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UP: जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- संविधान के प्रति गलत सोच वालों को देश में रहने का हक नहीं

Sat, 22 Mar 2025 10:31 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 22 Mar 2025 10:31 PM IST
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Rambhadracharya ji said Those who have wrong thinking towards constitution have no right to live in country
जगद्गुरु रामभद्राचार्य - फोटो : अमर उजाला
जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय में भारतीय न्याय संहिता समाविष्ट राष्ट्र निर्माण संकल्प की सकारात्मक अवधारणा विषय पर दो दिवसीय गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। शनिवार को पहले दिन गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि तुलसी पीठ के जगद्गुरु रामभद्राचार्य व विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने किया। यह कार्यक्रम संविधान एवं संसदीय अध्ययन संस्थान लखनऊ प्रदेश क्षेत्रीय शाखा विधान भवन लखनऊ की ओर से किया जा रहा है।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि संविधान में जनता हित के लिए अभी और संशोधन की जरूरत है। इसमें अपराध करने वालों को दंड देने की व्यवस्था की जाए। भारतीय संविधान के प्रति गलत सोचने वालों को देश में रहने का कोई हक नहीं है। संविधान में तीन प्रमुख तत्व रखना चाहिए। जिसमें सदाचारियों के हित के लिए कार्य, दमनकारियों को कड़ी सजा व स्वतंत्रता प्रमुख रूप से होनी चाहिए। कहा कि जब रावण माता सीता का अपहरण करके ले जा रहा था। उस समय जटायु ने सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण की चिंता किए बिना रावण से भिड़ गया था। जिसको भगवान श्रीराम ने गले से लगाया था। वही महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि द्रोपदी के चीरहरण के समय भीष्म पितामह चुप रहे। जिन्हें बाण की शैय्या पर सोना पड़ा। कहा कि सबसे बड़ा न्याय है अन्याय को नहीं सहना।
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कहा कि हम भारतीय संसद चला रहे हैं। धर्म चक्र के परिवर्तन और धर्म व्याख्या न्याय रक्षा की व्यवस्था का नाम है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मनु स्मृति संहिता की जमकर तारीफ की। कहा कि मनु स्मृति में सभी बातें राष्ट्र निर्माण के लिए ही लिखी गई थी। जिसने उसे ठीक से नहीं पढ़ा, वही इसका विरोध कर रहा है। कहा कि अपराधी को किसी भी तरह से क्षमा नहीं करना चाहिए।
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विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय समाज और न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। जिस समाज में न्याय व्यवस्था मजबूत होती है, वह समाज उतना ही प्रगतिशील और विकसित होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 150 साल से अधिक पुराने भारतीय दंड संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर लागू किए गए नए ऐतिहासिक कानून से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को गुलामी के मानसिकता से मुक्ति मिली है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सभी स्टेट होल्डर के साथ नए कानून के हर पहलू पर चार वर्षों तक 150 से अधिक मीटिंग में विस्तार से चर्चा करने के बाद बीएनएस को लाया गया है। आजादी के बाद से अब तक किसी भी कानून पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है। नए आपराधिक कानून में दंड की जगह न्याय को प्राथमिकता दी गई है।

सभापति विधान परिषद सहित अन्य लोगों ने प्रमुख सचिव द्वारा लिखित प्राचीन भारत की न्यायिक व्यवस्था एवं महाभारत नामक पुस्तक का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव डा राजेश सिंह, उत्तराधिकारी रामचंद्र, कुलपति डा शिशिर पांडेय ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कुल सचिव मधुवेंद्र पर्वत, आरके मिश्रा, सदस्य विधान परिषद डा बृजेश चंद्रा, टीएन त्रिपाठी, हरि पांडेय, विजय शंकर, बाला पांडेय, मीरा आचार्य, मंजू यादव, कनक लता निगम, दिनेशचंद्र त्रिपाठी, शैलजा चौहान, ममता आर्य सहित अन्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक डॉ गोपाल कुमार मिश्रा द्वारा किया गया।


गोष्ठी में सूचना विभाग चित्रकूट द्वारा डबल इंजन की सरकार के साढ़े सात वर्ष, टेबल कैलेंडर, उत्तर प्रदेश संदेश, मिशन शक्ति सशक्त नारी सशक्त प्रदेश, सूचना पंचांग, काफी टेबल बुक हार्ड बाउंड, आर्टिकल बुक हार्ड बाउंड, सनातन गर्व महाकुंभ पर्व नमक बुकलेट सहित अन्य साहित्य का वितरण भी किया गया।
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