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Ramadan 2019: लिपस्टिक की लाली होठों तक रहे तो नहीं टूटता रोजा, ये भी जानें
Thu, 09 May 2019 04:38 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 09 May 2019 04:38 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
अगर महिला रोजेदार इस तरह होठों पर लिपस्टिक लगाए कि इसकी लाली मुंह के अंदर न जाए तो जायज है। अगर लाली मुंह के अंदर चली जाती है तो रोजा टूटता नहीं लेकिन मकरूह (खराब) हो जाता है।
इस संबंध में कुल हिंद इस्लामिक अकादमी की अल शरिया हेल्पलाइन पर बुधवार को मसला पूछा गया। इस पर उलेमा ने लिपस्टिक की लाली होठों तक रहने को जायज करार दिया है। इसके साथ ही बिना सहरी किए रोजा रखने का मसला भी पूछा गया। इसे भी उलेमा ने जायज ठहराया है।
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इस संबंध में कुल हिंद इस्लामिक अकादमी की अल शरिया हेल्पलाइन पर बुधवार को मसला पूछा गया। इस पर उलेमा ने लिपस्टिक की लाली होठों तक रहने को जायज करार दिया है। इसके साथ ही बिना सहरी किए रोजा रखने का मसला भी पूछा गया। इसे भी उलेमा ने जायज ठहराया है।
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इसके साथ ही एक और दिलचस्प सवाल हेल्प लाइन से पूछा गया। सवाल था कि अगर जबान से कोई चीज चखकर थूक दी तो इससे क्या रोजा टूटेगा? उलेमा ने जवाब दिया कि किसी चीज को चखकर थूक देने से रोजा नहीं टूटता है। अगर कोई बिना कारण ऐसी हरकत करता है तो उसका रोजा मकरूह हो जाता है।
एक और सवाल पूछा गया कि अगर हलक के अंदर मक्खी चली गई तो क्या रोजा टूट जाएगा? इस पर जवाब दिया गया कि अगर मक्खी स्वयं हलक के अंदर चली गई तो इससे रोजे में कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसके अलावा एक और सवाल के जवाब में हेल्पलाइन से बताया गया कि अगर हाफिज दाढ़ी मुंडवा लेता है तो उसके पीछे तरावीह की नमाज पढ़ना मकरूह है। दाढ़ी मुंडवाने को हराम करार दिया गया।
एक और सवाल पूछा गया कि अगर हलक के अंदर मक्खी चली गई तो क्या रोजा टूट जाएगा? इस पर जवाब दिया गया कि अगर मक्खी स्वयं हलक के अंदर चली गई तो इससे रोजे में कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसके अलावा एक और सवाल के जवाब में हेल्पलाइन से बताया गया कि अगर हाफिज दाढ़ी मुंडवा लेता है तो उसके पीछे तरावीह की नमाज पढ़ना मकरूह है। दाढ़ी मुंडवाने को हराम करार दिया गया।
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खास
रमजान के महीने में ही पैगंबर-ए-इस्लाम की पहली पत्नी हजरत खदीजा बिंत खुवालिद रजिअल्लाहोतालाअन्हा का इंतकाल हुआ था। उन्हें सारे मुसलमानों की मां (उम्मुल मुस्लमीन) कहा जाता है। उनका इंतकाल जिस दिन हुआ, उस दिन रमजान की 10 तारीख रही है।
पैगंबर इस्लाम के अल्लाह का रसूल होने की सबसे पहले उन्हीं ने घोषणा की। इस्लाम के प्रचार-प्रसार में हजरत खदीजा रजिअल्लाहोतालाअन्हा सबसे अहम योगदान रहा है।
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पैगंबर इस्लाम के अल्लाह का रसूल होने की सबसे पहले उन्हीं ने घोषणा की। इस्लाम के प्रचार-प्रसार में हजरत खदीजा रजिअल्लाहोतालाअन्हा सबसे अहम योगदान रहा है।