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धर्मांतरण मामला: दंगे भड़काने में शामिल तीन मौलाना भी एटीएस के रडार पर, आदित्य को इन्होंने दी थी इस्लाम की जानकारी
Sat, 26 Jun 2021 01:23 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 26 Jun 2021 01:23 PM IST
सार
21 दिसंबर को बाबूपुरवा में आगजनी तोड़फोड़ की घटना हुई थी। इस घटना में चार युवकों की मौत हुई थी। हिंसा को भड़काने में तीन मौलाना का नाम आया था। जिसमें एक अनवरगंज निवासी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में धर्मांतरण के मामले में तीन मौलाना भी एटीएस के रडार पर हैं। ये वहीं मौलाना हैं जिनपर सीएए व एनआरसी के विरोध में दंगे भड़काने का आरोप लगा था। पुलिस ने इन तीनों मौलानाओं को जेल भेजा था। फिलहाल तीनों जमानत पर बाहर हैं।
एटीएस को हिंसा के दौरान इनके पीएफआई से भी संबंध होने की जानकारी मिली थी। सीएए एनआरसी विरोध में 20 दिसंबर 2019 को यतीमखाना में हिंसा भड़की थी। 21 दिसंबर को बाबूपुरवा में आगजनी तोड़फोड़ की घटना हुई थी।
इस घटना में चार युवकों की मौत हुई थी। हिंसा को भड़काने में तीन मौलाना का नाम आया था। जिसमें एक अनवरगंज निवासी है। एटीएस को आदित्य उर्फ अब्दुल्ला ने अनवरगंज निवासी इसी मौलाना के बारे में बताया था। एटीएस का दावा है कि नोएडा जाने से पहले मौलाना आदित्य के संपर्क में आया था।
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उसी मौलाना ने आदित्य को इस्लाम के बारे में अहम जानकारियां दी। यही नहीं मौलाना आदित्य को अपने साथ हलीम मुस्लिम कॉलेज भी ले जाता था। मौलाना ने कई बार आदित्य से ज्योति मूक बधिर स्कूल में जाकर भी मुलाकात की थी। जानकारी के बाद एटीएस ने तीनों मौलाना को फिर से रडार पर लिया है।
फंड को लेकर जानकारी जुटा रही एटीएस
सीएए हिंसा के दौरान मौलानाओं ने हिंसा के लिए 1.30 करोड़ रुपये का फंड जुटाए जाने की बात कबूली थी। ऐसे में एटीएस को यह आशंका है कि कहीं इन्हीं मौलानाओं को धर्मांतरण के लिए फंड जुटाने की जिम्मेदारी तो नहीं सौंपी गई। मामले को लेकर एटीएस व अन्य जांच एजेंसियां जांच में जुटी हैं। फिलहाल तीनों मौलानाओं का नेटवर्क दोबारा खंगाला जा रहा है।
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एटीएस को हिंसा के दौरान इनके पीएफआई से भी संबंध होने की जानकारी मिली थी। सीएए एनआरसी विरोध में 20 दिसंबर 2019 को यतीमखाना में हिंसा भड़की थी। 21 दिसंबर को बाबूपुरवा में आगजनी तोड़फोड़ की घटना हुई थी।
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इस घटना में चार युवकों की मौत हुई थी। हिंसा को भड़काने में तीन मौलाना का नाम आया था। जिसमें एक अनवरगंज निवासी है। एटीएस को आदित्य उर्फ अब्दुल्ला ने अनवरगंज निवासी इसी मौलाना के बारे में बताया था। एटीएस का दावा है कि नोएडा जाने से पहले मौलाना आदित्य के संपर्क में आया था।
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उसी मौलाना ने आदित्य को इस्लाम के बारे में अहम जानकारियां दी। यही नहीं मौलाना आदित्य को अपने साथ हलीम मुस्लिम कॉलेज भी ले जाता था। मौलाना ने कई बार आदित्य से ज्योति मूक बधिर स्कूल में जाकर भी मुलाकात की थी। जानकारी के बाद एटीएस ने तीनों मौलाना को फिर से रडार पर लिया है।
फंड को लेकर जानकारी जुटा रही एटीएस
सीएए हिंसा के दौरान मौलानाओं ने हिंसा के लिए 1.30 करोड़ रुपये का फंड जुटाए जाने की बात कबूली थी। ऐसे में एटीएस को यह आशंका है कि कहीं इन्हीं मौलानाओं को धर्मांतरण के लिए फंड जुटाने की जिम्मेदारी तो नहीं सौंपी गई। मामले को लेकर एटीएस व अन्य जांच एजेंसियां जांच में जुटी हैं। फिलहाल तीनों मौलानाओं का नेटवर्क दोबारा खंगाला जा रहा है।