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संजीत हत्याकांड: पूछताछ के लिए बर्रा थाने पहुंची सीबीआई की टीम

Fri, 22 Oct 2021 01:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 22 Oct 2021 01:46 PM IST
सार

संजीत अपहरण एवं हत्याकांड की जांच सीबीआई के पास पहुंचने के बाद परिजनों में न्याय की आस जगी है। बता दें कि संजीत की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। वहीं पुलिस संजीत के शव को आजतक खोज नहीं कर सकी है।

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Sanjeet murder case: CBI team reached Barra police station
बर्रा थाने पहुंची सीबीआई की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के चर्चित संजीत अपहरण एवं हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम शुक्रवार दोपहर बर्रा थाने पहुंची। सीबीआई के डिप्टी एसपी की अगुवाई में पहुंची टीम ने बर्रा थाने के इंस्पेक्टर अजय सेठ से इस केस के संबंध में सवाल जवाब किए। पिछले डेढ़ घंटे से सीबीआई की टीम थाने में मौजूद है। 

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क्या है पूरा मामला 
22 जून 2020 की रात संजीत का अपहरण हुआ था। दूसरे दिन परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में गुमशुदगी अपहरण में तरमीम कर दी गई थी। 29 जून 2020 को पहली बार अपहर्ताओं ने संजीत के परिजनों को फोन कर तीस लाख की फिरौती मांगी थी। इस दिन से लेकर 13 जुलाई तक जब पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए नाकामी का जाल बिछाया था तब तक लगातार वह फोन नंबर एक्टिव था।
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अपहर्ता लगातार संजीत के परिजनों को फोन कर फिरौती मांगकर धमका रहे थे लेकिन सर्विलांस की टीम ने उस नंबर को ट्रेस नहीं किया था। इसको लेकर वारदात के वक्त संजीत के परिजनों ने सवाल उठाए थे। अगर सर्विलांस टीम सक्रिय होकर नंबर ट्रेस कर लेती तो आसानी से पुलिस आरोपियों तक पहुंच जाती। अब जब सीबीआई मामले की तफ्तीश करेगी तो सभी नंबरों की सीडीआर अपनी जांच में शामिल करेगी। सर्विलांस टीम ने नंबर एक्टिव होने के बावजूद ट्रेस क्यों नहीं किया था इसका जवाब भी सीबीआई तलाश करेगी।

पुलिस ने अपहरण होने के ठीक एक महीने बाद वारदात का खुलासा किया था। जबकि बदमाशों ने छठवें दिन ही कॉल कर फिरौती मांगी थी। अगर उसी दौरान सभी सक्रिय होकर बदमाशों को पकड़ लेती तो शायद संजीत का शव बरामद हो जाता। बारिश का वक्त था और एक महीना बीत जाने की वजह से नदी से शव बरामद नहीं हो सका। 

जब मामले ने तूल पकड़ा था तो सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पुलिस पहुंची थी। इसमें वह कॉल भी थी जो 22 जून की शाम संजीत को उसके दोस्त कुलदीप ने की थी। यानी पुलिस के सामने लीड थी लेकिन तत्कालीन बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत राय ने गुमशुदगी दर्ज करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की थी।
 
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