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Kanpur News: किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी जिम्मेदारी लेता था रोहित
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कानपुर। किडनी ट्रांसप्लांट के पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी रोहित तिवारी लेता था। वह डोनर और रिसीवर को लाने, उनको ठहराने और सर्जरी करने वाली टीम को रकम पहुंचाता। इसके लिए मिलने वाली रकम का 50 से 60 फीसदी हिस्सा स्वयं रखता। यह जानकारी पुलिस को रोहित से पूछताछ में मिली। उसने राहुल और बिलग्राम के शिवम यादव का नाम भी कबूला है जिनकी तलाश की जा रही है।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक रोहित तिवारी से पूछताछ में पता चला कि उसकी 2016 तक डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली सिद्दीकी से जानपहचान हो गई थी। उनके सहयोग से एनसीआर के कुछ अस्पतालों में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट हुए। डॉ. वैभव की एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल से जान पहचान थी जिसकी वजह से रोहित और वैभव के बीच दोस्ती हो गई।
शिवम ने उसे कानपुर के नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट करने का न्योता दिया। कहा कि कुछ मरीजों को किडनी की आवश्यकता है। वह मुंह मांगी रकम देने के लिए तैयार हैं। उनसे बातचीत कर सर्जरी की जा सकती है। रोहित तिवारी ने ट्रांसप्लांट की जिम्मेदारी ली। 2023 में विवेल नाम के नर्सिंगहोम में ट्रांसप्लांट की योजना बनी लेकिन किसी कारण से सर्जरी नहीं हो सकी। उसके बाद कल्याणपुर के आंबेडकरपुरम क्षेत्र के आरोही हॉस्पिटल में पहला ट्रांसप्लांट हुआ। यहां के बाद मेडिलाइफ हॉस्पिटल और आहूजा हॉस्पिटल में आठ ऑपरेशन किए गए।
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हर ट्रांसप्लांट में डॉक्टरों की टीम लाने, सर्जरी करने और दवाएं लाने की जिम्मेदारी रोहित की रहती थी। रोहित की मुलाकात राहुल नाम के युवक ने अली से कराई थी। राहुल, अली को सर्जरी का मास्टरमाइंड बताता था। ट्रांसप्लांट करने में अली का नाम सामने आ रहा है। पुलिस को जांच पता चला कि वह ओटी मैनेजर है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। ट्रांसप्लांट के लिए दवाएं और उपकरण रखने की जिम्मेदारी शिवम यादव की थी। यह भी बिलग्राम का रहने वाला है और रोहित के बचपन का दोस्त है। पुलिस राहुल और शिवम यादव की तलाश कर रही है। रोहित तिवारी हर ऑपरेशन के 50 से 60 फीसदी रकम खुद रखा करता था। उसने पारुल वाले मामले में भी 25 लाख रुपये लिए थे।
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डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक रोहित तिवारी से पूछताछ में पता चला कि उसकी 2016 तक डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, मुदस्सर अली सिद्दीकी से जानपहचान हो गई थी। उनके सहयोग से एनसीआर के कुछ अस्पतालों में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट हुए। डॉ. वैभव की एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल से जान पहचान थी जिसकी वजह से रोहित और वैभव के बीच दोस्ती हो गई।
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शिवम ने उसे कानपुर के नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट करने का न्योता दिया। कहा कि कुछ मरीजों को किडनी की आवश्यकता है। वह मुंह मांगी रकम देने के लिए तैयार हैं। उनसे बातचीत कर सर्जरी की जा सकती है। रोहित तिवारी ने ट्रांसप्लांट की जिम्मेदारी ली। 2023 में विवेल नाम के नर्सिंगहोम में ट्रांसप्लांट की योजना बनी लेकिन किसी कारण से सर्जरी नहीं हो सकी। उसके बाद कल्याणपुर के आंबेडकरपुरम क्षेत्र के आरोही हॉस्पिटल में पहला ट्रांसप्लांट हुआ। यहां के बाद मेडिलाइफ हॉस्पिटल और आहूजा हॉस्पिटल में आठ ऑपरेशन किए गए।
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हर ट्रांसप्लांट में डॉक्टरों की टीम लाने, सर्जरी करने और दवाएं लाने की जिम्मेदारी रोहित की रहती थी। रोहित की मुलाकात राहुल नाम के युवक ने अली से कराई थी। राहुल, अली को सर्जरी का मास्टरमाइंड बताता था। ट्रांसप्लांट करने में अली का नाम सामने आ रहा है। पुलिस को जांच पता चला कि वह ओटी मैनेजर है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। ट्रांसप्लांट के लिए दवाएं और उपकरण रखने की जिम्मेदारी शिवम यादव की थी। यह भी बिलग्राम का रहने वाला है और रोहित के बचपन का दोस्त है। पुलिस राहुल और शिवम यादव की तलाश कर रही है। रोहित तिवारी हर ऑपरेशन के 50 से 60 फीसदी रकम खुद रखा करता था। उसने पारुल वाले मामले में भी 25 लाख रुपये लिए थे।