्ष रखा। यह फैसला नजीर बनेगा। बहू-बेटियों पर गलत निगाह रखने वालों को चेतावनी भी देगा।
गब्बू का अपराध क्रूरतम
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने बताया कि साक्ष्य यही साबित कर रहे थे कि गब्बू ने घटना को अंजाम दिया है। उसने क्रूरतम अपराध किया। पुलिस विवेचना में भी सब कुछ स्पष्ट था और फिर मुकदमे के दौरान गवाहों ने भी सत्य का साथ दिया। फांसी की सजा से समाज में भी संदेश जाएगा कि अपराध से दूरी जरूरी है।
बच्ची के परिजनों के साथ गब्बू के ठीक-ठाक संबंध थे। रंग खेलने वाले दिन ही देर शाम गब्बू बच्ची के घर पर होली मिलने गया था। घर में बच्ची की दादी, मां थीं, जबकि पिता गांव में परिचितों के यहां होली मिलने गया था। बच्ची को दुलारते हुए गब्बू ने गोद में उठा लिया था और घर वाले उसके लिए नाश्ता लगा रहे थे। इसी दौरान वह बच्ची को लेकर घर से बाहर निकल गया। इसके बाद जो कुछ हुआ, उससे बच्ची के परिजनों को ऐसा दर्द मिला कि जिंदगी का रंग ही उजड़ गया।
पूरी शिद्दत से की गई पैरवी
जिला शासकीय अधिवक्ता रामचंद्र राजपूत ने बताया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत आरोपी को सजा दिलाने के लिए पूरी शिद्दत से पैरवी की गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने मजबूती के साथ आरोपी को सजा दिलाने के लिए पक्ष रखा। यह फैसला नजीर बनेगा। बहू-बेटियों पर गलत निगाह रखने वालों को चेतावनी भी देगा।
गब्बू का अपराध क्रूरतम
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने बताया कि साक्ष्य यही साबित कर रहे थे कि गब्बू ने घटना को अंजाम दिया है। उसने क्रूरतम अपराध किया। पुलिस विवेचना में भी सब कुछ स्पष्ट था और फिर मुकदमे के दौरान गवाहों ने भी सत्य का साथ दिया। फांसी की सजा से समाज में भी संदेश जाएगा कि अपराध से दूरी जरूरी है।
हरदोई: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड
- फोटो : अमर उजाला
मजबूती से रखा था आरोपी का पक्ष
आरोपी गुड्डू उर्फ गब्बू की पैरवी कर रहे न्यायमित्र राधेश्याम सिंह ने कहा कि साक्ष्य के आधार पर अदालत को जो सही लगा, वह फैसला सुनाया गया। कहा कि अभियुक्त के अधिवक्ता होने के नाते उन्होंने उसका पक्ष मजबूती से रखा। अभियुक्त को अवगत करा दिया है कि अगर इस आदेश से असंतुष्ट है तो उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
मेहनत सफल हो गई
घटना के विवेचक और देहात कोतवाली के तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि मेहनत सफल हो गई। जो घटना हुई थी उसके लिए गब्बू फांसी का ही हकदार है। घटना के दिन से लेकर पूरी विवेचना के दौरान मेडिकल रिपोर्ट रही हो या फिर एफएसएल की रिपोर्ट हर जगह गब्बू दोषी साबित हो रहा था। आज लग रहा है कि मेहनत सफल हो गई।
बिल्कुल सही फैसला, कलेजे को मिली ठंडक
हमने गब्बू का क्या बिगाड़ा था। मासूम बच्ची तो उसकी गोद में खेलने गई थी, लेकिन उसने जो किया उससे रूह कांप गई। उसे बिल्कुल सही सजा मिली है। अब कलेजे को ठंडक मिली है। यह कहकर बच्ची के पिता शून्य में निहारने लगे और बेटी को याद कर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
बच्ची के पिता के मुताबिक वर्ष 2014 में वह पिहानी-चपरतला मार्ग स्थित एक गांव में प्लाईवुड फैक्टरी में काम करते थे। होली का त्योहार मनाने घर आए थे। एक ही बच्ची थी, सो उसके लिए दो नई फ्राक लाए थी। बच्ची की मां और दादी ने उसके लिए हाथ की चूड़ी और कंगन भी खरीदे थे। होली की शाम मिलाभेटी शुरू हुई तो बिटिया को भी नए कपड़े पहनाकर तैयार कर दिया, लेकिन कौन जानता था कि सजी धजी बिटिया के साथ ऐसा गंदा काम होगा। बच्ची के पिता, मां और दादी के जेहन में पूरी घटना ताजा है।
