सत्येंद्र दुबे हत्याकांड: जलकल जीएम नीरज गौड़ से सीबीआई की पूछताछ, कुछ दस्तावेज सहित अन्य सामान सील
नेशनल हाईवे के तीन बड़े प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का घपला हुआ, जो काम नहीं हुआ, उसका भी भुगतान करा दिया गया। इसी घोटाले में फंसे वर्तमान में जलकल जीएम, कानपुर नीरज गौड़ की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दरअसल, एनएचएआई के परियोजना निदेशक रहे सत्येंद्र दुबे हत्याकांड के मामला भी उनसे जुड़ गया है। इस हत्याकांड में साक्ष्य जुटाने के लिए सीबीआई ने नीरज गौड़ से पूछताछ की।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एनएचएआई के परियोजना निदेशक रहे सत्येंद्र दुबे हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई ने साक्ष्य जुटाने के लिए जलकल विभाग के महाप्रबंधक नीरज गौड़ से पूछताछ की। नीरज गौड़ 2008 से 2013 तक एनएचएआई के वाराणसी -गया सेक्शन में तैनात थे। टोल में ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के मामले की जांच की भी चर्चा है।
जीएम के बंगले में कुछ दस्तावेज, नगदी भी सील की गई। बिहार के सिवान जिले में जन्मे सत्येंद्र कुमार दुबे स्थानीय आईआईटी (आईआईटी कानपुर) से पढ़ाई करने के बाद एनएचएआई में परियोजना निदेशक बने थे। भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी सत्येंद्र दुबे स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को जनता के सामने लाए थे।
एनएचएआई के कुछ बड़े अधिकारियों पर ठेकेदारों का फेवर लेने का भी आरोप लगाया था। 27 नवंबर 2003 को गया रेलवे स्टेशन के पास सत्येंद्र दुबे की हत्या कर दी गई थी।
हत्यारों के नक्सली कनेक्शन की बात भी सामने आई थी। सीबीआई जांच में भी मामला दबता देख आईआईटी के एक पूर्व छात्र ने आरटीआई के तहत इस संबंध में सवाल पूछा था, जिसके जवाब और पैरवी होने पर पुन: जांच तेज हुई। चर्चा है कि नीरज गौड़ छह साल तक एनएचएआई के बनारस-गया सेक्शन में तैनात रहे।
इसलिए वहां के काकस के संबंध में जानकारी होगी, जिसके संबंध में पूछताछ की गई। यह भी चर्चा है कि सीबीआई ने नीरज गौड़ की एनएचएआई में तैनाती के इदौरान उक्त सेक्शन के टोल में ठेकेदार को करीब 30 करोड़ का लाभ पहुंचाने के मामले में पूछताछ की।