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संजीवनी ब्लड बैंक सील
अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 15 Jan 2015 02:23 AM IST
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संजीवनी ब्लड बैंक सील कर दिया गया। बुधवार को सुबह एसीएम छह के नेतृत्व में ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम संजीवनी पहुंची। ब्लड बैंक में टीम को काम होते मिला। इस पर एसीएम ने तत्काल एक्शन लेते हुए ब्लड बैंक को सील करा दिया। सील करने का पत्र काकादेव थाने में भी रिसीव करा दिया गया है। अब यदि सील खुलती है या ब्लड बैंक का काम शुरू होता है तो तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
‘अमर उजाला’ में 14 जनवरी को छपी ‘खून वाला खलनायक, कहां है नायक’ खबर का संज्ञान लेकर ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार और एजाज अहमद ने संजीवनी ब्लड बैंक पर कार्रवाई के लिए एडीएम सिटी से अनुमति मांगी। अनुमति पत्र में ‘अमर उजाला’ के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला भी दिया गया था। इस पर एडीएम सिटी अविनाश सिंह ने एसीएम-6 राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नेतृत्व में ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम गठित की और कार्रवाई का आदेश दे दिया। इसके बाद टीम संजीवनी ब्लड बैंक पहुंची। एसीएम को यहां काम होते मिला। रोक के बाद भी ब्लड बैंक संचालित करने पर मालिक को कड़ी फटकार लगाई गई। इसके बाद ब्लड बैंक के सभी रिकॉर्ड दोनों फ्रीजर, अन्य उपकरण, ब्लड बैग के साथ ही डोनर, इश्यू और मास्टर रजिस्टर को एक कमरे में बंद कर सील लगा दी गई। साथ में पहुंची काकादेव थाने की पुलिस को सूचना रिसीव कराने के साथ ब्लड बैंक पर नजर रखने की हिदायत दी गई।
‘डॉक्टर साहब! यह क्या हो रहा है’
दोपहर करीब 1:50 बजे एसीएम-6 राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी काकादेव पुलिस के साथ संजीवनी ब्लड बैंक पहुंचे। यहां काम होते देख एसीएम ने मालिक डॉ. संजीव सिकरोरिया से पूछा, डॉक्टर साहब! यह क्या हो रहा है। जब ब्लड बैंक बंद करा दिया गया था तो काम कैसे हो रहा है? डॉक्टर के जवाब देने से पहले ही उनकी पत्नी डॉ. मनीषा सिकरोरिया ने कहा कि ब्लड बैंक नहीं चल रहा है। सिर्फ बायोप्सी हो रही है। इस पर ड्रग इंस्पेक्टर एजाज अहमद ने कहा कि सब कुछ दिख रहा है कि यहां क्या चल रहा है।
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हटा दिया गया था ब्लड
मंगलवार रात तक ब्लड बैंक में कई ग्रुप का ब्लड था। इसकी पुष्टि वहां के कर्मचारियों ने एबी पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड मांगने पर की थी। ‘अमर उजाला’ के रिपोर्टर को महिला कर्मचारी ने बताया था कि उनके पास एबी पॉजिटिव और अन्य ग्रुप के ब्लड हैं। बुधवार दोपहर जब टीम ने छापा मारा तो डीप फ्रीजर में ब्लड नहीं था। किसी को शक न हो इसलिए उसे हटा दिया गया था।
पल-पल की ले रहे थे जानकारी
‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद ही संजीवनी ब्लड बैंक प्रबंधन को आभास हो गया था कि बड़ी कार्रवाई तय है। सुबह से ही वहां जरूरी सामानों को सुरक्षित करने में लोग जुट गए थे। कार्रवाई की जानकारी के लिए ड्रग इंस्पेक्टरों की जासूसी भी हो रही थी। एक बुजुर्ग लगातार फोन पर जुटे थे और कह रहे थे कि ड्रग इंस्पेक्टर कहां हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी देते रहो। साथ ही बता भी रहे थे कि खबर छपने के बाद उन्होंने कहां-कहां और किन-किन से मुलाकात की है।
