राम मंदिर आंदोलन: गुमनामी में जी रहा नागर बंधुओं का परिवार, बेटा बोला- 22 को आमंत्रित तक नहीं किया, पढ़ें कहानी
Kanpur News: स्व. सतीश नागर के बेटे सुधांशु नागर का कहना है कि उनके परिवार को इस लायक भी नहीं समझा गया कि 22 को प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन उन्हें आमंत्रित किया जाए। सुधांशु ने अपनी टूटी फूटी दुकान में अपने पिता का वह चित्र भी लगा रखा है, जब वे आंदोलन के दौरान अयोध्या गए थे।
विस्तार
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने वालों में कानपुर शहर की भी फेहरिस्त लंबी है। इसमें कई प्रमुख नामों में कुछ ऐसे भी हैं, जो अब दुनिया में तो नहीं हैं, लेकिन उनका परिवार आज भी गुमनामी में जी रहा है। ऐसे ही राम भक्ताें में किदवईनगर के सतीश नागर का परिवार है।
बताया जाता है कि सतीश नागर उन लोगों में भी शामिल थे, जिन्हें राम मंदिर आंदोलन में आरोपी बनाया गया था। सतीश नागर की पत्नी आदर्श नागर बताती हैं कि उनके देवर अमित नागर भी इस आंदोलन में शामिल थे, वे अयोध्या तो गए लेकिन आज तक लौटे नहीं। तब वे 19 वर्ष के थे।
उनकी शादी नहीं हुई थी। स्व. सतीश नागर के बेटे सुधांशु नागर जो एक छोटी दुकान चलाते हैं। उनका कहना है कि पिता और चाचा तो चले गए, उसके बाद से उनके यहां कोई झांकने तक नहीं आया। न किसी ने कभी कोई खोज खबर ली। यहां तक की इतने बड़ें अवसर पर भी याद नहीं किया।
आमंत्रित करने के लायक तक नहीं समझा
उनका कहना है कि उनके परिवार को इस लायक भी नहीं समझा गया कि 22 को प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन उन्हें आमंत्रित किया जाए। सुधांशु ने अपनी टूटी फूटी दुकान में अपने पिता का वह चित्र भी लगा रखा है, जब वे आंदोलन के दौरान अयोध्या गए थे।