आरोपी गुड्डू उर्फ गब्बू की पैरवी कर रहे न्यायमित्र राधेश्याम सिंह ने कहा कि साक्ष्य के आधार पर अदालत को जो सही लगा, वह फैसला सुनाया गया। कहा कि अभियुक्त के अधिवक्ता होने के नाते उन्होंने उसका पक्ष मजबूती से रखा। अभियुक्त को अवगत करा दिया है कि अगर इस आदेश से असंतुष्ट है तो उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
मेहनत सफल हो गई
घटना के विवेचक और देहात कोतवाली के तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि मेहनत सफल हो गई। जो घटना हुई थी उसके लिए गब्बू फांसी का ही हकदार है। घटना के दिन से लेकर पूरी विवेचना के दौरान मेडिकल रिपोर्ट रही हो या फिर एफएसएल की रिपोर्ट हर जगह गब्बू दोषी साबित हो रहा था। आज लग रहा है कि मेहनत सफल हो गई।
बिल्कुल सही फैसला, कलेजे को मिली ठंडक
हमने गब्बू का क्या बिगाड़ा था। मासूम बच्ची तो उसकी गोद में खेलने गई थी, लेकिन उसने जो किया उससे रूह कांप गई। उसे बिल्कुल सही सजा मिली है। अब कलेजे को ठंडक मिली है। यह कहकर बच्ची के पिता शून्य में निहारने लगे और बेटी को याद कर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
बच्ची के पिता के मुताबिक वर्ष 2014 में वह पिहानी-चपरतला मार्ग स्थित एक गांव में प्लाईवुड फैक्टरी में काम करते थे। होली का त्योहार मनाने घर आए थे। एक ही बच्ची थी, सो उसके लिए दो नई फ्राक लाए थी। बच्ची की मां और दादी ने उसके लिए हाथ की चूड़ी और कंगन भी खरीदे थे। होली की शाम मिलाभेटी शुरू हुई तो बिटिया को भी नए कपड़े पहनाकर तैयार कर दिया, लेकिन कौन जानता था कि सजी धजी बिटिया के साथ ऐसा गंदा काम होगा। बच्ची के पिता, मां और दादी के जेहन में पूरी घटना ताजा है।
हरदोई: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में आरोपी को मृत्युदंड
- फोटो : अमर उजाला
इसलिए तोड़ दी जाती कलम
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता रामदेव शुक्ला का कहना है कि अदालती परंपरा चली आ रही है और इसीलिए वह कलम तोड़ दी जाती है, जिससे फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद न्यायाधीश हस्ताक्षर करते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रतीक के रूप में कार्य किया जाता है कि इस कलम के माध्यम से किसी के जीवन के समाप्ति का फैसला हो रहा है तो इस कलम से कोई अन्य कार्य न किया जाए।
10 साल पहले हुई थी तीन को फांसी की सजा
सोमवार को आए फैसले से पहले भी जिले में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। फांसी की सजा का पिछला मामला 11 फरवरी 2011 को सामने आया था। तब अतरौली थाना क्षेत्र के टांड़खेड़ा में पांच लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश हरीश त्रिपाठी ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। तत्कालीन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी एजाज अहमद ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की थी।
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता रामदेव शुक्ला का कहना है कि अदालती परंपरा चली आ रही है और इसीलिए वह कलम तोड़ दी जाती है, जिससे फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद न्यायाधीश हस्ताक्षर करते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रतीक के रूप में कार्य किया जाता है कि इस कलम के माध्यम से किसी के जीवन के समाप्ति का फैसला हो रहा है तो इस कलम से कोई अन्य कार्य न किया जाए।
10 साल पहले हुई थी तीन को फांसी की सजा
सोमवार को आए फैसले से पहले भी जिले में आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। फांसी की सजा का पिछला मामला 11 फरवरी 2011 को सामने आया था। तब अतरौली थाना क्षेत्र के टांड़खेड़ा में पांच लोगों की सामूहिक हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश हरीश त्रिपाठी ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। तत्कालीन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी एजाज अहमद ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की थी।