{"_id":"79ee1977487ec642787985167695be8f","slug":"scarf-caught-in-the-machine-schoolgirl-serious-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुपट्टा मशीन में फंसा, छात्रा गंभीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुपट्टा मशीन में फंसा, छात्रा गंभीर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय पालीटेक्निक में प्रैक्टिकल के दौरान लैथ मशीन में दुपट्टा फंसने से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की छात्रा दीपशिखा का गला कस गया। इससे वह अचेत होकर गिर पड़ी।
विज्ञापन
आनन-फानन में छात्रा को विकास नगर के आरपी मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे हैलट रेफर किया गया। प्रैक्टिकल स्थगित कर दिया गया। पालीटेक्निक में इस तरह की पहली घटना हुई है।
विज्ञापन
बर्रा बाईपास की दीपशिखा यादव (20) पुत्री रामेंद्र यादव राजकीय पालीटेक्निक में मेकेनिकल इंजीनियरिंग फाइनल ईयर की छात्रा है। बुधवार को प्रैक्टिकल था, इसलिए वह सीधे वर्कशॉप में पहुंची। परीक्षक के सामने लैथ मशीन से जॉब कार्ड बनाने का प्रयोग शुरू किया ही था कि दुपट्टा मशीन में फंस गया। छात्रा घिसटते हुए मशीन से जा चिपकी।
विज्ञापन
चीख पुकार मची तो इंस्ट्रक्टर ने मशीन बंद की। मशीन का चक्का पीछे किया और दुपट्टा कैंची से काटकर छात्रा को छुड़ाया। गला कसने से दीपशिखा को सांस लेने में दिक्कत हुई और वह गिर पड़ी। प्रिंसिपल डॉ. आरके सिंह ने छात्रा को अस्पताल पहुंचाया। एचओडी एसएन मौर्या ने बताया कि छात्रा का इलाज चल रहा है।
अब दुपट्टे के साथ प्रैक्टिकल पर रोक
मशीन में दुपट्टा फंसने की घटना के बाद पालीटेक्निक प्रशासन चेता और दुपट्टे के साथ छात्राओं के प्रैक्टिकल करने पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि प्रैक्टिकल लैब में आधुनिक तकनीक की बड़ी मशीनें हैं। मशीनों पर जॉब कार्ड बनाने सहित कई कामकाज होते हैं। इनमें दुपट्टा फंसने की आशंका रहती है।
छात्र की मौत के मामले में तीन निष्कासित
कानपुर। राजकीय पालीटेक्निक में केमिकल इंजीनियरिंग फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट अरुण कुमार यादव से मारपीट और उसकी मौत के मामले में नीलेश मौर्या, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, देवेश गुप्ता को संस्थान से निष्कासित कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में इन स्टूडेंटों को मारपीट का दोषी पाया गया।
निष्कासन दो सेमेस्टर यानी एक साल के लिए हुआ है। पालीटेक्निक स्टूडेंट अरुण यादव को 5 दिसंबर 2015 को पीटा गया था। गर्दन की हड्डी टूटने के बाद उसकी मौत हो गई थी। प्रिंसिपल डॉ. आरके सिंह का कहना है कि निष्कासन अवधि बढ़ाई जा सकती है।