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शराब कांड: सरकारी ठेके की शराब का क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर चला रहे थे मौत का धंधा, ऐसे हुआ खुलासा
Wed, 15 Apr 2020 05:00 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 15 Apr 2020 05:00 PM IST
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सजेती शराब कांड
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में सजेती के मवई भच्छन गांव में हुए शराबकांड में पुलिस और आबकारी विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी मिलावटी शराब की बोतलों पर क्यूआर कोड लगाकर उसको असली की तरह बना देते थे। जिससे वह असानी से पकड़े न जाएं। ये क्यूआर कोड सरकारी ठेके पर आने वाली शराब की बोतलों से कॉपी किया जाता था।
पुलिस ने काफी संख्या में क्यूआर कोड भी बरामद किया है। गांव में रविवार को जहरीली शराब पीने से ट्रक चालक अनूप सचान (30) और स्वास्थ्यकर्मी अंकित सचान(32) की मौत हो गई थी। अन्य 12 लोग बीमार हो गए थे।
सीओ घाटमपुर रवि कुमार सिंह ने बताया कि जेल भेजा गया आरोपी शिवमंगल के शराब ठेके हैं, लिहाजा वो उन शराब की बोतलों से क्यूआर कोड निकाल लेता था। उसके बाद उसकी कॉपी करवाकर प्रिंट आउट निकलवाता था। इधर जब ग्राम प्रधान रणधीर सिंह शराब बनाता था तो उस शराब को बोतलों में भरकर क्यूआर कोड चस्पा करता था।
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क्यूआर कोड लगने से गांव कस्बे में आसानी से उसकी सप्लाई जाती थी। बरामद माल में भी क्यूआर कोड लगा मिला है। इसकी जांच की गई तो पता चला कि जो स्टॉक शिवमंगल के ठेके पर आया था, क्यूआर कोड उसी का इस्तेमाल हुआ है।
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पुलिस ने काफी संख्या में क्यूआर कोड भी बरामद किया है। गांव में रविवार को जहरीली शराब पीने से ट्रक चालक अनूप सचान (30) और स्वास्थ्यकर्मी अंकित सचान(32) की मौत हो गई थी। अन्य 12 लोग बीमार हो गए थे।
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सीओ घाटमपुर रवि कुमार सिंह ने बताया कि जेल भेजा गया आरोपी शिवमंगल के शराब ठेके हैं, लिहाजा वो उन शराब की बोतलों से क्यूआर कोड निकाल लेता था। उसके बाद उसकी कॉपी करवाकर प्रिंट आउट निकलवाता था। इधर जब ग्राम प्रधान रणधीर सिंह शराब बनाता था तो उस शराब को बोतलों में भरकर क्यूआर कोड चस्पा करता था।
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क्यूआर कोड लगने से गांव कस्बे में आसानी से उसकी सप्लाई जाती थी। बरामद माल में भी क्यूआर कोड लगा मिला है। इसकी जांच की गई तो पता चला कि जो स्टॉक शिवमंगल के ठेके पर आया था, क्यूआर कोड उसी का इस्तेमाल हुआ है।
इसलिए लगाते थे क्यूआर कोड
दरअसल शासन ने तीन साल पहले क्यूआर कोड की व्यवस्था शुरू की थी। क्यूआर कोड स्कैन करने से पता चलता है कि शराब कहां बनी, किस ब्रांड की है और कहां को भेजी गई है। आबकारी के अधिकारी भी अक्सर क्यूआर कोड के आधार पर ही जांच करते हैं। अमूमन जिस बोतल पर क्यूआर कोड लगा होता है, उनको वह असली ही मान लेते हैं। मौत का कारोबार करने वाले इसी का फायदा उठाते थे। क्यूआर कोड लगा होने से कोई शक नहीं करता था। ये पूरा आइडिया शिवमंगल का था।
घाटमपुर के सपा के पूर्व प्रधान पर कसा शिकंजा
पुलिस ने मामले में अब तक मढ़ा गांव के पूर्व प्रधान जगत सिंह, उनके भतीजे शिवमंगल, लाल सिंह, मवई भच्छन के ग्राम प्रधान रणधीर सिंह, उनके भतीजे दिग्विजय और ओमवीर को आरोपी बनाया है। शिवमंगल, दिग्विजय व ओमवीर जेल में हैं। एसपी ग्रामीण ने बताया कि घाटमपुर के एक गांव के पूर्व प्रधान की भूमिका सामने आ रही है। इनसे पूछताछ की जा रही है। सुबूत मिलने पर कार्रवाई होगी। ये सपा से प्रधान रहा है।
दरअसल शासन ने तीन साल पहले क्यूआर कोड की व्यवस्था शुरू की थी। क्यूआर कोड स्कैन करने से पता चलता है कि शराब कहां बनी, किस ब्रांड की है और कहां को भेजी गई है। आबकारी के अधिकारी भी अक्सर क्यूआर कोड के आधार पर ही जांच करते हैं। अमूमन जिस बोतल पर क्यूआर कोड लगा होता है, उनको वह असली ही मान लेते हैं। मौत का कारोबार करने वाले इसी का फायदा उठाते थे। क्यूआर कोड लगा होने से कोई शक नहीं करता था। ये पूरा आइडिया शिवमंगल का था।
घाटमपुर के सपा के पूर्व प्रधान पर कसा शिकंजा
पुलिस ने मामले में अब तक मढ़ा गांव के पूर्व प्रधान जगत सिंह, उनके भतीजे शिवमंगल, लाल सिंह, मवई भच्छन के ग्राम प्रधान रणधीर सिंह, उनके भतीजे दिग्विजय और ओमवीर को आरोपी बनाया है। शिवमंगल, दिग्विजय व ओमवीर जेल में हैं। एसपी ग्रामीण ने बताया कि घाटमपुर के एक गांव के पूर्व प्रधान की भूमिका सामने आ रही है। इनसे पूछताछ की जा रही है। सुबूत मिलने पर कार्रवाई होगी। ये सपा से प्रधान रहा है।