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Kanpur News: नागपंचमी पर 500 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, शिव आराधना का विशेष महत्व

Sat, 15 Aug 2026 01:11 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:11 AM IST
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Rare alignment occurs on Nag Panchami after 500 years; special significance attached to the worship of Lord Shiva.
कानपुर। इस बार नागपंचमी का पर्व धार्मिक आस्था के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास है। 17 अगस्त को सोमवार के दिन नागपंचमी पर रवि योग और सूर्य के राशि परिवर्तन का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा संयोग करीब 500 वर्षों बाद बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन नाग देवता के साथ भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और रुद्राभिषेक करने से सर्प दोष, कालसर्प दोष और जीवन की अन्य बाधाओं से राहत मिलती है।
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ज्योतिषाचार्य पीएन द्विवेदी ने बताया कि 16 अगस्त रविवार की रात 3:18 बजे सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त होकर पंचमी शुरू होगी। जो 17 अगस्त सोमवार की रात 3:38 बजे तक रहेगी। सोमवार के दिन नागपंचमी होने से शिव आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि गरुड़ पुराण, भविष्य पुराण और चरक संहिता जैसे ग्रंथों में नाग पूजा का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु की शैय्या नागराज से सुशोभित होती है जबकि नाग भगवान शिव के गले का आभूषण हैं। इसी कारण नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
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ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार कुंडली में सर्प दोष या कालसर्प दोष होने पर भगवान शिव के मंदिर में तीन धातुओं से बने सर्प का रुद्राभिषेक कराने और उसे शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा है। बाद में इसे जल में प्रवाहित करने की मान्यता है।
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ज्योतिषाचार्य पं. दीपक कुमार पांडेय ने बताया कि नागपंचमी पर सूर्य मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। राहु की महादशा में केतु की अंतरदशा अथवा सूर्य की महादशा में केतु की अंतरदशा चल रही हो तो रुद्राभिषेक को विशेष लाभकारी माना जाता है।




ज्योतिर्विद डॉ. प्रीती पवन तिवारी ने बताया कि अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए विभिन्न द्रव्यों से शिव अभिषेक की परंपरा है। बीमारी से राहत के लिए कुशा के जल, कार्य बाधा दूर करने के लिए गंगाजल, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस और अन्य मनोकामनाओं के लिए गाय के दूध से अभिषेक करने की मान्यता है। नाग देवता की पूजा से सर्प भय से रक्षा होने की भी धार्मिक मान्यता है।
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