तीन जनवरी को किया गया था बंद
तीन जनवरी को असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर (एडीसी) लखनऊ पीपी सिंह के नेतृत्व में कानपुर के ड्रग इंस्पेक्टर एजाज अहमद और कानपुर देहात के ड्रग इंस्पेक्टर एके जैन ने संजीवनी ब्लड बैंक की जांच की थी। कई कमियां और टेक्नीशियन न मिलने के बाद ब्लड बैंक के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी। पुलिस को इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पर टीम के जाने के बाद ब्लड बैंक पहले की तरह संचालित होने लगा।
डेढ़ घंटे चली कार्रवाई
दोपहर करीब 1:50 बजे संजीवनी ब्लड बैंक की जांच शुरू हुई और 3:20 बजे सील लगाई गई। ब्लड बैंक के जिस कमरे को सील किया गया है उस पर ताला लगाने की कोई व्यवस्था न होने के बाद टीम ने लोहे के तार से कमरे का दरवाजा बांधा। इसके बाद सील की कार्रवाई की गई।
बायोप्सी के उपकरण निकाल दें
ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने ब्लड बैंक के कमरों में रखे उपकरणों को एक कमरे में एकत्र करना शुरू किया तो एक कमरे से बायोप्सी का उपकरण भी कर्मचारियों ने उठाकर सील होने वाले कमरे में रखा। इस पर डॉ. मनीषा ने ड्रग इंस्पेक्टरों से बात की। ड्रग इंस्पेक्टरों ने बायोप्सी उपकरण को बाहर करने का आदेश दिया।
लाइसेंस निरस्त करने की हो रही कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार और एजाज अहमद ने कहा कि संजीवनी ब्लड बैंक को कमियां मिलने के बाद बंद कराया गया था। कहा गया था कि कमियों को दूर करने के बाद ड्रग विभाग को जानकारी दें लेकिन यहां ब्लड बैंक संचालित होने की पुष्टि हुई है। अब ब्लड बैंक के लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर लखनऊ को भेजी जा रही है। यहां पैथोलॉजी का भी काम होता है इसलिए पूरे ब्लड बैंक को सील नहीं किया जा सकता।
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‘अमर उजाला’ में 14 जनवरी को छपी ‘खून वाला खलनायक, कहां है नायक’ खबर का संज्ञान लेकर ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार और एजाज अहमद ने संजीवनी ब्लड बैंक पर कार्रवाई के लिए एडीएम सिटी से अनुमति मांगी। अनुमति पत्र में ‘अमर उजाला’ के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला भी दिया गया था। इस पर एडीएम सिटी अविनाश सिंह ने एसीएम-6 राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नेतृत्व में ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम गठित की और कार्रवाई का आदेश दे दिया। इसके बाद टीम संजीवनी ब्लड बैंक पहुंची। एसीएम को यहां काम होते मिला। रोक के बाद भी ब्लड बैंक संचालित करने पर मालिक को कड़ी फटकार लगाई गई। इसके बाद ब्लड बैंक के सभी रिकॉर्ड दोनों फ्रीजर, अन्य उपकरण, ब्लड बैग के साथ ही डोनर, इश्यू और मास्टर रजिस्टर को एक कमरे में बंद कर सील लगा दी गई। साथ में पहुंची काकादेव थाने की पुलिस को सूचना रिसीव कराने के साथ ब्लड बैंक पर नजर रखने की हिदायत दी गई।
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‘डॉक्टर साहब! यह क्या हो रहा है’
