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Kanpur News: मनरेगा से फर्जी भुगतान पर दो सचिवों और तकनीकी सहायक पर रिपोर्ट
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कानपुर। सरसौल ब्लाॅक के निवादा बौसर में तीन साल में मनरेगा मजदूरी का फर्जी तरीके से एक लाख रुपये का भुगतान करने के मामले में दो सचिवों और एक तकनीकी सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो गई है। जांच में मिले दोषी दोनों सचिव, प्रधान और तकनीकी सहायक से धनराशि की वसूली होगी। इसके साथ ही एपीओ को सेवा समाप्ति का नोटिस उपायुक्त मनरेगा ने जारी किया है।
सरसौल ब्लाॅक के निवादा बौसर के रहने वाले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने ग्राम प्रधान समरजीत सिंह के खिलाफ मनरेगा में गलत तरीके से भुगतान कराने की शिकायत सीडीओ दीक्षा जैन से की थी। आरोप लगाया था कि मनरेगा मजदूरों की आईडी से ग्रामीणों के खाते में वर्ष 2019 से 2022 तक गलत तरीके से भुगतान किया गया। सीडीओ ने परियोजना निदेशक पीएन दीक्षित से जांच कराई तो पता चला कि पंचायत सचिव हरिकृष्ण पाल ने वर्ष 2019 से 2021 तक और पंचायत सचिव सुरेंद्र गौतम ने तकनीकी सहायक प्रमेश यादव की मदद से वर्ष 2021 से 2022 तक करीब 99,912 रुपये मजदूरों के खाते में न भेजकर ग्रामीणों के खातों में भेज दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कार्रवाई की निर्देश दिए। बीडीओ निशांत राय ने बताया कि बुधवार को दोनों सचिव और एक तकनीकी सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। अब विभागीय कार्रवाई डीपीआरओ स्तर पर होनी है। एपीओ को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
जांच में पंचायती राज विभाग के दो सचिव दोषी पाए गए थे। इस पर जिलाधिकारी ने सचिवों पर विभागीय कार्रवाई करने के साथ-साथ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी डीपीआरओ मनोज कुमार ने दोनों सचिवों पर विभागीय कार्रवाई नहीं की। यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
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सरसौल ब्लाॅक के निवादा बौसर के रहने वाले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने ग्राम प्रधान समरजीत सिंह के खिलाफ मनरेगा में गलत तरीके से भुगतान कराने की शिकायत सीडीओ दीक्षा जैन से की थी। आरोप लगाया था कि मनरेगा मजदूरों की आईडी से ग्रामीणों के खाते में वर्ष 2019 से 2022 तक गलत तरीके से भुगतान किया गया। सीडीओ ने परियोजना निदेशक पीएन दीक्षित से जांच कराई तो पता चला कि पंचायत सचिव हरिकृष्ण पाल ने वर्ष 2019 से 2021 तक और पंचायत सचिव सुरेंद्र गौतम ने तकनीकी सहायक प्रमेश यादव की मदद से वर्ष 2021 से 2022 तक करीब 99,912 रुपये मजदूरों के खाते में न भेजकर ग्रामीणों के खातों में भेज दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कार्रवाई की निर्देश दिए। बीडीओ निशांत राय ने बताया कि बुधवार को दोनों सचिव और एक तकनीकी सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। अब विभागीय कार्रवाई डीपीआरओ स्तर पर होनी है। एपीओ को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
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जांच में पंचायती राज विभाग के दो सचिव दोषी पाए गए थे। इस पर जिलाधिकारी ने सचिवों पर विभागीय कार्रवाई करने के साथ-साथ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी डीपीआरओ मनोज कुमार ने दोनों सचिवों पर विभागीय कार्रवाई नहीं की। यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
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