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बताओ अईस लभेड़ मची है.. व्हाट्सएप भेजिन हैप्पी श्राद्ध: राजू श्रीवास्तव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:55 AM IST
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राजू श्रीवास्तव
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पिछले दिनों श्राद्ध रहे.. लोग खूब आपन प्रियजनन केर श्राद्ध किहिन.. भईया ई बहुत बड़ा अवसर होत है अपने पुरखन का तारे खातिर.. काहे से उनके नाम पे श्राद्ध करे से उनकी आत्मा तर जात है अउर तुमका उन लोगन का आशीर्वाद मिलत है.. तो श्राद्ध के दिनन मा हम मसवानपुर आपन रिश्तेदारन से मिले गए रहेन.. तो हुंवा हम पूछे कहां हैं गुड्डू.. दिखाई नहीं दे रहे हैं.. तो उई कहे गुड्डू गया गया है..
राजू श्रीवास्तव
हम कहा अरे सीधे बताओ तो कहे अरे गुड्डू गया गया है.. फिर हम कहा यार मोराही ना करौ.. तो कहे भईया वो जो बिहार में शहर है गया.. हुंवा आपन बाप केर श्राद्ध करे गया है.. हम कहा यार ये बिहार वाले अजीब नाम रखे हैं गया.. ससुर कंफ्यूज किये हैं.. मगर झकरकटी और गंदा नाला से तो अच्छा नाम है.. तो हम कहा गुड्डू घर मा नहीं हैं तो का पानी पत्ता ना मिली का.. खैर चाय नाश्ता भा.. वैसे श्राद्ध मा गया, हरिद्वार और इलाहाबाद मा पंडा लोगन केर बड़ी रंगबाजी चलत है..
राजू श्रीवास्तव
ई पंडा लोग इलाहाबाद से दुई चार स्टेशन पहिले सेहे ट्रेन मा लटक जात हैं अउर श्राद्ध कराये आये लोगन का बहिकाय के उतार लेत हैं.. आवाज लगावा करत हैं त्रिवेणी जा रहे हौ.. यहीं उतर लेव.. हुंवा बहुत भीड़ होई.. हिंया बगल में गंगा जी में सब हुई जाई.. पता चला गंगा जी बोल के कौनो छमक नली मा उनका गोता लगवाय दीन.. अइसेहे एक परिवार का ई पंडा लोग उतार के कौनो छोट गंगा कहि के हुंवा कौनो गड़इया मा सब उपक्रम करे लाग तो उई लोग पहिचान गए कि ई गंगाजी ना होंय.. तो उई सब फईल गए अउर भसड़ मचाय के हुंवा से निकल के त्रिवेणी संगम पे पहुंचे और श्राद्ध पिंडदान करे लाग..
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राजू श्रीवास्तव
काहे से मान्यता ई है कि खीर पूरी बनाय के रखौ.. अउर कौवा अगर आय के चख ले तो ई माना जात है कि उन्होंने खाय लिहा जेका श्राद्ध है.. तो उई परिवार का बच्चा अपनी माता के साथ आपन पिताजी का श्राद्ध करत रहा.. पत्तल पे खीर पूरी रखा गवा.. अउर उई दुइनो कौवे के आय का इंतजार करे लाग.. एक तो श्राद्ध वाले दिन कौवा बहुत बिजी रहत हैं काहे से उनका पेट बहुत भरा रहत है.. अउर कुत्ता लोग पीछे खड़े मुस्कियावा करत हैं.. खैर बहुत देर बाद एक कौवा लहराता भया आवा..
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राजू श्रीवास्तव
नीचे आवा पर बिगैर खाए चला गवा.. थोड़ी देर बाद कौवा फिर आवा और बिगैर खाय चला गवा तो ऊ बच्चा बोला अम्मा तुम उधर अंदर जाओ.. पिताजी आज भी तुमसे डरत हैं.. ओके बाद कौवा फिर डेढ़ दो किलोमीटर का चक्कर लगाय के आवा.. और इनकी खीर पूरी का छुईस भी नहीं.. बगल वाले केर खाय के निकल गवा.. थोड़ी देर बाद फिर घूम के आवा और फिन इनकि खीर पूरी नहीं खाईस दूसर लोगन केर खाय के निकल गवा.. तो उई बच्चे केर अम्मा रोवे लाग.. उई रोवत रोवत कहिन इनकी तो शुरूवे से आदत रही.. हमरे हाथ का तो खावत नहीं रहें.. हमरे हाथ का तो इनका अच्छा ही नहीं लगत रहा..