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GST ‘संवाद’: रिटर्न-पोर्टल के फेर में फंसे हैं व्यापारी, कर विशेषज्ञों ने यहां बयां की हकीकत
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 31 Oct 2017 07:19 AM IST
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जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
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जीएसटी को लागू हुए चार महीने बीत चुके हैं लेकिन आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। व्यापारी रिटर्न और पोर्टल के फेर में फंसे हैं। अधिकारी समस्याओं के समाधान का प्रयास तो कर रहे हैं लेकिन उसका व्यापक असर नहीं दिख रहा। आखिर कैसे सब कुछ पटरी पर आए? कितने और दिन हालात ऐसे ही रहेंगे। इन्हीं मुद्दों पर सोमवार को कानपुर, फजलगंज स्थित अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
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सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों ने गंभीरता से सुना
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
कानपुर शहर के प्रमुख व्यापारी संगठनों की वर्तमान समस्याओं को स्टेट जीएसटी और सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों ने गंभीरता से सुना। दो समस्याओं को दो वर्गों में बांटा। एक वे समस्याएं जो केंद्र सरकार या जीएसटी काउंसिल स्तर की हैं और दूसरी वे जो अधिकारियों के प्रयास से सुलझ सकती हैं। तय हुआ कि जीएसटी काउंसिल के स्तर वाली समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों की ओर एक रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी। स्थानीय स्तर पर हल होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए हर वर्ग के व्यापारियों का एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया जाएगा। उसमें व्यापारी अपनी समस्याएं भेज सकेंगे साथ ही व्यापारी और अधिकारी एक-दूसरे को समाधान सुझा सकेंगे। इसके अलावा उसी ग्रुप में व्यापारियों को नई सूचनाओं से अपडेट किया जाएगा।
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पोर्टल की गड़बड़ी सबसे बड़ी समस्या
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
जीएसटी पोर्टल का ठीक से काम न करना सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आया। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी का पोर्टल वैट के पोर्टल से भी गया गुजरा है। अपलोड कुछ किया जाता है और दिखता कुछ है। इसका समाधान भी स्थानीय अधिकारियों के स्तर पर संभव नहीं है। स्टेट जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर विवेकानंद शुक्ल ने कहाकि वे खुद कई बार इसकी लिखित शिकायत कर चुके हैं। पोर्टल की समस्या हल होते ही जीएसटी की आधी समस्याएं कम हो जाएंगी। जीएसटी पोर्टल बनाने वाली एजेंसी मनमाने तरीके से काम कर रही है। व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि पोर्टल बनाने वाली एजेंसी इंफोसिस और विभागीय अधिकारियों के बीच आपसी सामन्जस्य स्थापित हो ताकि स्थानीय स्तर की समस्याओं का हल हो सके।
सूचनाओं को साझा करें अधिकारी
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
‘संवाद’ कार्यक्रम में व्यापारियों ने पक्ष रखा कि विभागीय अधिकारियों की ओर से उन्हें समय पर सूचनाएं नहीं मिलतीं। जीएसटी लागू होने के बाद भी अभी तक कोई ऐसा मंच नहीं बना जिसके जरिये अधिकारी सभी व्यापार संगठनों से संवाद कायम कर सकें। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी लागू होने से अब तक विभागीय अधिकारियों और व्यापारी संगठनों के बीच जितनी भी मीटिंग हुई हैं उसकी सूचना व्यापारियों को दी जाए कि कितनी समस्याओं का समाधान किया जा चुका है। कितनी समस्याएं जीएसटी काउंसिल को भेजी गईं हैं ताकि व्यापारी यह जान सकें उनकी फलां बात को विभाग ने गंभीरता से लिया। व्यापारियों ने मांग की कि जीएसटी व्यवस्था के पटरी पर आने तक व्यापारियों के साथ नियमित बैठक हो। अधिकारी हर वर्ग के व्यापारियों का ग्रुप बनाएं और उसकी समस्याओं का निराकरण कराएं।
व्यापार संगठन भी निभाएं जिम्मेदारी
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
जीएसटी का लाभ पब्लिक को न मिलने की बात पर स्टेट और सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों ने व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील। कहा कि जिस तरह से विभागीय अधिकारी समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर हैं उसी तरह व्यापार संगठन भी जीएसटी लागू करवाने के प्रति गंभीर हों। जिन व्यापारियों ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करवा लिया है वे अपने प्रतिष्ठान के बाहर सूचना पट पर जीएसटी नंबर लिखवाएं। रजिस्ट्रेशन करवा चुके व्यापारी जीएसटी आधारित बिल काटें। इस प्रक्रिया से जीएसटी लागू होने की दिशा में कदम आगे बढे़गा, लेकिन जिम्मेदार व्यापार संगठन ही ऐसा नहीं कर रहे हैं।
इन अधिकारियों ने की शिरकत
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
राज्य वस्तु एवं सेवाकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर विवेकानंद शुक्ल, डिप्टी कमिश्नर अमित पाठक व डिप्टी कमिश्नर योगेश विजय, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर व जीएसटी के नोडल अफसर चंचल कुमार तिवारी, सुपरिंटेंडेंट कामेश बाजपेई व विवेक गुप्ता।
कर विशेषज्ञों ने बयां की हकीकत
जीएसटी पर ‘संवाद’ कार्यक्रम
‘संवाद’ कार्यक्रम के दौरान कर विशेषज्ञ सीए विवेक खन्ना एवं एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता ने अधिकारियों और व्यापारियों के पक्षों को सुनने के बाद जीएसटी के हालात की हकीकत बयां की। व्यवस्था की पेचीदगियों को मंच के सामने रखा और समाधान के सुझाव दिए। अधिकारियों और व्यापारियों के दावे और वादों की गंभीरता परखी।