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सिद्धपीठ श्री चंडिका देवी मंदिर: 83 साल से कमल के पत्ते पर प्रज्ज्वलित है मां चंडिका की अखंड ज्योति

Mon, 19 Oct 2026 01:27 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Mon, 19 Oct 2026 01:27 PM IST
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'Akhand Jyoti'  of Goddess Chandika has been burning on a lotus leaf for 83 years
श्री चंडिका देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

देव नगर स्थित सिद्धपीठ श्री चंडिका देवी मंदिर करीब डेढ़ सौ साल से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां नीम के पेड़ के नीचे मां का पिंड स्वरूप मिला था। मंदिर की विशेषता 83 वर्षों से प्रज्वलित अखंड ज्योति है। नवरात्र में प्रतिदिन मां को सवा मन हलवे का भोग लगाया जाता है, जबकि अष्टमी पर 108 नारियल अर्पित किए जाते हैं। रात 8:45 बजे होने वाली आरती में मां की टेढ़ी गर्दन कुछ क्षण के लिए सीधी दिखाई देने की मान्यता भी है।

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मान्यता के अनुसार, पहले यहां घना जंगल और नीम के अनेक पेड़ थे। इसी दौरान पंडित धारा लाल शर्मा को स्वप्न में मां ने अपने यहां विराजमान होने का संकेत दिया। इसके बाद एक नीम के पेड़ के नीचे मां का पिंड स्वरूप मिला, जिसे मंदिर में स्थापित किया गया। उस समय इस स्थान को बसो पुरवा के नाम से जाना जाता था। यहां एक कहावत भी प्रचलित थी... भारत उत्तर गंग तट, बृहद कानपुर नाम और बसो पुरवा मध्य में श्री चंडिका देवी धाम।
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'Akhand Jyoti'  of Goddess Chandika has been burning on a lotus leaf for 83 years
श्री चंडिका देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मान्यता के अनुसार, संवत 2001 में वसंत पंचमी पर पंडित हर सहाय शर्मा ने कमल के पत्ते पर फूल की बाती से अखंड ज्योति प्रज्वलित की थी, जो आज भी जल रही है। मंदिर के गर्भगृह में लगे शीशे में मां चंडिका देवी की प्रतिमा दिखाई देती है। श्रद्धालु चुनरी, पुष्प, नारियल और प्रसाद चढ़ाकर मनोकामनाएं मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर घंटा चढ़ाते हैं। कुछ भक्त नवरात्र में देशी घी की अखंड ज्योति भी जलवाते हैं। मां चंडिका के बाईं ओर श्री गणेश और दाईं ओर भैरव जी विराजमान हैं।

'Akhand Jyoti'  of Goddess Chandika has been burning on a lotus leaf for 83 years
श्री चंडिका देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी बल्लभ प्रसाद शर्मा ने बताया कि नवरात्र की अष्टमी पर मां के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कुछ साधक रात्रि आरती के दौरान मां के सीधे रूप के दर्शन होने की मान्यता रखते हैं। उन्होंने बताया कि सिद्धपीठ के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है और वे मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं।
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