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नवरात्र 2026: 150 साल पुराना काली मठिया मंदिर, 24 घंटे होते मां के दर्शन, 1971 में स्थापित हुई भव्य प्रतिमा

Mon, 19 Oct 2026 09:43 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Mon, 19 Oct 2026 09:43 PM IST
सार

गाय के दूध गिराने वाली जगह खोदाई करने पर मां काली की पिंडी मिली थी। 1971 में भव्य प्रतिमा स्थापित हुई।

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Navratri 2026: The 150-year-old Kali Mathiya temple offers 24-hour access for darshan of the Goddess
काली मठिया मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शास्त्रीनगर स्थित काली मठिया मंदिर आस्था, विश्वास और परंपरा का प्रमुख केंद्र है। करीब 150 साल पुराने इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां कभी एक टीला हुआ करता था। टीले पर नीम और पीपल के पेड़ थे, जबकि पीछे तालाब था। यहां जानवर बैठा करते थे। इनमें एक गाय प्रतिदिन एक ही स्थान पर अपना दूध गिरा देती थी। लोगों को आश्चर्य हुआ तो उस जगह की खोदाई कराई गई। खोदाई में मां काली की पिंडी निकली। इसके बाद श्रद्धालुओं ने वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। छोटे मठ में पिंडी विराजमान होने के कारण मंदिर का नाम काली मठिया पड़ गया।
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मंदिर के आसपास के क्षेत्र को भी बाद में मतैय्या पुरवा के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर में वर्ष 1971 में जगद्गुरु शंकराचार्य शारदानंद सरस्वती ने जयपुर से लाई गई मां काली की बड़ी प्रतिमा विधि-विधान से स्थापित कराई। मां की प्राचीन छोटी पिंडी भी मंदिर में विराजमान है। इसी वर्ष से मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्वलित हो रही है। मंदिर की खास विशेषता है कि यहां श्रद्धालु 24 घंटे मां के दर्शन कर सकते हैं। रात में मंदिर का चैनल बंद होने के बाद भी भक्त बाहर से ही मां के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं।
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मंदिर में नवरात्र के पहले दिन से ही भक्तों का आना शुरू हो जाता है। षष्ठी से नवमी तक हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दिवाली पर रातभर पूजन के बाद सुबह श्रद्धालुओं को प्रसाद और खजाना वितरित किया जाता है। चैत्र नवरात्र के समापन के बाद पहले रविवार को विशाल भंडारा होता है। 18 फरवरी को मां का स्थापना दिवस भी धूमधाम से मनाया जाता है। श्रद्धालु चुनरी चढ़ाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर भंडारा कराते हैं। इसमें चना, हलवा, पूड़ी और खीर का प्रसाद बांटा जाता है।

 

2010 के बाद से नहीं हुआ कमेटी का चुनाव
काली देवी मंदिर विकास समिति के महामंत्री प्रदीप सिंह ने बताया कि समिति का गठन वर्ष 2010 में हुआ था। तब से कमेटी का चुनाव नहीं हुआ है। पांच सदस्यों की टीम मंदिर की देखरेख और रखरखाव करती है। उनके मुताबिक यह शहर का पहला ऐसा मंदिर है जहां मां काली के दर्शन 24 घंटे होते हैं। श्रद्धालु मंदिर के ऊपर न चढ़कर सड़क से ही हाथ जोड़कर मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
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