बड़ा खतरा: रेल गंगापुल की हो रही है मरम्मत…नीचे कोठी में पड़ी दरार, DRM बोले- हो चुकी है जांच, पूरी तरह सुरक्षित
Kanpur News: लखनऊ-कानपुर को जोड़ने वाले रेल गंगापुल की सभी कोठियों का पहले भी जैकेटिंग कार्य हो चुका है। एक रेल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष 2000 और वर्ष 2018 में रेल गंगापुल की कोठियों में जैकेटिंग कार्य कराया गया था। उस समय कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट कानपुर यूनिट की ओर से कोठियों की मरम्मत कराई गई थी।
विस्तार
रेल गंगापुल पर कानपुर छोर के डाउन ट्रैक की चार नंबर कोठी की ऊपरी सतह का प्लास्टर उखड़ रहा है। इससे कोठी में दरार दिखने लगी है। अंग्रेजों के जमाने में पुल का निर्माण 1926 में हुआ था और यह 99 साल की उम्र पूरी कर चुका है। बीते साल गंगा पर बने वाहन पुल का एक हिस्सा ढह गया था। जांच में पता चला था कि कोठियों के कमजोर होने के कारण हिस्सा ढहा है।
अप रेल लाइन पर रेलवे मेगा ब्लॉक लेकर मरम्मत कार्य करा रहा है, ताकि कानपुर-लखनऊ के बीच पड़ने वाले इस गंगापुल से 100 किलोमीटर की स्पीड में ट्रेनें गुजर सकें। अप रेल लाइन पर नए एचबीम चैनल स्लीपर और लोहे की चादर डालने का कार्य कराया जा रहा है। इधर, पुल की कोठियां (पिलर) भी जवाब देते दिखने लगी हैं।
बाहरी हिस्से में मजबूत कंक्रीट प्लास्टर होना है
कानपुर छोर से पुल की चार नंबर कोठी में ऊपरी सतह के उखड़े प्लास्टर के बीच पड़ी दरार कुछ यहीं संकेत दे रही है। मंगलवार दोपहर मौके पर मौजूद एडीईएन सेकेंड राहुल जबरवाल से पिलर की दरार के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि पुल की सभी कोठियों की जैकेटिंग यानी बाहरी हिस्से में मजबूत कंक्रीट प्लास्टर कराने का कार्य होना है। विभाग इसे समय-समय पर कराता है।
मेंटीनेंस के बाद और मजबूती मिल जाएगी
इसका इस्टीमेट बनाकर रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। अप्रूवल मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा। उम्मीद है कि दो से तीन माह में स्वीकृति मिल जाएगी। पुल पूरी तरह से मजबूत है। मेंटीनेंस के बाद इसे और मजबूती मिल जाएगी। उत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक एसएम शर्मा ने बताया कि इसकी जानकारी करके इसे दिखवाया जाएगा।
कोठियों का पहले भी हो चुका है जैकेटिंग कार्य
लखनऊ-कानपुर को जोड़ने वाले रेल गंगापुल की सभी कोठियों का पहले भी जैकेटिंग कार्य हो चुका है। एक रेल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष 2000 और वर्ष 2018 में रेल गंगापुल की कोठियों में जैकेटिंग कार्य कराया गया था। उस समय कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट कानपुर यूनिट की ओर से कोठियों की मरम्मत कराई गई थी।
डीआरएम: रेल पुल की हो चुकी है तकनीकी जांच, पूरी तरह सुरक्षित
उत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक एसएम शर्मा ने बताया कि कानपुर-उन्नाव के बीच गंगा नदी पर बना यह पुल अभी पूरी तरह सुरक्षित है। हो सकता है कि स्लीपर बदलने के दौरान किसी कोठी का प्लास्टर उखड़ा हो, इसमें कोई खास बात नहीं है। किसी भी रेलवे पुल की औसत आयु 150 साल मानी जाती है। समय-समय पर तकनीकी जांच कराकर सुधार भी कराया जाता है।
रेलवे पुल में अभी कोई खामी नहीं है
पिछले दिनों कराई गई रूटीन तकनीकी जांच के बाद ही अप ट्रैक में एच टाइप स्टील स्लीपर लगाने का फैसला लिया गया था। इससे पहले 26 नवंबर 2024 को गंगा नदी के वाहन पुल का कोठी का कुछ हिस्सा टूटने से दो कोठियों के बीच का 30 मीटर हिस्सा नदी में गिरने के सवाल पर बताया कि वह पुल 159 साल पहले 1875 में बना था। कोठियों में दरार होने पर पी़डब्ल्यूडी ने अप्रैल 2021 में ही यातायात के लिए पुल बंद कर दिया था। रेलवे पुल में अभी कोई खामी नहीं है। अगर प्लास्टर उखड़ा है, तो उसे ठीक कराया जाएगा।