कानपुर: 2830 अपात्रों को दे डाले 7.26 करोड़ रुपये, शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में हुआ फर्जीवाड़ा
51 अफसरों ने दोनों योजनाओं के लाभार्थियों के आवेदन पत्रों का सत्यापन कर जो जांच रिपोर्ट तैयार की है, उसमें इस फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार ने फरवरी में दोनों योजनाओं की रैंडम जांच की थी तो शादी अनुदान में तीन लाभार्थी और पारिवारिक लाभ में पांच में से तीन लाभार्थी फर्जी मिले थे।
इसके बाद सीडीओ ने 51 अफसरों को वर्ष 2019-20, 2020-21 में दोनों योजनाओं के लाभार्थियों के आवेदन पत्रों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। जांच अधिकारी परियोजना निदेशक, डीआरडीए (डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी) केके पांडेय ने बताया कि सभी अफसरों ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। करीब 60 फीसदी लाभार्थी अपात्र, फर्जी मिले हैं।
शादी अनुदान योजना में 1230 अपात्र
शादी अनुदान योजना के कुल 2230 लाभार्थियों में सिर्फ 1000 पात्र मिले हैं। 1230 अपात्र मिले हैं। इनमें से दो सौ लोग गरीबी रेखा से ऊपर वाले हैं। 800 लोगों के पते गलत मिले। 25 लाभार्थी ऐसे हैं जिनकी शादी ही नहीं हुई। नौ लोग पहले ही शादी कर चुके हैं। 35 लाभार्थियों ने अभिलेख ही नहीं दिखाए। योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को विवाह के लिए 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।
पारिवारिक लाभ योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के मुखिया के निधन पर परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। निधन के एक साल के अंदर आवेदन करना पड़ता है। योजना के कुल 4766 लाभार्थियों में 1600 लाभार्थी फर्जी मिले हैं। 1200 लोगों का पता ही नहीं लिखा मिला। गरीबी रेखा से ऊपर वाले 200 लाभार्थी मिले। पांच की मृत्यु को एक साल से अधिक समय हो गया था। 50 लोग मृत्यु प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज नहीं दिखा सके हैं।
200 लाभार्थियों का कोई रिकॉर्ड नहीं
सूत्रों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में शादी अनुदान के 90 और पारिवारिक लाभ योजना के 110 लाभार्थी ऐसे मिले हैं जिनका कोई रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि बगैर आवेदन दो सौ लोगों का पैसा किसको दिया गया है।
अभी तक पांच पर ही कार्रवाई
शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना की रैंडम जांच में फर्जीवाड़ा मिलने के बाद अभी तक प्रशासन ने केवल तीन लेखवालों, एक कानून गो और एक पटल सहायिका को ही निलंबित किया है। बता दें कि योजना में आवेदन करने के बाद लाभार्थी के आवेदन पत्रों की जांच लेखपाल और कानूनगो करते हैं। ये जांच रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेजते हैं। वहां पर काम कर रहे बाबू तय करते हैं कि किसको अनुदान देना है या नहीं। आवेदन पत्र पर पटल सहायक हस्ताक्षर करता है, इसके बाद ही समाज कल्याण विभाग लाभार्थी के खाते में सीधे पैसा भेज देता है। लेकिन अब तक विभाग के अधिकारियों और क्लर्कों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
फाइनल रिपोर्ट एडीएम फाइनेंस वीरेंद्र पांडेय अभी मुझे सौंपेंगे। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर पर कार्रवाई तय होगी।
डॉ. महेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी