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कार्डियोलाॅजी इंस्टीट्यूट के अध्ययन में खुलासा: कोरोना काल के बाद 30 से 50 आयु वर्ग के दिल के रोगी हुए दोगुना

Thu, 26 Sep 2024 05:17 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 26 Sep 2024 05:17 PM IST
सार

Kanpur News: कोरोना काल के पहले 30 से 50 आयु वर्ग के दिल के रोगी 15 फीसदी ही आते थे। अब यह ग्राफ बढ़कर 30 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है।

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Heart patients in the age group of 30 to 50 doubled after the Corona period
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अब जवान लोगों के दिल में खून का थक्का अधिक जमने लगा है। कोरोना काल के बाद कार्डियोलॉजी में आने वाले हृदय रोगियों के आयु वर्ग में फर्क आया है। रोगियों की संख्या में बढ़त तो रूटीन जैसी ही है, लेकिन इनका आयु वर्ग बदला है। रोगियों की स्थिति का आकलन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से लोगों की नसें संकरी हो गईं और थक्का अधिक जमने लगा। 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग के रोगियों की संख्या पहले 10 से 15 फीसदी होती थी, लेकिन अब 30 से 40 फीसदी हो गई है।
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एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में हर साल हृदय रोगियों की संख्या पांच से 10 हजार के बीच बढ़ती है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि पहले 55 वर्ष से अधिक आयु के हृदय रोगी अधिक आते रहे हैं। कोरोना काल के बाद अब 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग के रोगी अधिक हो गए हैं। इनकी संख्या 10-15 फीसदी से बढ़कर 30 से 40 फीसदी हो गई है।
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कोरोना ने संकरी कर दी नसें
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद लोगों की नसें प्रभावित हुई हैं। कोरोना ने नसों की पर्तें प्रभावित की हैं, जिससे ये संकरी हो गईं। इससे थक्का अधिक जमने लगा है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शर्मा ने बताया कि जिनकी आर्टरी में थक्का जमा है, वे सीने में दर्द, फेफड़ों में थक्का होने पर सांस फूलने की शिकायत लेकर आते हैं। इससे शरीर का ऑक्सीजन लेवल घटता है और हृदय प्रभावित हो जाता है। जो पुराने रोगी हैं, वे दवा खाते हैं और जांच कराते रहते हैं, जिससे स्थिति नियंत्रण में रहती है।

 
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कोरोना काल में खानपान में हुई लापरवाही, स्ट्रेस भी बढ़ा
पांच सालों के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2020-21 के पहले और बाद में ओपीडी और भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या में रूटीन इजाफा हुआ है। इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार वर्मा का कहना है कि कोरोना काल के बाद जो रोगी आए, उनकी स्थिति का आकलन किया गया। कोरोना काल में लाइफ स्टाइल, खानपान में अधिक लापरवाही हुई और स्ट्रेस भी बढ़ा। लोगों ने व्यायाम में दिलचस्पी नहीं ली। इसके साथ ही वायरल संक्रमण का दुष्प्रभाव हुआ। उन्होंने बताया कि ओपीडी में औसत पांच से 10 हजार के बीच साल में रोगी बढ़ते हैं। यही औसत कोरोना काल के पहले था और उसके बाद भी वही रहा है।

 
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हृदय रोगियों के आंकड़े
वर्ष 2019-20ः ओपीडी-280754, भर्ती रोगी-18680, बड़े ऑपरेशन-12148, छोटे ऑपरेशन- 421
वर्ष 2020-21ः ओपीडी-142860, भर्ती रोगी-9734, बड़े ऑपरेशन-6146, छोटे ऑपरेशन- 376
वर्ष 2021-22ः ओपीडी-245785, भर्ती रोगी-16332, बड़े ऑपरेशन-11737, छोटे ऑपरेशन- 499
वर्ष 2022-23ः ओपीडी-308722, भर्ती रोगी-18815, बड़े ऑपरेशन-16730, छोटे ऑपरेशन- 724
वर्ष 2023-24ः ओपीडी-347505, भर्ती रोगी-20391, बड़े ऑपरेशन-17800, छोटे ऑपरेशन- 1087
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