दोपहर करीब 1:50 बजे एसीएम-6 राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी काकादेव पुलिस के साथ संजीवनी ब्लड बैंक पहुंचे। यहां काम होते देख एसीएम ने मालिक डॉ. संजीव सिकरोरिया से पूछा, डॉक्टर साहब! यह क्या हो रहा है। जब ब्लड बैंक बंद करा दिया गया था तो काम कैसे हो रहा है? डॉक्टर के जवाब देने से पहले ही उनकी पत्नी डॉ. मनीषा सिकरोरिया ने कहा कि ब्लड बैंक नहीं चल रहा है। सिर्फ बायोप्सी हो रही है। इस पर ड्रग इंस्पेक्टर एजाज अहमद ने कहा कि सब कुछ दिख रहा है कि यहां क्या चल रहा है।
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हटा दिया गया था ब्लड
मंगलवार रात तक ब्लड बैंक में कई ग्रुप का ब्लड था। इसकी पुष्टि वहां के कर्मचारियों ने एबी पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड मांगने पर की थी। ‘अमर उजाला’ के रिपोर्टर को महिला कर्मचारी ने बताया था कि उनके पास एबी पॉजिटिव और अन्य ग्रुप के ब्लड हैं। बुधवार दोपहर जब टीम ने छापा मारा तो डीप फ्रीजर में ब्लड नहीं था। किसी को शक न हो इसलिए उसे हटा दिया गया था।
पल-पल की ले रहे थे जानकारी
‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद ही संजीवनी ब्लड बैंक प्रबंधन को आभास हो गया था कि बड़ी कार्रवाई तय है। सुबह से ही वहां जरूरी सामानों को सुरक्षित करने में लोग जुट गए थे। कार्रवाई की जानकारी के लिए ड्रग इंस्पेक्टरों की जासूसी भी हो रही थी। एक बुजुर्ग लगातार फोन पर जुटे थे और कह रहे थे कि ड्रग इंस्पेक्टर कहां हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी देते रहो। साथ ही बता भी रहे थे कि खबर छपने के बाद उन्होंने कहां-कहां और किन-किन से मुलाकात की है।
तीन जनवरी को किया गया था बंद
तीन जनवरी को असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर (एडीसी) लखनऊ पीपी सिंह के नेतृत्व में कानपुर के ड्रग इंस्पेक्टर एजाज अहमद और कानपुर देहात के ड्रग इंस्पेक्टर एके जैन ने संजीवनी ब्लड बैंक की जांच की थी। कई कमियां और टेक्नीशियन न मिलने के बाद ब्लड बैंक के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई थी। पुलिस को इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पर टीम के जाने के बाद ब्लड बैंक पहले की तरह संचालित होने लगा।
डेढ़ घंटे चली कार्रवाई
दोपहर करीब 1:50 बजे संजीवनी ब्लड बैंक की जांच शुरू हुई और 3:20 बजे सील लगाई गई। ब्लड बैंक के जिस कमरे को सील किया गया है उस पर ताला लगाने की कोई व्यवस्था न होने के बाद टीम ने लोहे के तार से कमरे का दरवाजा बांधा। इसके बाद सील की कार्रवाई की गई।
बायोप्सी के उपकरण निकाल दें
ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने ब्लड बैंक के कमरों में रखे उपकरणों को एक कमरे में एकत्र करना शुरू किया तो एक कमरे से बायोप्सी का उपकरण भी कर्मचारियों ने उठाकर सील होने वाले कमरे में रखा। इस पर डॉ. मनीषा ने ड्रग इंस्पेक्टरों से बात की। ड्रग इंस्पेक्टरों ने बायोप्सी उपकरण को बाहर करने का आदेश दिया।
लाइसेंस निरस्त करने की हो रही कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर मनोज कुमार और एजाज अहमद ने कहा कि संजीवनी ब्लड बैंक को कमियां मिलने के बाद बंद कराया गया था। कहा गया था कि कमियों को दूर करने के बाद ड्रग विभाग को जानकारी दें लेकिन यहां ब्लड बैंक संचालित होने की पुष्टि हुई है। अब ब्लड बैंक के लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर लखनऊ को भेजी जा रही है। यहां पैथोलॉजी का भी काम होता है इसलिए पूरे ब्लड बैंक को सील नहीं किया जा सकता।